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जातक कथाएँ (पालि से प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)

Jataka Kathayen (Authentic Hindi Translation from Pali)

भगवान बुद्ध / पालि त्रिपिटक द्वारा

स्रोत: जातक कथाएँ (पालि से प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद) · हिन्दी साहित्य सम्मेलन, प्रयाग · 1956 (उद्गम)

DevanagariHindipublished479 पृष्ठ

कह पूर्व-जन्म की कथा कही।

तिन्दुक ] २३१

अभी प्रज्ञावान् नहीं हैं, पहले भी प्रज्ञावान् तथा उपायकुशल रहे हैं।" इतना
कह पूर्व-जन्म की कथा कही।

ख. अतीत कथा

पूर्व समय में वाराणसी में ब्रह्मदत्त के राज्य करने के समय बोधिसत्त्व एक
वानर के रूप में पैदा हो अस्सी हजार बन्दरों की मण्डली के साथ हिमालय
में रहने लगे।
वहीं पास ही एक प्रत्यन्त-गाँव था, जो कभी बसता था, कभी उजड़ जाता
था। उस गाँव के बीच में शाखा-प्रशस्त तथा मधुर फलों से युक्त एक तिन्दुक-
वृक्ष था। जब गाँव बसा न होता, तो वानर आकर उस वृक्ष के फल खाते।
अगली बार फलों का मौसम आने पर वह गाँव बसा हुआ था। उसके
चारों ओर बाँसो का घेरा था और एक फाटक था। उस वृक्ष की शाखाएँ
भी फलों के भार से झुकी हुई थीं।
वानर सोचने लगे—हम पहले अमुक गाँव में तिन्दुक फल खाते थे।
इस बार वह वृक्ष फला है या नहीं ? उस गाँव में बस्ती है या नहीं ? यह
सोच उन्होंने एक वानर को समाचार मालूम करने के लिए भेजा।
उसने लौट कर कहा कि वृक्ष फला है और गाँव में घनी बस्ती है।
वानरों ने जब सुना कि वृक्ष फला है तो उन्हें बड़ी खुशी हुई कि मीठे मीठे फल
खाने को मिलेंगे। बहुत सारे वानरों ने वानरेश को जाकर कहा। वानरेश
ने पूछा—"गाँव बसा है वा नहीं ?
'देव ! बसा है।"
“तो (लौट) जाओ। मनुष्य बहुत मायावी होते हैं।"
"देव ! आधी रात के समय जब मनुष्य सो जाएँगे, तब खाएँगे।"
बहुत से वानरों ने जाकर वानरेश को मना लिया। फिर हिमालय से
उतर, उस ग्राम से थोड़ी ही दूर पर वह मनुष्यों के सोने के समय की प्रतीक्षा
करते हुए एक बड़े भारी पत्थर पर सो रहे। आधी रात को जब मनुष्य सो
रहे थे उन्होंने वृक्ष पर चढ़ फल खाए।
एक आदमी शौच के लिए घर से निकला। उसने गाँव के बीच

२३२ [ २३.१७७
जाने पर बानरो को देखा तो और आदमियो को खबर दी। बहुत से आदमी
तीर कमान तैयार कर, नाना प्रकार के आयुध ले, ढेले-डण्डे आदि के साथ
वृक्ष को घेर कर खड़े हो गए कि रात बीतने पर बानरो को पकड़ेंगे।
अस्सी हजार बानरो ने मनुष्यों को देखा तो उन्हें डर लगा कि अब मरे।
उन्होंने सोचा कि बानरेश को छोड़ उन्हें और कही शरण न मिलेगी। वे उसके
पास गए और पहली गाथा कही—
धनुहत्थकलापेहि नेत्तिसवरधारिहि
समन्ता परिकिण्णम्हा कथ मोक्खो भविस्सति ॥
[तीर कमान हाथ में लिए तथा उत्तम खड्ग धारण किए हुए आदमियो
से हम घिरे हैं। कैसे मुक्त होगे ? ]
धनुहत्थकलापेहि, धनुष और (तीर-)समूह जिनके हाथ में हैं, धनुष
और तीर-समूह लेकर जो खड़े हैं। नेत्तिसवरधारिहि, नेत्तिस कहते हैं खड्ग
को, उत्तम खड्गधारियो से, परिकिण्णम्हा, हम घिरे हुए है, कथ किस उपाय
से हमारा मोक्ष होगा।
उनकी बात सुन बानरेश ने कहा—'डरो मत ! मनुष्यो को बहुत काम
रहते हैं। अभी आधी रात है। यह हमें मारने के लिए खडे हैं। इस (हमारे
मारने के) काम में विघ्न करने वाला दूसरा काम पैदा कर दें।' इस प्रकार
उन्हें आश्वासन देते हुए दूसरी गाथा कही—
अप्पेव बहुकिच्चान अत्थो जायेय कोचि न
अथ्थिय रुक्खस्स अच्छेद्दन खज्जतञ्ञेव तिन्दुक ॥
[इन बहुत काम वालो को कोई न कोई काम पैदा हो सकता है। वृक्ष
पर अभी फल लगे हैं। तिन्दुक को खाओ।]
नं निपातमात्र है। अप्पेव बहुकिच्चान, मनुष्यो को दूसरा कोचि अत्यो
उत्पन्न हो सकता है। अथ्थिय रुक्खस्स अच्छेद्दन इन वृक्षो पर से तोडने उतारने

कच्छप ] २३३
की बहुत जगह है। खज्जतञ्चेव तिन्दुक तिन्दुक फल खाओ। तुम्हें जितनी
जरूरत है उतने फल खाओ। हमें मारने का समय आएगा तब देखेंगे।
इस प्रकार महासत्त्व ने सब को दिलासा दिया। यह आश्वासन न मिलता
तो डर था कि सभी हृदय फट कर मर जाते।
महासत्त्व ने इस प्रकार वानरो को दिलासा दे कहा—सभी वानरो
को इकट्ठा करो। इकट्ठे होने पर बोधिसत्त्व के सेनक नाम भानजे को न
देखकर वह बोले कि सेनक नहीं आया। यदि सेनक नहीं आया तो मत डरो।
वह अब कुछ अच्छा काम करेगा।
वानरो के भागने के समय सेनक सोता रह गया था। पीछे उठ कर जब
उसने किसी को न देखा तो वह भी वानरो के पीछे पीछे आया। रास्ते में उसने
आदमियो को देखकर सोचा कि बानरो के लिए खतरा पैदा हो गया। उसने
गांव के किनारे पर अग्नि जला कर कातती हुई एक स्त्री के पास जा, खेत पर
जाने वाले लड़के की तरह उससे मशाल ले, जिधर की हवा थी उधर खडे हो
गांव में आग लगा दी।
आदमी वानरो को छोड़ कर आग बुझाने दौड़ पड़े। वानर भागे, लेकिन
भागते हुए सेनक के लिए एक एक फल तोड़ कर लेते गए।
शास्ता ने यह धर्म-देशना ला जातक का मेल बैठाया।
उस समय भानजा सेनक महानाम शाक्य था। वानर समूह बुद्ध-परिषद
थी। वानरेश तो में ही था।
१७८. कच्छप जातक
"जनित्तम्मे भवित्तम्मे..." यह शास्ता ने जेतवन में रहते समय एक ऐसे
आदमी के बारे में कही जो प्लेग से मुक्त हो गया था।