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महाभारत (खंड २) - वन पर्व
Mahabharata (Vol 2) - Vana Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
DevanagariSanskritpublished2,580 पृष्ठ
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पृष्ठ 989स्थायी लिंक
षट्चत्वारिंशदधिकशततमोऽध्यायः
भीमसेनका सौगन्धिक कमल लानेके लिये जाना और कदलीवनमें उनकी हनुमान्जीसे भेंट
वैशम्पायन उवाच
तत्र ते पुरुषव्याघ्राः परमं शौचमास्थिताः ।
षड्रात्रमवसन् वीरा धनंजयदिदृक्षवः ॥ १ ॥
**वैशम्पायनजी कहते हैं—**जनमेजय! वे पुरुषसिंह वीर पाण्डव अर्जुनके दर्शनके लिये उत्सुक हो वहाँ परम पवित्रताके साथ छः रात रहे ॥ १ ॥