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अद्भुत रामायण (पं. ज्वालाप्रसाद मिश्र हिन्दी टीका सहित)

Adbhut Ramayana Hindi

महर्षि वाल्मीकि (टीकाकार: पं. ज्वालाप्रसाद मिश्र) द्वारा

स्रोत: Maharshi Valmiki Krit Srimad Adbhut Ramayanam with Hindi Tika by Pt. Jwala Prasad Mishra (उद्गम)

DevanagariHindipublished173 पृष्ठ

सर्ग ] हिन्दीटीकासहित (१४५)

सर्ग ] हिन्दीटीकासहित (१४५)

हिरण्यवर्णा रजनी जगन्मंत्रप्रवर्तिका ॥ मंदराद्रि निवासा च शारदा स्वर्णमालिनी ॥ ९७ ॥ रत्नमाला रत्नगर्भा पृथ्बी विश्वप्रमाथिनी ६१० ॥ पद्मासना पद्मनिभा नित्यतुष्टामृतोद्भवा ॥ ९८ ॥

हिरण्यवर्णवाली, रजनी, जगत्‌के मन्त्र करनेवाली, मंदर पर्वतपर निवास करनेवाली, शारदा, स्वर्णमालिनी ॥ ९७ ॥ रत्नमाला, रत्नगर्भा, पृथ्बी, विश्वप्रमाथिनी ६१० पद्मासना, पद्मनिभा, नित्यतुष्टा अमृतोद्भवा ॥ ९८ ॥

धुन्वती दुष्प्रकंपा च सूर्यमाता दृषद्वती ॥ महेंद्रभगिनी माया ६२० वरेण्यावरदर्पिता ॥ ९९ ॥ कल्याणी कमला रामा पञ्चभूतवरप्रदा ॥ वाच्या वरेश्वरी नन्द्या दुर्जया ६३० दुरतिक्रमा ॥ १०० ॥

धुन्वती, दुष्प्रकंपा, सूर्यमाता, दृषद्वती, महेन्द्रभगिनी, माया ६२० वरेण्या, वरसे दर्पित ॥ ९९ ॥ कल्याणी, कमला, रामा, पञ्चभूतोंको वरणकी देनेवाली वाच्या, वरेश्वरी, नन्द्या, दुर्जया ६३० दुरतिक्रमा ॥ १०० ॥

कालरात्रिर्महावेगा वीरभद्रहितप्रिया ॥ भद्रकाली जगन्माता भक्तानां भद्रदायिनी ॥ १०१ ॥ कराला पिंगलाकारा नामवेदा ६४० महानदा ॥ तपस्विनी यशोदा च यथाध्वपरिवर्तिनी ॥ १०२ ॥

कालरात्रि, महावेगा, वीरभद्रहितप्रिया, भद्रकाली, जगत्‌की माता, भक्तोंको आनन्द देनेवाली ॥ १०१ ॥ कराला, पिंगलाकारवाली, नामवेदा ६४० महनदा, तपस्विनी, यशोदा, यथाध्वपरिवर्तिनी ॥ १०२ ॥

शंखिनी पद्मिनी सांख्या सांख्ययोगप्रवर्तिका ॥ चैत्री संवत्सरा ६५० रुद्रा जगत्संपूरणीन्द्रजा ॥ १०३ ॥ शुंभारिः खेचरी खस्था कंबुग्रीवा कलिप्रिया ॥ खरध्वजा खरारूढा ६६० परार्ध्या परमालिनी ॥ १०४ ॥

शंखिनी, पद्मिनी, सांख्ययोगकी प्रवृत्त करनेवाली, चैत्री, संवत्सरा ६५० रुद्रा जगत्‌संपूरणी-इन्द्रजा ॥ १०३ ॥ शंभारि, खेचरी, आकाशमें स्थित रहनेवाली, कम्बुग्रीवा, कलिप्रिया, खरध्वजा, खरारूढा, ६६० परार्ध्या, परमालिनी ॥ १०४ ॥

ऐश्वर्यरत्ननिलया विरक्ता गरुडासना ॥ जयंती हृद्गुहा रम्या सत्त्ववेगा गणाग्रणीः ॥ १०५ ॥ संकल्पसिद्धा ६७० साम्यस्था सर्वविज्ञानदायिनी ॥ कलिकल्मषहंत्री च गुह्योपनिषदुत्तमा ॥१०६॥

( १४६ ) अद्भुतरामायण [ पंचविंशति

ऐश्वर्यरत्नके स्थानवाली, विरक्त, गरुडके आसनवाली जयन्ती, हृद्गुहा, रम्यासत्त्वके वेगवाली, गणोंमें अग्रणी ॥ १०५ ॥ संकल्पसिद्धा ६७० साम्यमें स्थित, सब विज्ञानकी देनेवाली, कलिकलमंषकी नाश करनेवाली गुह्योपनिषद रूप, उत्तमा ॥ १०६ ॥

नित्यदृष्टिः स्मृतिर्व्याप्तिः पुष्टिस्तुष्टिः ६८० क्रियावती ॥ विश्वामरेश्वरेशाना भुक्तिर्मुक्तिः शिवामृता ॥ १०७ ॥ लोहिता सर्वमाता च भीषणा वनमालिनी ६९० ॥ अनन्तशयनाऽनाद्या नरनारायणोद्भवा ॥ १०८ ॥

नित्यदृष्टि, स्मृति, व्याप्ति, पुष्टि, तुष्टि ६८० क्रियावती, विश्वा, अमरपतियोंकी ईश्वरी, भुक्ति, मुक्ति, शिवा, अमृता ॥ १०७ ॥ लोहिता, सर्वमाता भीषणा, वनमालिनी ६९० अनन्तशयना, अनाद्या, नरनारायणोद्भवा ! १०८।

नृसिंही दैत्यमथिनी शंखचक्रगदाधरा ॥ संकर्षणसमुत्पत्तिरंबिकोपातसंश्रया ॥ १०९ ॥ महाज्वाला. महामूर्तिः ७०० सुमूर्तिः सर्वकामधुक् ॥ सुप्रभा सुतरां गौरी धर्मकामार्थमोक्षदा ॥ ११० ॥

नृसिंही, दैत्यमंथनी, शंख चक्र गदा धारिणी, संकर्षणसमुत्पत्ति, अम्बिका, समीपमें निवास करनेवाली ॥ १०९ ॥ महाज्वलाला, महामूर्ति ७००, सुमूर्ति सब काम देनेवाली, सुप्रभा, अत्यंत गौरी, धर्म काम अर्थ मोक्षकी देनेवाली ११०

भ्रूमध्यनिलयाऽपूर्वा प्रधानपुरुषा बली ॥ महाविभूतिदा ७१० मध्या सरोजनयनासना ॥ १११ ॥ अष्टादशभुजा नाटचा नीलोत्पलदलप्रभा ॥ सर्वशक्त्या समारूढा धर्माधर्मानुवर्जिता ॥ ११२ ॥

भौँके मध्यमें स्थानवाली, अपूर्वा, प्रधान पुरुषा, वली महाविभूतिकी देनेवाली ७१०, मध्या, कमलनेत्रासना ॥ १११ ॥ अठारह भुजावाली, नाटचा-, नीले कमलके समान कांतिवाली, सब शक्तिद्वारा समारूढ, धर्म अधर्मसे वर्जित ॥ ११२ ॥

वैराग्यज्ञाननिरता निरालोका ७२० निरेंद्रिया ॥ विचित्रगहना धीरा शाश्वतस्थानवासिनी ॥ ११३ ॥ स्थानेश्वरी निरानन्दा त्रिशूलवरधारिणी ॥ अशेषदेवतामूर्तिर्देवतापरदेवता ७३० । ११४ ।

वैराग्य ज्ञानमें निरत, निरालोका ७२०, निरिन्द्रिया, विचित्रगहना, धीरजवाली, शाश्वतस्थानमें निवास करनेवाली ॥११३॥ स्थानेश्वरी, निरानन्दा,

सर्ग हिन्दीटीकासहित ( १४७ )

त्रिशूलश्रेष्ठ धारण करनेवाली, संपूर्ण देवताओंकी मूर्ति, देवता, परदेवता,
स्वरूप ७३० ॥ ११४ ॥

गणात्मिका गिरेः पुत्री निशुम्भविनिपातिनी ॥ अवर्णा वर्णरहिता
निर्वाणा वीजसम्भवा ॥ ११५ ॥ अनन्तवर्णाऽनन्यस्था शंकरी ७४०
शान्तमानसा ॥ अगोत्रा गोमती गोप्त्री गुह्यरूपा गुणान्तरा । ११६ ।

गणात्मिक पर्वतराजपुत्री निशुम्भकी नाश करनेवाली, अवर्णा, वर्णसे
रहित, निर्वाणा, बीजसम्भवा ॥ ११५ ॥ अनन्तवर्णा, अनन्यमें स्थितिवाली,
शंकरी ७४०, शांत मनवाली अगोत्रा, गोमती, रक्षा करनेवाली, गुह्यरूपा,
गुणान्तरा ॥ ११६ ॥

गोश्रीर्गव्यप्रिया गौरी गणेश्वरनमस्कृता ॥ सत्यमात्रा ७५०
सत्यसन्धा त्रिसन्ध्या संधिवर्जिता ॥ ११७ ॥ सर्ववादाश्रया सांख्या
सांख्ययोगसमुद्भवा ॥ असंख्येयाऽप्रमेयाख्या शून्या शुद्धकुलोद्भवा
७६० ॥ ११८ ॥

गोश्री, गौके पदार्थ घृत दुग्धकी प्यार करनेवाली गौरी, गणेश्वरसे नमस्कृत
सत्यमात्रावाली ७५० सत्यसन्धा, तीनों सन्ध्या और संधिसे रहित ॥ ११७ ॥
सर्ववादके आश्रयवाली, सांख्ययुक्त, सांख्य, योग द्वारा प्रगट होनेवाली,
अनन्ता, प्रमाके अयोग्य, शून्या, शुद्धकुलमें प्रगट होनेवाली ७९० ॥ ११८ ॥

बिंदुनादसमुत्पत्तिः शंभुवामा शशिप्रभा ॥ विसङ्गा भेदरहिता
मनोज्ञा मधुसूदनी ॥ ११९ ॥ महाश्रीः श्रीसमुत्पत्ति ७७० स्तमःपारे
प्रतिष्ठिता ॥ त्रितत्त्वमाता त्रिविधा सुसूक्ष्मपद संश्रया ॥ १२० ॥

विन्दुनादसे प्रगट होनेवाली, शम्भुकी वामा, चन्द्रमाके समान कांतिवाली,
संगवर्जित, भेदरहित, मनोहरा, मधुसूदनी ॥ ११९ ॥ महाश्री, लक्ष्मीकी
प्रगट करनेवाली, ७७० तमके परपारमें स्थिति करनेवाली, तीन तत्वोंकी
माता, त्रिविधा, सूक्ष्मपदमें स्थिति करनेवाली ॥ १२० ॥

शांत्यतीता मलातीता निर्विकारा निराश्रया ॥ शिवाख्या चित्र
निलया ७८० शिवज्ञानस्वरूपिणी ॥ १२१ ॥ दैत्यदानवनिर्मात्री
काश्यपी कालकर्णिका ॥ शास्त्रयोनिः क्रियामूर्तिश्चतुर्वर्गप्रद-
शिका ॥ १२२ ॥

( १४८ ) अद्भुतरामायण [ पंचविंशति-

शान्त्यतीता, मलसे परे, निर्विकारा, निराश्रया, शिवा, चित्रनिलया ७८० शिवके ज्ञानकी स्वरूपवाली ॥ १२१ ॥ दैत्यदानवकी निर्माण करनेवाली, काश्यपी, कालकर्णिका, शास्त्रयोनि, त्रियाकी मूर्ति, चार वर्ग (धर्म अर्थ काम मोक्ष) की दिखानेवाली ॥ १२२ ॥

नारायणी नवोद्भूता कौमुदी ७९० लिंगधारिणी ॥ कामुकी ललिता तारा परापरविभूतिदा ॥ १२३ ॥ परांजततामहिमा वडवा वामलोचना ॥ सुभद्रा देवकी ८०० सीता वेदवेदांगपारगा । १२४ ।

नारायणी, नवीन उद्भववाली, कौमुदी ७९० लिंगधारिणी, कामुकी, ललिता, तारा, परापरके ऐश्वर्यकी देनेवाली ॥ १२३ ॥ महामहिमावाली, वडवा, वामलोचना, सुभद्रा, देवकी ८०० सीता वेदवेदांगकी पार जानेवाली ॥ १२४ ॥

मनस्विनी मन्युमाता महामन्युसमुद्भवा ॥ अमृत्युरमृतास्वादा पुरुहूता पुरुप्लुता ॥ १२५ ॥ अशोच्या ८१० भिन्नविषया हिरण्य-रजतप्रिया ॥ हिरण्या राजती हैमी हेमाभरण भूषिता ॥ १२६ ॥

मनस्विनी, मन्युमाता, महाक्रोधमें होनेवाली, मृत्यु रहित, अमृतके अस्वाद वाली, पुरुहूता, पुरुप्लुप्ता ॥ १२५ ॥ शोचरहिता ८१०, भिन्न विषयवाली सोने चांदीको प्यार करनेवाली, सुवर्ण चांदी हेमरूपवाली, सुवर्णके गहनोंसे युक्त ॥ १२६ ॥

विभ्राजमाना दुर्ज्ञेया ज्योतिष्टोमफलप्रदा ॥ महानिद्रा ८२० समुद्भूतिर्बलीन्द्रा सत्यदेवता ॥ १२७ ॥ दीर्घा ककुद्मिनी विद्या शांतिदा शांतिवर्द्धिनी ॥ लक्ष्म्यादिशक्तिजननी शक्तिचक्रप्रव-र्तिका ॥ १२८ ॥

विशेषकर शोभायमान, जाननेमें न आने-ज्योतिष्टोम यज्ञका फल देने-वाली, महानिद्रा । ८२० समुद्भववाली, बलियोंमें श्रेष्ठ सत्यदेवतायुक्त ॥ १२७ ॥ दीर्घिका, ककुद्मिनी विद्या शांति देनेवाली, शांतिकी बढानेवाली, लक्ष्मी आदि शक्तिकी उत्पन्न करनेवाली, शक्तिचक्रको प्रवृत्त करनेवाली १२८

त्रिशक्तिजननी ८३० जन्या षडूर्मिपरिवर्जिता ॥ स्वाहा च कर्मकरणी युगांतदलनात्मिका ॥ १२९ ॥ संकर्षणा जगद्धात्री कामयोनिः किरीटिनी ॥ ऐंद्री ८४० त्रैलोक्यनमिता वैष्णवी परमेश्वरी ॥ १३० ॥