अद्भुत रामायण (पं. ज्वालाप्रसाद मिश्र हिन्दी टीका सहित)
Adbhut Ramayana Hindi
महर्षि वाल्मीकि (टीकाकार: पं. ज्वालाप्रसाद मिश्र) द्वारा
स्रोत: Maharshi Valmiki Krit Srimad Adbhut Ramayanam with Hindi Tika by Pt. Jwala Prasad Mishra (उद्गम)
सर्ग हिन्दीटीकासहित (१४१)
सर्ग हिन्दीटीकासहित (१४१)
ज्वालामालासहस्राढ्या देवदेवी मनोन्मनी ॥ उर्वी गुर्वी गुरुः श्रेष्ठा सगुणा षड्गुणात्मिका ॥ ६१ ॥ महाभगवती ३४० भव्या वसुदेवसमुद्भवा ॥ महेंद्रोपेंद्रभगिनी भक्तिगम्यपरायणा ॥ ६२ ॥
ज्वालामालासहस्राढ्या, देवदेवी, मनोन्मनी, उर्वी, गुर्वी, श्रेष्ठा, षड्-गुणात्मिका ॥ ६१ ॥ महाभगवती ३४० भव्या, वसुदेवसमुद्भवा, महेन्द्रोपेन्द्र-भगिनी, भक्तिगम्यपरायणा ॥ ६२ ॥
ज्ञानज्ञेया जरातीता वेदांतविषया गतिः ॥ दक्षिणा ३५० दहना बाह्या सर्वभूतनमस्कृता ॥ ६३ ॥ योगमाया विभावज्ञा महामोहा महीयसी ॥ सत्या सर्वसमुद्भूतिर्ब्रह्मवृक्षाश्रया ३६० मतिः ॥ ६४ ॥
ज्ञानज्ञेया, जरातीता, वेदान्तविषया, गति, दक्षिणा, ३५० दहना, बाह्या, सर्वभूतसे नमस्कृत ॥ ६३ ॥ योगमायाका विभाव जाननेवाली, सत्या, सबकी उत्पन्न करनेवाली, ब्रह्मवृक्षकी आश्रय करनेवाली ३६० मति ॥ ६४ ॥
बीजांकुरसमुद्भूतिर्महाशक्तिर्महामतिः ॥ ख्यातिः प्रतिज्ञा चित्सं-विन्महायोगेंद्रशायिनी ॥ ६५ ॥ विकृतिः ३७० शांकरी शास्त्री गंधर्वा यक्षसेविता ॥ वैश्वानरी महाशाला देवसेना गुहप्रिया ॥ ६६ ॥
बीज अंकुरकी उत्पत्तिका कारण, महाशक्ति, ख्याति, प्रतिज्ञा, चित्संवित्, महायोगेन्द्रशायिनी ॥ ६५ ॥ विकृति, ३७० शांकरी, शास्त्री, गन्धर्वा, यक्षसे सेवित, वैश्वानरी, महाशाला, देवसेना, गुहप्रिया ॥ ६६ ॥
महारात्री शिवानंदा शची ३८० दुःस्वप्ननाशिनी ॥ पूज्याऽपूज्या जगद्धात्री दुर्विज्ञेयस्वरूपिणी ॥ ६७ ॥ गुहांबिका गुहोत्पत्तिर्महापीठा मरुत्सुता ॥ हव्यवाहांतरा ३९० गार्गी हव्यवाहसमुद्भवा ॥ ६८ ॥
महारात्रि, शिवानन्द, शची ३८० दुःस्वप्ननाशिनी, पूज्या, अपूज्या, जगद्धात्री, दुर्विज्ञेयस्वरूपिणी ॥ ६७ ॥ गुहाम्बिका, गुहोत्पत्ति, महापीठा, मरुत्सुता, हव्यावाहान्तरा ३९० मार्गी, हव्यवाहसमुद्रवा ॥ ६८ ॥
जगद्योनिर्जगन्माता जगन्मृत्युर्जरातिगा ॥ बुद्धिर्माता बुद्धिमती पुरुषांतरवासिनी । ४०० ॥ ६९ ॥ तपस्विनी समाधिस्था त्रिनेत्रा दिविसंस्थिता ॥ सर्वेंद्रियमनोमाता सर्वभूतहृदिस्थिता ॥ ७० ॥
जगत्की योनी, जगत्की मृत्यु और जराका अतिक्रमण करनेवाली, बुद्धि, माता, बुद्धिमती, पुरुषान्तरवासिनी ४०० ॥ ६९ ॥ तपस्विनी, समाधिमें
( १४२ ) अद्भुतरामायण [ पंचविंशति
स्थित, त्रिनेत्रा, स्वर्णमें स्थित, संपूर्ण इन्द्रिय और मनकी माता, सब भूतोंके हृदयमें स्थित ॥ ७० ॥
संसारतारिणी विद्या ब्रह्मवादिमनोलया ॥ ब्रह्माणी बृहती ४१० ब्राह्मी ब्रह्मभूता भयावनिः ॥ ७१ ॥ हिरण्मयी महारात्रिः संसारपरिवर्तिका ॥ सुमालिनी सुरूपा च तारिणी भाविनी ४२० प्रभा ७२
संसारसे तारनेवाली, विद्या, ब्रह्मवादिनी, मनोलया, ब्रह्माणी, बृहती, ४१० ब्राह्मी, ब्रह्मभूता, भयावनी ॥ ७१ ॥ हिरण्मयी, महारात्री, संसारका परिवर्तन करनेवाली, सुमालिनी, सुरूपा, तारिणी, भाविनी ४२० प्रभा । ७२ ।
उन्मीलनी सर्वसहा सर्वप्रत्ययसाक्षिणी ॥ तपनी तापिनी विश्वा भोगदा धारिणीं धरा ४३० ॥ ७३ ॥ सुसौम्या चंद्रवदना तांडवासक्तमानसा ॥ सत्त्वशुद्धिकरी शुद्धिमलत्रयविनाशिनी ॥ ७४ ॥
उन्मीलनी, सर्वसहा, सब प्रत्ययकी साक्षिणी, तपनी, तापिनी, विश्वा, भोगदा धारिणी, धरा ४३० ॥ ७३ ॥ सुंसौम्या, चन्द्रवदना, तांडवमें प्रसन्न मनवाली, सत्वशुद्धिकारी, शुद्धि, तीनों मलका नाश करनेवाली ॥ ७४ ॥
जगत्प्रिया जगन्मूर्तिस्त्रिमूर्तिरमृताश्रया ४४० ॥ निराश्रया निराहारा निरंकुशरणोद्भवा ॥ ७५ ॥ चक्रहस्ता विचित्रांगी स्रग्विणी पद्मधारिणी ॥ परापरविधानज्ञा महापुरुषपूर्वजा ॥ ७६ ॥
जगत्प्रिया, जगत्की मूर्ति, त्रिमूर्ति, अमृताश्रया ४४९ निराश्रया, निराहारा, निरंकुशा रणोद्भवा ॥ ७५ ॥ चक्रहस्ता, विचित्रांगी, स्रग्विणी, पद्मधारिणी, परा, परविधानकी जाननेवाली, महापुरुषोंसे भी पूर्व होनेवाली ॥ ७६ ॥
विश्वेश्वरप्रिया ४५० ऽविद्या विद्युज्जिह्व जितश्रमा ॥ विद्यामयी सहस्राक्षी सहस्रश्रवणात्मजा ॥ ७७ ॥ सहस्ररश्मिपद्मस्था महेश्वरपदाश्रया ॥ ज्वालिनी ४६० सद्मना व्याप्ता तैजसी पद्मरोधिका ॥ ७८ ॥
विश्वेश्वरप्रिया, ४५० अविद्या विद्युतजिह्वा, श्रमरहिता, विद्यामयी, सहस्राक्षी-सहस्र श्रवणकी आत्मजा ॥ ७७ ॥ सहस्र रश्मि, पद्मस्था, महेश्वरपदाश्रया, ज्वालिनी ६४० पद्म करके व्याप्त, तैजसी, पद्मरोधिका । ७८