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अद्भुत रामायण (पं. ज्वालाप्रसाद मिश्र हिन्दी टीका सहित)

Adbhut Ramayana Hindi

महर्षि वाल्मीकि (टीकाकार: पं. ज्वालाप्रसाद मिश्र) द्वारा

स्रोत: Maharshi Valmiki Krit Srimad Adbhut Ramayanam with Hindi Tika by Pt. Jwala Prasad Mishra (उद्गम)

DevanagariHindipublished173 पृष्ठ

सर्ग] हिन्दीटीकासहित (१३९)

सर्ग] हिन्दीटीकासहित (१३९)

एकही वार सबकी भावना करनेवाली समुद्रकी शोषनेवाली, पार्वती, हिमालयकी पुत्री, परमानन्दकी देनेवाली ॥ ४३ ॥ गुणोंमें श्रेष्ठ, योगदायक २०० योग्या, ज्ञानमूर्तिका विकास करनेवाली, सावित्री, कमला, लक्ष्मी, श्री, अनन्तके हृदयमें स्थित ॥ ४४ ॥

सरोजनिलया शुभ्रा योगनिद्रा १२० सुदर्शना ॥ सरस्वती सर्वविद्या जगज्ज्येष्ठा सुमंगला ॥ ४५ ॥ वासवी वरदा वाच्या कीर्तिः सर्वार्थसाधिका २२० ॥ वागीश्वरी सर्वविद्या महाविद्या सुशोभना ४६

कमलके स्थानवाली, शुभ्र, योगनिद्रा, २१० सुदर्शना, सरस्वती, सर्वविद्या, जगज्ज्येष्ठा, सुमंगला ॥ ४५ ॥ वासवी, वरदाता, वाच्या, सब अर्थ साधनेवाली २२० वागीश्वरी, सर्वविद्या, महाविद्या, सुशोभना ॥ ४६ ॥

गुह्यविद्यात्मविद्या च सर्वविद्यात्मभाविता ॥ स्वाहा विश्वंभरी २३० सिद्धिः स्वधा मेधा धृतिः श्रुतिः ॥ ४७ ॥ नाभिः सुनाभिः सुकृतिर्माधवी नरवाहिनी २४० ॥ पूजा विभावरी सौम्या भगिनी भोगदायिनी ॥ ४८ ॥

गुह्यविद्या, आत्मविद्या, सर्वभाविता स्वाहा विश्वम्भरी, २३० सिद्धि, स्वधा, मेधा, धृति श्रुति ॥ ४७ ॥ नाभि, सुनाभि, सुकृति, माधवी, नरवाहिनी २४० पूज्या, विभावरी, सौम्या, भगिनी, भोग देनेवाली ॥ ४८ ॥

शोभा वंशकरी लीला मानिनी परमेष्ठिनी २५० ॥ त्रैलोक्यसुन्दरी रम्या सुन्दरी कामचारिणी ॥ ४९ ॥ महानुभावमध्यस्था महामहिषमर्दिनी ॥ पद्ममालापापहरा विचित्रमुकुटानना ॥ ५० ॥

शोभा, वंशकरी, लीला, मानिनी, परमेष्ठिनी २५० त्रैलोकसुन्दरी, कामचारिणी, ॥ ४९ ॥ महानुभावके मध्यमें स्थित होनेवाली, महामहिषकी मारनेवाली, पद्ममाला. पापकी हरनेवाली, विचित्र मुकुट मुखवाली ॥ ५० ॥

कांता २६० चित्राम्बरधरा दिव्याभरणभूषिता ॥ हंसाख्या व्योमनिलया जगत्सृष्टिविवर्द्धिनी ॥ ५१ ॥ नियंता मन्त्रवाहस्था नंदिनी भद्रकालिका ॥ आदित्यवर्णा २७० कौमारी मयूरवरवाहिनी ॥ ५२ ॥

कान्ता २६० चित्र अम्बर धारण करनेवाली, हंसनामक आकाशमें स्थानवली, जगत्की सृष्टि बढानेवाली ॥ ५१ ॥ नियंता, मंत्रके बाहर स्थित,

(१४०) अद्भुतरामायण [पंचविंशति-

नंदिनी, भद्रकालिका, आदित्यवर्णा, २७० कौमारी श्रेष्ठ मोरपर चढने-
वाली ॥ ५२ ॥

वृषासनगता गौरी महाकाली सुरार्चिता ।। अदितिर्नियता रौद्री
पद्मगर्भा २८० विवाहना ॥ ५३ ॥ विरूपाक्षी लेलिहाना महासुरविना
शिनी ॥ महाफलानवद्यांगी कामपूरा विभावरी ॥ ५४ ॥

वृषके आसनपर स्थित, गौरी, महाकाली देवताओंसे अर्चित, अदिति
नियता, रौद्री, पद्मगर्भा, २८० विवाहना ॥ ५३ ॥ विरूपाक्षी, जिह्वासे होठ
चाटनेवाली, महाअसुरोंकी नाश करनेवाली, कामफला, निन्दारहित अंग-
वाली, कामपूरा विभावरी ॥ ५४ ॥

विचित्ररत्नमुकुटा प्रणतर्द्धिविवर्द्धिनी २९० ।। कौशिकी कर्षिणी
रात्रिस्त्रिदशार्त्तिविनाशिनी ॥ ५५ ॥ विरूपा च सुरूपा च भीमा
मोक्षप्रदायिनी ॥ भक्तार्त्तिनाशिनी भव्या ३०० भवभावविना-,
शिनी ॥ ५६ ॥

विचित्र मुकुटवाली, भक्तोंकी ऋद्धि बढानेवाली, २९० कौशिकी कर्षिणी
रात्रि, देवताओंके दुःख नाश करनेवाली ॥ ५५ ॥ विरूपा, सुरूपा, भीमा,
मोक्षदाता, भक्तोंके दुःखनाशक, भव्या ३०० भवभावविनाशिनी ॥ ५६ ॥

निर्गुणा नित्यविभवा निःसारा निरपत्रपा ।। यशस्विनी सामगी-
तिर्भावांगनिलयालया ॥ ५७ ॥ दीक्षा ३१० विद्याधरी दीप्ता महेंद्र-
वनिपातिनी ॥ सर्वातिशायिनी विद्या सर्वशक्तिप्रदायिनी ॥ ५८ ॥

निर्गुणा, नित्यविभाववाली, निःसारा, निरपत्रपा (लज्जारहित), यश-
स्विनी, सामगीति, भवांगनिलयालया ॥ ५७ ॥ दीक्षा ३१० विद्याधरी,
दीप्ता, महेन्द्रनिपातिनी, सबसे अधिक विद्या, सब शक्तिकी देनेवाली ॥ ५८ ॥

सर्वेश्वरप्रिया तार्क्षी समुद्रान्तरवासिनी ॥ अकलंका निराधारा
३२० नित्यसिद्धा निरामया ॥ ५९ ॥ कामधेनुर्वेदगर्भा धीमती
मोहनाशिनी ॥ निःसंकल्पा निरातंका विनया विनयप्रदा ३३० । ६०।

सर्वेश्वरकी प्रिया, तार्क्षी, समुद्रके अन्तरमें निवास करनेवाली, कलंकरहित,
निराधारा, ३२० नित्यसिद्धा, निरामया, ॥ ५९ ॥ कामधेनु, वेदगर्भा, धीमती,
मोहनाशिनी, निःसंकल्पा, निरातंका, विनयप्रदा ३३० ॥ ६० ॥