अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
सूक्त-१५ देवता—अध्यात्म, व्रात्य
इस बात को जानने वाला पुरुष अन्नाद ब्रह्म के द्वारा अन्न का भोजन करता है. (२४)
सूक्त-१५ देवता—अध्यात्म, व्रात्य
तस्य व्रात्यस्य.. (१)
सप्त प्राणाः सप्तापानाः सप्त व्यानाः.. (२)
इस व्रात्य के सात प्राण, सात अपान तथा सात ही व्यान हैं. (१-२)
तस्य व्रात्यस्य. यो ऽस्य प्रथमः प्राण ऊर्ध्वो नामायं सो अग्निः.. (३)
इस वात्य का पहला ऊर्ध्व प्राण अग्नि है. (३)
तस्य व्रात्यस्य. यो ऽस्य द्वितीयः प्राणः प्रौढो नामासौ स आदित्यः.. (४)
इस व्रात्य का द्वितीय प्रौढ़ प्राण आदित्य है. (४)
तस्य व्रात्यस्य. यो ऽस्व तृतीयाः प्राणो ३ व्यू ढो नामासौ स चन्द्रमाः.. (५)
इस का जो तृतीय प्राण है, वह अव्यूढ़ नाम का चंद्रमा है. (५)
तस्य व्रात्यस्य. यो ऽस्व चतुर्थः प्राणो विभूर्नामायं स पवमानः.. (६)
इस का चतुर्थ प्राण विभु पवमान है. (६)
तस्य व्रात्यस्य. यो ऽस्य पञ्चमः प्राणो योनिनार्म ता इमा आपः.. (७)
इस व्रात्य का पांचवां प्राण योनि जल है. (७)
तस्य व्रात्यस्य. यो ऽस्य षष्ठः प्राणः प्रियो नाम त इमे पशवः.. (८)
इस का छठा प्राण प्रिय नाम वाला पशु है (८)
तस्य व्रात्यस्य. यो ऽस्य सप्तमः प्राणो ऽपरिमितो नाम ता इमाः प्रजाः..
(९)
इस के सप्तम प्राण का नाम अपरिमित है. यह प्रजा है. (९)
सूक्त-१६ देवता—अध्यात्म, व्रात्य
तस्य व्रात्यस्य. यो ऽस्य प्रथमो ऽपानः सा पौर्णमासी.. (१)
इस व्रात्य का प्रथम अपान पूर्णमासी है. (१)
तस्य व्रात्यस्य. यो ऽ स्य द्वितीयो ऽ पानः साष्टका (२)
इस का द्वितीय अपान अष्टकार है. (२)
तस्य व्रात्यस्य. यो ऽ स्य तृतीयो ऽ पानः सामावास्या.. (३)
इस का तृतीय अपान अमावस्या है. (३)
तस्य व्रात्यस्य. यो ऽ स्य चतुर्थो ऽ पानः सा श्रद्धा.. (४)
इस का चतुर्थ अपान श्रद्धा है. (४)
तस्य व्रात्यस्य. यो ऽ स्य पञ्चमो ऽ पानः सा दीक्षा.. (५)
इस का पांचवां अपान दीक्षा है. (५)
तस्य व्रात्यस्य. यो ऽ स्य षष्ठो ऽ पानः स यज्ञः.. (६)
इस का छठा अपान यज्ञ है. (६)
तस्य व्रात्यस्य. यो ऽ स्य सप्तमो ऽ पानस्ता इमा दक्षिणाः.. (७)
इस का सप्तम अपान दक्षिणा है. (७)
सूक्त-१७ देवता—अध्यात्म, व्रात्य
तस्य व्रात्यस्य. यो ऽ स्य प्रथमो व्यानः सेयं भूमिः.. (१)
इस व्रात्य का प्रथम व्यान भूमि है. (१)
तस्य व्रात्यस्य. यो ऽ स्य द्वितीयो व्यानस्तदन्तरिक्षम्.. (२)
इस का द्वितीय व्यान अंतरिक्ष है. (२)
तस्य व्रात्यस्य. यो ऽ स्य तृतीयो व्यानः सा द्यौः.. (३)
इस का तृतीय व्यान द्यौ है. (३)
तस्य व्रात्यस्य. यो ऽ स्य चतुर्थो व्यानस्तानि नक्षत्राणि.. (४)
इस का चतुर्थ व्यान नक्षत्र है. (४)
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तस्य व्रात्यस्य. योऽस्य पञ्चमो व्यानस्त ऋतवः.. (५)
इस का पांचवां व्यान ऋतु हैं. (५)
तस्य व्रात्यस्य. यो ऽ स्य षष्ठो व्यानस्त आर्तवाः.. (६)
इस का छठा व्यान आर्तव है. (६)
तस्य व्रात्यस्य. यो ऽ स्य सप्तमो व्यानः स संवत्सरः.. (७)
इस का सातवां व्यान संवत्सर है. (७)
तस्य व्रात्यस्य. समानमर्थं परि यन्ति देवाः संवत्सरं वा
एतदृतवो ऽ नुपरियन्ति व्रात्यं च.. (८)
देवगण इस के समान अर्थ को प्राप्त होते तथा संवत्सर और ऋतुएं भी इस का अनुमान
करते हैं. (८)
तस्य व्रात्यस्य. यदादित्यमभिसंविशन्त्यमावास्यां चैव तत् पौर्णमासीं च..
(९)
तस्य व्रात्यस्य. एकं तदेषाममृतमित्याहुतिरेव.. (१०)
अमावस्या और पूर्णिमा आदित्य में प्रवेश करती हैं. आहुति ही इन का अविनाशी होना
है. (९-१०)
सूक्त-१८ देवता—अध्यात्म, व्रात्य
तस्य व्रात्यस्य.. (१)
इस व्रात्य का दक्षिण चक्षु आदित्य है. (१)
यदस्य दक्षिणमक्ष्यसौ स आदित्यो यदस्य सव्यमक्ष्यसौ स चन्द्रमाः.. (२)
इस का वाम चक्षु चंद्रमा है. (२)
यो ऽ स्य दक्षिणः कर्णो ऽ यं सो अग्निर्यो ऽ स्य सव्यः कर्णो ऽ यं स
पवमानः.. (३)
इस का दाहिना कान अग्नि और बायां कान पवमान है. (३)
अहोरात्रे नासिके दितिश्चदितिश्च शीर्षकपाले संवत्सरः शिरः.. (४)
इस की नासिका दिन और रात हैं. इस का शीर्ष दिति और कपाल अदिति है. इस का
शीश संवत्सर है. (४)
अह्ना प्रत्यङ् व्रात्यो रात्र्या प्राङ्नमो व्रात्याय.. (५)
यह व्रात्य दिन में सबके लिए पूज्य है. इस प्रकार के व्रात्य को नमस्कार है. (५)
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