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अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,063 पृष्ठ

सूक्त-६ देवता—दुःस्वप्ननाशन

हे स्वप्न! तुम जीवन का अंत करने वाली मृत्यु हो. (९)
तं त्वा स्वप्न तथा सं विद्म स नः स्वप्न दुष्ष्वप्न्यात् पाहि.. (१०)
हे स्वप्न! मैं तुम्हें भलीभांति जानता हूं. तुम मुझे बुरे स्वप्नों से बचाओ. (१०)
सूक्त-६ देवता—दुःस्वप्ननाशन
अजैष्माद्यासनामाग्याभूमानागसो वयम्.. (१)
हम आज विजय प्राप्त करें. हम आज खाद्य पदार्थ प्राप्त करें. आज हम पाप रहित हो
जाएं. (१)
उषो यस्माद् दुष्ष्वप्न्याद्भैष्माप तदुच्छतु.. (२)
हे उषा देवी! जिस बुरे स्वप्न से हम डरते हैं, वह बुरा स्वप्न समाप्त हो जाए. (२)
द्विषते तत् परा वह शपते तत् परा वह.. (३)
हे देव! आप उसे भय को प्राप्त कराएं जो हमसे द्वेष करता है तथा हमारी निन्दा करता
है. (३)
यं द्विष्मो यश्च नो द्वेष्टि तस्मा एनद् गमयामः.. (४)
हम जिससे द्वेष करते हैं और जो हमसे द्वेष करता है, हम इस भय को उस के पास
भेजते हैं. (४)
उषा देवी वाचा संविदाना वाग् देव्यु १ षसा संविदाना.. (५)
उषा देवी वाणी के साथ और वाणी की देवी उषा के साथ एकमत स्थापित करें. (५)
उषस्पतिर्वाचस्पतिना संविदानो वाचस्पतिरुषस्पतिना संविदानः.. (६)
उषा के पति वाचस्पति अर्थात् वाणी के स्वामी के साथ तथा वाचस्पति उषा देवी के
पति के साथ एकमत स्थापित करें. (६)
ते ३ मुष्मै परा वहन्त्वरायान् दुर्नाम्नः सदान्वाः.. (७)
कुम्भीका दूषीकाः पीयकान्.. (८)
वे इस दुष्ट शत्रु के लिए दूषित नाम वाले दुःखों को, आपत्तियों को घड़े के समान बढ़ने
वाले उदर रोगों को, शरीर के दूषित रोगों को तथा प्राणघातक रोगों को प्राप्त कराएं. (७-८)
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जाग्रद्दुःष्वप्न्यं स्वप्नेदुःष्वप्न्यम्.. (९)
अनागमिषमतो वरानवित्तेः संकल्पान्मुच्या द्रुहः पाशान्.. (१०)
हम जाग्रत अवस्था में जो दुःस्वप्न देखते हैं और सोते हुए जो दुःस्वप्न देखते हैं, उनके बुरे
फलों से तथा धनहीनता के अतीतकाल के संकल्पों से, न प्राप्त होने वाले उत्तम पदार्थों से
और न छूटने वाले द्रोहजनित पाशों से मुक्त हों. (९-१०)
तदमुष्मा अग्ने देवाः परा वहन्तु वध्रिर्यथासद विथुरो न साधुः.. (११)
हे अग्नि देव! सभी देव सभी प्रकार की उन आपत्तियों को हमारे शत्रुओं की ओर ले
जाएं, जिनके कारण हमारे शत्रु पौरुषहीन व्याधि और सज्जनों को प्राप्त होने वाले यज्ञ को न
पाकर अपयश भोगें. (११)
सूक्त-७ देवता—दुःस्वप्ननाशन
तेनैनं विध्याम्यभूत्यैनं विध्यामि निर्भूत्यैनं विध्यामि पराभूत्यैनं
विध्यामि ग्राह्यैनं विध्यामि तमसैनं विध्यामि.. (१)
मैं इस अर्थात् बुरे स्वप्न को अभिचार कर्म अर्थात् जादू Node/टोने से, दुर्गति से, दरिद्रता से
तथा रोग से विद्ध करता हूं. (१)
देवानामैनं घोरैः क्रूरैः प्रैषैरभिप्रेष्यामि.. (२)
मैं इस बुरे स्वप्न को देवताओं की भयंकर आज्ञाओं के सामने उपस्थित करता हूं. (२)
वैश्वानरस्यैनं दंष्ट्रयोरपि दधामि.. (३)
मैं इस बुरे स्वप्न को वैश्वानर अर्थात् अग्नि की दाढ़ों में डालता हूं. (३)
एवानेवाव सा गरत्.. (४)
वैश्वानर इस बुरे स्वप्न को निगल जाएं. (४)
यो ३ स्मान् द्वेष्टि तमात्मा द्वेष्टु यं वयं द्विष्मः स आत्मानं द्वेष्टु.. (५)
जो हम से द्वेष करता हो, उस से आत्मा द्वेष करे. जिस से हम द्वेष करते हैं, वह आत्मा
से द्वेष करे. (५)
निर्द्विषन्तं दिवो निः पृथिव्या निरन्तरिक्षाद् भजाम.. (६)
जो हम से द्वेष करता है, उसे हम आकाश, पृथ्वी और अंतरिक्ष से दूर भगाते हैं. (६)
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सुयामंश्वाक्षुष.. (७)
इदमह मामुष्यायणे ३ मुष्याः पुत्रे दुष्षप्न्यं मृजे.. (८)
हे उत्तम नियामक और निरीक्षक! मैं बुरे स्वप्न से होने वाले फल को अमुक गोत्र वाले
तथा अमुक स्त्री के पुत्र के पास भेजता हूं. (७-८)
यददो अदो अभ्यगच्छन् यद् दोषा यत् पूर्वा रात्रिम्.. (९)
यज्जाग्रद यत् सुप्तो यद् दिवा यन्नक्तम्.. (१०)
यदहरहरभिगच्छामि तस्मादेनमव दये.. (११)
मैं पहली रात में अमुकअमुक कर्म कर चुका हूं. जाग्रतावस्था में, सुषुप्तावस्था में, दिन
में अथवा रात्रि में मैं नित्यप्रति जिस पाप और दोष को प्राप्त करता हूं, उन्हीं के द्वारा मैं उस
बुरे स्वप्न को नष्ट करता हूं. (९-११)
तं जहि तेन मन्दस्व तस्य पृष्टीरपि शृणीहि.. (१२)
हे देव! उस शत्रु की हिंसा करो, उस के साथ चलो तथा उस की पसलियों को तोड़ दो.
(१२)
स मा जीवीत् तं प्राणो जहातु.. (१३)
वह प्राणहीन हो जाए, वह जीवित न रहे. (१३)
सूक्त-८ देवता—बुरे स्वप्न का नाश
जितमस्माकमुद्भिन्नमस्माकमृतमस्माकं तेजो ऽ स्माकं ब्रह्मास्माकं
स्वरस्माकं
यज्ञो ३ ऽ स्माकं पशवो ऽ स्माकं प्रजा अस्माकं वीरा अस्माकम्.. (१)
हमारा उदय हो. हम सत्य को प्राप्त करें, हमारा तेज बढ़े. हमारा ज्ञान बढ़े तथा हमारे
उत्तम प्रकाश में वृद्धि हो. हमारे यज्ञ सफल हों, हमारे अधिकार में पशु हों, हमारी संतान की
वृद्धि हो. हमारे लोग वीर हों. (१)
तस्मादमुं निर्भजामो ऽ मुमामुष्यायणममुष्याः पुत्रमसौ यः.. (२)
इस अपराध के कारण हम शत्रु पर आक्रमण करते हैं. इस गोत्र वाला तथा इस का पुत्र
हमारा शत्रु है. (२)
स ग्राह्याः पाशान्मा मोचि.. (३)
वह रोग के पाशों से न छूट सके. (३)
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तस्येदं वर्चस्तेजः प्राणमायुर्नि वेष्टयामीदमेनमधराञ्चं पादयामि.. (४)
उस के तेज, बल, प्राण और आयु को मैं घेरता हूं. मैं इसे नीचे गिराता हूं. (४)
जितमस्माकमुद्भिन्नमस्माकमृतमस्माकं तेजो ऽ स्माकं ब्रह्मास्माकं
स्वरस्माकं
यज्ञो ३ ऽ स्माकं पशवो ऽ स्माकं प्रजा अस्माकं वीरा अस्माकम्.
तस्मादमुं निर्भजामो ऽ मुमामुष्यायणममुष्याः पुत्रमसौ यः.
स निर्र्ऋत्याः पाशान्मा मोचि.
तस्येदं वर्चस्तेजः प्राणमायुर्नि वेष्टयामीदमेनमधराञ्चं पादयामि.. (५)
शत्रुओं को मार कर लाए हुए तथा जीते हुए सभी पदार्थ हमारे हैं. सत्य, तेज, ब्रह्म,
स्वर्ग, पशु, प्रजा तथा सभी वीर हमारे हैं. अमुक गोत्र वाले और अमुक स्त्री के पुत्र को, हम
इस लोक से दूर करते हैं. मैं उस के तेज, बल, प्राण और आयु को घेरता हूं. वह दुर्गति के
पाशों से न छूट सके. (५)
जितमस्माकमुद्भिन्नमस्माकमृतमस्माकं तेजो ऽ स्माकं ब्रह्मास्माकं
स्वरस्माकं
यज्ञो ३ ऽ स्माकं पशवो ऽ स्माकं प्रजा अस्माकं वीरा अस्माकम्.
तस्मादमुं निर्भजामो ऽ मुमामुष्यायणममुष्याः पुत्रमसौ यः.
सो ऽ भूत्याः पाशान्मा मोचि.
तस्येदं वर्चस्तेजः प्राणमायुर्नि वेष्टयामीदमेनमधराञ्चं पादयामि.. (६)
शत्रुओं को मार कर लाए हुए तथा जीते हुए सभी पदार्थ हमारे हैं. सत्य, तेज, ब्रह्म,
स्वर्ग, पशु, प्रजा तथा सभी वीर हमारे हैं. अमुक गोत्र वाले और अमुक स्त्री के पुत्र को, हम
इस लोक से दूर करते हैं. मैं उस के तेज, बल, प्राण और आयु को घेरता हूं. वह दरिद्रता के
पाशों से न छूटने पाए. (६)
जितमस्माकमुद्भिन्नमस्माकमृतमस्माकं तेजो ऽ स्माकं ब्रह्मास्माकं
स्वरस्माकं
यज्ञो ३ ऽ स्माकं पशवो ऽ स्माकं प्रजा अस्माकं वीरा अस्माकम्.
तस्मादमुं निर्भजामो ऽ मुमामुष्यायणममुष्याः पुत्रमसौ यः.
स निर्भूत्याः पाशान्मा मोचि.
तस्येदं वर्चस्तेजः प्राणमायुर्नि वेष्टयामीदमेनमधराञ्चं पादयामि.. (७)
शत्रुओं को मार कर लाए हुए तथा जीते हुए सभी पदार्थ हमारे हैं. सत्य, तेज, ब्रह्म,
स्वर्ग, पशु, प्रजा तथा सभी वीर हमारे हैं. अमुक गोत्र वाले और अमुक स्त्री के पुत्र को, हम
इस लोक से दूर करते हैं. मैं उस के तेज, बल, प्राण और आयु को घेरता हूं. वह बुरी अवस्था

के पाशों से न छूट सके. (७)
जितमस्माकमुद्भिन्नमस्माकमृतमस्माकं तेजो ऽ स्माकं ब्रह्मास्माकं
स्वरस्माकं
यज्ञो ३ ऽ स्माकं पशवो ऽ स्माकं प्रजा अस्माकं वीरा अस्माकम्.
तस्मादमुं निर्भजामो ऽ मुमामुष्यायणममुष्याः पुत्रमसौ यः
स पराभूत्याः पाशान्मा मोचि.
तस्येदं वर्चस्तेजः प्राणमायुर्नि वेष्टयामीदमेनमधराज्वं पादयामि.. (८)
शत्रुओं को मार कर लाए हुए तथा जीते हुए सभी पदार्थ हमारे हैं. सत्य, तेज, ब्रह्म,
स्वर्ग, पशु, प्रजा तथा सभी वीर हमारे हैं. अमुक गोत्र वाले और अमुक स्त्री के पुत्र को, हम
इस लोक से दूर करते हैं. मैं उस के तेज, बल, प्राण और आयु को घेरता हूं. वह पराजय के
पाशों से न छूटने पाए. (८)
जितमस्माकमुद्भिन्नमस्माकमृतमस्माकं तेजो ऽ स्माकं ब्रह्मास्माकं
स्वरस्माकं
यज्ञो ३ ऽ स्माकं पशवो ऽ स्माकं प्रजा अस्माकं वीरा अस्माकम्. तस्मादमुं
निर्भजामो ऽ मुमामुष्यायणममुष्याः पुत्रमसौ यः. स देवजामीनां पाशान्मा
मोचि.
तस्येदं वर्चस्तेजः प्राणमायुर्नि वेष्टयामीदमेनमधराज्वं पादयामि.. (९)
शत्रुओं को मार कर लाए हुए तथा जीते हुए सभी पदार्थ हमारे हैं. सत्य, तेज, ब्रह्म,
स्वर्ग, पशु, प्रजा तथा सभी वीर हमारे हैं. अमुक गोत्र वाले और अमुक स्त्री के पुत्र को, हम
इस लोक से दूर करते हैं. मैं उस के तेज, बल, प्राण और आयु को घेरता हूं. वह इंद्रिय संबंधी
दोषों से छूटने न पाए. (९)
जितमस्माकमुद्भिन्नमस्माकमृतमस्माकं तेजो ऽ स्माकं ब्रह्मास्माकं
स्वरस्माकं
यज्ञो ३ ऽ स्माकं पशवो ऽ स्माकं प्रजा अस्माकं वीरा अस्माकम्.
तस्मादमुं निर्भजामो ऽ मुमामुष्यायणममुष्याः पुत्रमसौ यः.
स बृहस्पतेः पाशान्मा मोचि.
तस्येदं वर्चस्तेजः प्राणमायुर्नि वेष्टयामीदमेनमधराज्वं पादयामि.. (१०)
शत्रुओं को मार कर लाए हुए तथा जीते हुए सभी पदार्थ हमारे हैं. सत्य, तेज, ब्रह्म,
स्वर्ग, पशु, प्रजा तथा सभी वीर हमारे हैं. अमुक गोत्र वाले और अमुक स्त्री के पुत्र को, हम
इस लोक से दूर करते हैं. वह बृहस्पति के बंधन से मुक्त न हो. मैं उस के तेज, वर्च, प्राण और
आयु को लपेट कर उसे औंधे मुंह गिराता हूं. (१०)

जितमस्माकमुद्धिन्नमस्माकमृतमस्माकं तेजो ऽ स्माकं ब्रह्मास्माकं
स्वरस्माकं
यज्ञो ३ ऽ स्माकं पशवो ऽ स्माकं प्रजा अस्माकं वीरा अस्माकम्.
तस्मादमुं निर्भजामो ऽ मुमामुष्यायणममुष्याः पुत्रमसौ यः.
स प्रजापतेः पाशान्मा मोचि.
तस्येदं वर्चस्तेजः प्राणमायुर्नि वेष्टयामीदमेनमधराञ्चं पादयामि.. (११)
शत्रुओं को मार कर और जीत कर लाए हुए सभी पदार्थ हमारे हैं. सत्य, तेज, ब्रह्म,
स्वर्ग, पशु, संतान तथा सभी वीर हमारे हैं. अमुक गोत्र वाले और अमुक स्त्री के पुत्र को हम
इस लोक से दूर करते हैं, वह प्रजापति के बंधन से मुक्त न हो. मैं उस के तेज, वर्च, प्राण और
आयु को लपेट कर उसे औंधे मुंह गिराता हूं. (११)
जितमस्माकमुद्धिन्नमस्माकमृतमस्माकं तेजो ऽ स्माकं ब्रह्मास्माकं
स्वरस्माकं
यज्ञो ३ ऽ स्माकं पशवोऽस्माकं प्रजा अस्माकं वीरा अस्माकम्.
तस्मादमुं निर्भजामो ऽ मुमामुष्यायणममुष्याः पुत्रमसौ यः.
स ऋषीणां पाशान्मा मोचि.
तस्येदं वर्चस्तेजः प्राणमायुर्नि वेष्टयामीदमेनमधराञ्चं पादयामि.. (१२)
शत्रुओं को घायल कर के लाए हुए तथा जीते हुए सब पदार्थ हमारे हैं. सत्य, तेज, ब्रह्म,
पशु, प्रजा तथा सब वीर हमारे हैं. अमुक गोत्र वाले और अमुक स्त्री के पुत्र को हम इस लोक
से दूर करते हैं. वह ऋषियों के बंधन से मुक्त न हो. मैं उस के तेज, वर्च, प्राण और आयु को
लपेट कर उसे औंधे मुंह गिराना चाहता हूं. (१२)
जितमस्माकमुद्धिन्नमस्माकमृतमस्माकं तेजो ऽ स्माकं ब्रह्मास्माकं
स्वरस्माकं
यज्ञो ३ ऽ स्माकं पशवो ऽ स्माकं प्रजा अस्माकं वीरा अस्माकम्.
तस्मादमुं निर्भजामो ऽ मुमामुष्यायणममुष्याः पुत्रमसौ यः.
स आर्षेयाणां पाशान्मा मोचि.
तस्येदं वर्चस्तेजः प्राणमायुर्नि वेष्टयामीदमेनमधराञ्चं पादयामि.. (१३)
शत्रुओं को विदीर्ण कर के लाए हुए तथा जीते हुए सभी पदार्थ हमारे हैं. सत्य, तेज,
ब्रह्म, स्वर्ग, पशु, संतान तथा सभी वीर हमारे हैं. हम अमुक गोत्र वाले तथा अमुक स्त्री के पुत्र
को इस लोक से दूर भेजते हैं. वह ऋषियों से उत्पन्न पाशों से कभी छूटने न पाए. मैं उस के
तेज, वर्च, प्राण और आयु को लपेट कर उसे औंधे मुंह गिराता हूं. (१३)
जितमस्माकमुद्धिन्नमस्माकमृतमस्माकं तेजो ऽ स्माकं ब्रह्मास्माकं
स्वरस्माकं
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यज्ञो ३ ऽ स्माकं पशवो ऽ स्माकं प्रजा अस्माकं वीरा अस्माकम्.
तस्मादमुं निर्भजामो ऽ मुमामुष्यायणममुष्याः पुत्रमसौ यः.
सो ऽ ङ्गिरसां पाशान्मा मोचि.
तस्येदं वर्चस्तेजः प्राणमायुर्नि वेष्टयामीदमेनमधराञ्चं पादयामि.. (१४)
शत्रुओं को विदीर्ण कर के लाए हुए तथा जीते हुए सभी पदार्थ हमारे हैं. हम अमुक गोत्र
वाले तथा अमुक नाम वाली स्त्री के पुत्र को इस लोक से दूर करते हैं. वह अंगिराओं के बंधन
से मुक्त न हो. हम उस के तेज, बल, प्राण और आयु को लपेट कर उसे औंधे मुंह गिराते हैं.
(१४)
जितमस्माकमुद्धिन्नमस्माकमृतमस्माकं तेजो ऽ स्माकं ब्रह्मास्माकं
स्वरस्माकं
यज्ञो ३ ऽ स्माकं पशवो ऽ स्माकं प्रजा अस्माकं वीरा अस्माकम्.
तस्मादमुं निर्भजामो ऽ मुमामुष्यायणममुष्याः पुत्रमसौ यः.
स आङ्गिरसानां पाशान्मामोचि.
तस्येदं वर्चस्तेजः प्राणमायुर्नि वेष्टयामीदमेनमधराञ्चं पादयामि.. (१५)
शत्रुओं को घायल कर के लाए हुए तथा जीते हुए सभी पदार्थ हमारे हैं. सत्य, तेज,
ब्रह्म, स्वर्ग, पशु, संतान तथा सभी वीर हमारे हैं. अमुक गोत्र वाला तथा अमुक नाम वाली स्त्री
के पुत्र को हम इस लोक से दूर करते हैं. वह आंगिरसों अर्थात् अंगिरा गोत्र वालों के बंधन से
मुक्त न हो. हम उस के तेज, बल, प्राण और आयु को लपेट कर उसे औंधे मुंह डालते हैं.
(१५)
जितमस्माकमुद्धिन्नमस्माकमृतमस्माकं तेजो ऽ स्माकं ब्रह्मास्माकं
स्वरस्माकं
यज्ञो ३ ऽ स्माकं पशवो ऽ स्माकं प्रजा अस्माकं वीरा अस्माकम्.
तस्मादमुं निर्भजामो ऽ मुमामुष्यायणममुष्याः पुत्रमसौ यः.
सो ऽ थर्वणां पाशान्मा मोचि.
तस्येदं वर्चस्तेजः प्राणमायुर्नि वेष्टयामीदमेनमधराञ्चं पादयामि.. (१६)
शत्रुओं का वध कर के लाए हुए तथा जीते हुए सभी पदार्थ हमारे हैं. सत्य, तेज, ब्रह्म,
स्वर्ग, पशु, संतान और सभी वीर पुरुष हमारे हैं. हम अमुक गोत्र वाले तथा अमुक नाम वाली
स्त्री के पुत्र को लोक से दूर करते हैं. वह अथर्वा गोत्र वालों के बंधन से मुक्त न हो. हम उस के
तेज, प्राण और आयु को लपेट कर उसे औंधे मुंह गिराते हैं. (१६)
जितमस्माकमुद्धिन्नमस्माकमृतमस्माकं तेजो ऽ स्माकं ब्रह्मास्माकं
स्वरस्माकं
यज्ञो ३ ऽ स्माकं पशवो ऽ स्माकं प्रजा अस्माकं वीरा अस्माकम्.
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तस्मादमुं निर्भजामोऽमुमामुष्यायणममुष्याः पुत्रमसौ यः.
स आथर्वणानां पाशान्मामोचि.
तस्येदं वर्चस्तेजः प्राणमायुर्नि वेष्टयामीदमेनमधराञ्चं पादयामि.. (१७)
शत्रुओं को घायल कर के लाए हुए और जीते हुए सभी पदार्थ हमारे हैं. सत्य, तेज,
ब्रह्म, स्वर्ग, पशु, संतान और सभी वीर पुरुष हमारे हैं. हम अमुक गोत्र वाले तथा अमुक नाम
वाली स्त्री के पुत्र को इस लोक से दूर करते हैं. वह अथर्वणों के बंधन से न छूटे. हम उस के
तेज, ब्रह्म, प्राण और आयु को लपेट कर उसे औंधे मुंह गिराते हैं. (१७)
जितमस्माकमुद्धिन्नमस्माकमृतमस्माकं तेजो ऽ स्माकं ब्रह्मास्माकं
स्वरस्माकं
यज्ञो ३ ऽ स्माकं पशवो ऽ स्माकं प्रजा अस्माकं वीरा अस्माकम्.
तस्मादमुं निर्भजामो ऽ मुमामुष्यायणममुष्याः पुत्रमसौ यः.
स वनस्पतीनां पाशान्मा मोचि.
तस्येदं वर्चस्तेजः प्राणमायुर्नि वेष्टयामीदमेनमधराञ्चं पादयामि.. (१८)
शत्रुओं को विदीर्ण कर के लाए हुए तथा जीते हुए सभी पदार्थ हमारे हैं. सत्य, तेज,
ब्रह्म, स्वर्ग, पशु, संतान और सभी वीर पुरुष हमारे हैं. अमुक गोत्र वाले तथा अमुक नाम
वाली स्त्री के पुत्र को हम इस लोक से दूर करते हैं. वह वनस्पतियों के बंधन से मुक्त न हो.
हम उस के तेज, बल, प्राण तथा आयु को लपेट कर उसे औंधे मुंह गिराते हैं. (१८)
जितमस्माकमुद्धिन्नमस्माकमृतमस्माकं तेजो ऽ स्माकं ब्रह्मास्माकं
स्वरस्माकं
यज्ञो ३ ऽ स्माकं पशवो ऽ स्माकं प्रजा अस्माकं वीरा अस्माकम्.
तस्मादमुं निर्भजामो ऽ मुमामुष्यायणममुष्याः पुत्रमसौ यः.
स वनस्पत्यानां पाशान्मा मोचि.
तस्येदं वर्चस्तेजः प्राणमायुर्नि वेष्टयामीदमेनमधराञ्चं पादयामि.. (१९)
शत्रुओं का वध कर के लाए गए और जीते हुए सभी पदार्थ हमारे हैं. हम सत्य, तेज,
ब्रह्म, स्वर्ग, पशु, संतान तथा सभी वीर पुरुषों के अधिकारी हैं. हम अमुक गोत्र वाले तथा
अमुक नाम वाली स्त्री के पुत्र को इस लोक से दूर करते हैं. वह वनस्पतियों के पाश से मुक्त न
हो. हम उस के तेज, बल, स्वर्ग, प्राण और आयु को लपेट कर उसे औंधे मुंह गिराते हैं. (१९)
जितमस्माकमुद्धिन्नमस्माकमृतमस्माकं तेजो ऽ स्माकं ब्रह्मास्माकं
स्वरस्माकं
यज्ञो ३ ऽ स्माकं पशवो ऽ स्माकं प्रजा अस्माकं वीरा अस्माकम्.
तस्मादमुं निर्भजामो ऽ मुमामुष्यायणममुष्याः पुत्रमसौ यः.
स ऋतूनां पाशान्मा मोचि.
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तस्येदं वर्चस्तेजः प्राणमायुर्नि वेष्ट्यामीदमेनमधराञ्चं पादयामि.. (२०)
शत्रुओं का वध कर के लाए हुए तथा जीते हुए सभी पदार्थ हमारे हैं. सत्य, तेज, ब्रह्म,
स्वर्ग, पशु, संतान, स्त्री तथा वीर पुरुष हमारे हैं. हम अमुक गोत्र वाले तथा अमुक नाम वाली
स्त्री के पुत्र को इस लोक से दूर करते हैं. वह ऋतुओं के बंधन से मुक्त न होने पाए. हम उस
के तेज, बल, प्राण और आयु को लपेट कर उसे औंधे मुंह गिराते हैं. (२०)
जितमस्माकमुद्भिन्नमस्माकमृतमस्माकं तेजो ऽ स्माकं ब्रह्मास्माकं
स्वरस्माकं
यज्ञो ३ ऽ स्माकं पशवो ऽ स्माकं प्रजा अस्माकं वीरा अस्माकम्.
तस्मादमुं निर्भजामोऽमुमामुष्यायणममुष्याः पुत्रमसौ यः.
स आर्तवानां पाशान्मा मोचि.
तस्येदं वर्चस्तेजः प्राणमायुर्नि वेष्ट्यामीदमेनमधराञ्चं पादयामि.. (२१)
शत्रुओं को घायल कर के लाए हुए तथा जीत कर लाए हुए पदार्थ हमारे हैं. सत्य, तेज,
ब्रह्म, स्वर्ग, पशु, संतान तथा सभी वीर पुरुष हमारे हैं. अमुक गोत्र वाले तथा अमुक नाम
वाली स्त्री के पुत्र को हम इस लोक से दूर करते हैं. वह ऋतुओं के पदार्थों के बंधन से मुक्त न
हो. हम उस के तेज, बल, प्राण और आयु को लपेट कर उसे औंधे मुंह गिराते हैं. (२१)
जितमस्माकमुद्भिन्नमस्माकमृतमस्माकं तेजो ऽ स्माकं ब्रह्मास्माकं
स्वरस्माकं
यज्ञो ३ ऽ स्माकं पशवो ऽ स्माकं प्रजा अस्माकं वीरा अस्माकम्.
तस्मादमुं निर्भजामो ऽ मुमामुष्यायणममुष्याः पुत्रमसौ यः.
स मासानां पाशान्मा मोचि.
तस्येदं वर्चस्तेजः प्राणमायुर्नि वेष्ट्यामीदमेनमधराञ्चं पादयामि.. (२२)
शत्रुओं का वध कर के लाए हुए पदार्थ तथा जीत कर लाए हुए पदार्थ हमारे हैं. सत्य,
तेज, ब्रह्म, स्वर्ग, पशु, संतान तथा सभी वीर पुरुष हमारे हैं. हम अमुक गोत्र वाले तथा अमुक
नाम वाली स्त्री के पुत्र को इस लोक से दूर करते हैं. वह मासों के पाश से न छूटने पाए. हम
उस के तेज, बल, प्राण और आयु को लपेट कर उसे औंधे मुंह गिराते हैं. (२२)
जितमस्माकमुद्भिन्नमस्माकमृतमस्माकं तेजो ऽ स्माकं ब्रह्मास्माकं
स्वरस्माकं
यज्ञो ३ ऽ स्माकं पशवो ऽ स्माकं प्रजा अस्माकं वीरा अस्माकम्.
तस्मादमुं निर्भजामोऽमुमामुष्यायणममुष्याः पुत्रमसौ यः.
सो ऽ र्धमासानां पाशान्मा मोचि.
तस्येदं वर्चस्तेजः प्राणमायुर्नि वेष्ट्यायीदमेनमधराञ्चं पादयामि.. (२३)
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शत्रुओं को मार कर लाए हुए पदार्थ तथा जीते हुए पदार्थ हमारे हैं. सत्य, तेज, ब्रह्म,
स्वर्ग, पशु, संतान और सभी वीर पुरुष हमारे हैं. हम अमुक गोत्र वाले तथा अमुक नाम वाली
स्त्री के पुत्र को इस लोक से दूर करते हैं. वह अर्धमास के बंधन से मुक्त न होने पाए. हम उस
के तेज, बल, प्राण और आयु को लपेट कर उसे औंधे मुंह गिराते हैं. (२३)
जितमस्माकमुद्भिन्नमस्माकमृतमस्माकं तेजो ऽ स्माकं ब्रह्मास्माकं
स्वरस्माकं
यज्ञो ३ ऽ स्माकं पशवो ऽ स्माकं प्रजा अस्माकं वीरा अस्माकम्.
तस्मादमुं निर्भजामोऽमुमामुष्यायणममुष्याः पुत्रमसौ यः.
सो ऽ होरात्रयोः पाशान्मा मोचि.
तस्येदं वर्चस्तेजः प्राणमायुर्नि वेष्टयामीदमेनमधराञ्चं पादयामि.. (२४)
शत्रुओं को घायल कर के लाए हुए पदार्थ और जीते हुए पदार्थ हमारे हैं. सत्य, तेज,
ब्रह्म, स्वर्ग, पशु, संतान और सभी वीर पुरुष हमारे हैं. हम अमुक गोत्र वाले तथा अमुक नाम
वाली स्त्री के पुत्र को इस लोक से दूर करते हैं. वह दिन और रात्रियों के पाश से मुक्त न होने
पाए. हम उस के तेज, बल, प्राण और आयु को लपेट कर उसे औंधे मुंह गिराते हैं. (२४)
जितमस्माकमुद्भिन्नमस्माकमृतमस्माकं तेजो ऽ स्माकं ब्रह्मास्माकं
स्वरस्माकं
यज्ञो ३ ऽ स्माकं पशवो ऽ स्माकं प्रजा अस्माकं वीरा अस्माकम्.
तस्मादमुं निर्भजामोऽमुमामुष्यायणममुष्याः पुत्रमसौ यः.
सो ऽ ह्नोः संयतोः पाशान्मा मोचि.
तस्येदं वर्चस्तेजः प्राणमायुर्नि वेष्टयामीदमेनमधराञ्चं पादयामि.. (२५)
शत्रुओं को नष्ट कर के लाए हुए पदार्थ और जीते हुए पदार्थ हमारे हैं. सत्य, तेज, ब्रह्म,
स्वर्ग, पशु, संतान और सभी वीर पुरुष हमारे हैं. हम अमुक गोत्र वाले तथा अमुक नाम वाली
स्त्री के पुत्र को इस लोक से दूर करते हैं. वह रातदिन के संयत पाशों से मुक्त न होने पाए. हम
उस के तेज, बल, प्राण और आयु को लपेट कर उसे औंधे मुंह गिराते हैं. (२५)
जितमस्माकमुद्भिन्नमस्माकमृतमस्माकं तेजो ऽ स्माकं ब्रह्मास्माकं
स्वरस्माकं
यज्ञो ३ ऽ स्माकं पशवो ऽ स्माकं प्रजा अस्माकं वीरा अस्माकम्.
तस्मादमुं निर्भजामोऽमुमामुष्यायणममुष्याः पुत्रमसौ यः.
स द्यावापृथिव्योः पाशान्मा मोचि.
तस्येदं वर्चस्तेजः प्राणमायुर्नि वेष्टयामीदमेनमधराञ्चं पादयामि.. (२६)
शत्रुओं को विदीर्ण कर के लाए हुए पदार्थ तथा जीते हुए पदार्थ हमारे हैं. सत्य, तेज,
ब्रह्म, स्वर्ग, पशु, प्रजा और सभी वीर पुरुष हमारे हैं. हम अमुक गोत्र वाले तथा अमुक नाम
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वाली स्त्री के पुत्र को इस लोक से दूर करते हैं. वह द्यावा पृथ्वी के पाश से छूट न सके. हम
उस के तेज, बल, प्राण और आयु को लपेट कर उसे औंधे मुंह गिराते हैं. (२६)
जितमस्माकमुद्भिन्नमस्माकमृतमस्माकं तेजोऽस्माकं ब्रह्मास्माकं
स्वरस्माकं
यज्ञो ३ ऽ स्माकं पशवो ऽ स्माकं प्रजा अस्माकं वीरा अस्माकम्.
तस्मादमुं निर्भजामो ऽ मुमामुष्यायणममुष्याः पुत्रमसौ यः.
स इन्द्राग्न्योः पाशान्मा मोचि.
तस्येदं वर्चस्तेजः प्राणमायुर्नि वेष्टयामीदमेनमधराञ्चं पादयामि.. (२७)
शत्रुओं को मार कर लाए हुए पदार्थ तथा जीते हुए पदार्थ हमारे हैं. सत्य, तेज, ब्रह्म,
पशु, संतान और सभी वीर पुरुष हमारे हैं. हम अमुक गोत्र वाले तथा अमुक नाम वाली स्त्री
के पुत्र को इस लोक से दूर करते हैं. वह इंद्र और अग्नि के बंधन से मुक्त न होने पाए. हम
उस के तेज, बल, प्राण और आयु को लपेट कर उसे औंधे मुंह गिराते हैं. (२७)
जितमस्माकमुद्भिन्नमस्माकमृतमस्माकं तेजो ऽ स्माकं ब्रह्मास्माकं
स्वरस्माकं
यज्ञो ३ ऽ स्माकं पशवो ऽ स्माकं प्रजा अस्माकं वीरा अस्माकम्.
तस्मादमुं निर्भजामो ऽ मुमामुष्यायणममुष्याः पुत्रमसौ यः.
स मित्रावरुणयोः पाशान्मा मोचि.
तस्येदं वर्चस्तेजः प्राणमायुर्नि वेष्टयामीदमेनमधराञ्चं पादयामि.. (२८)
शत्रुओं को विदीर्ण कर के लाए हुए पदार्थ और जीते हुए पदार्थ हमारे हैं. सत्य, तेज,
ब्रह्म, स्वर्ग, पशु, संतान और सब वीर पुरुष हमारे हैं. हम अमुक गोत्र वाले तथा अमुक नाम
वाली स्त्री के पुत्र को इस लोक से दूर करते हैं. वह मित्र और वरुण के बंधन से छूटने न पाए.
हम उस के तेज, बल, प्राण और आयु को लपेट कर उसे औंधे मुंह गिराते हैं. (२८)
जितमस्माकमुद्भिन्नमस्माकमृतमस्माकं तेजो ऽ स्माकं ब्रह्मास्माकं
स्वरस्माकं
यज्ञो ३ ऽ स्माकं पशवो ऽ स्माकं प्रजा अस्माकं वीरा अस्माकम्.
तस्मादमुं निर्भजामो ऽ मुमामुष्यायणममुष्याः पुत्रमसौ यः.
स राज्ञो वरुणस्य पाशान्मा मोचि.
तस्येदं वर्चस्तेजः प्राणमायुर्नि वेष्टयामीदमेनमधराञ्चं पादयामि. (२९)
शत्रुओं को घायल कर के लाए हुए पदार्थ तथा जीते हुए पदार्थ हमारे हैं. सत्य, तेज,
ब्रह्म, स्वर्ग, पशु, संतान और सब वीर पुरुष हमारे हैं. हम अमुक गोत्र वाले और अमुक नाम
वाली स्त्री के पुत्र को इस लोक से मुक्त करते हैं. वह राजा वरुण के पाश से मुक्त न होने पाए.
हम उस के तेज, बल, प्राण और आयु को लपेट कर उसे औंधे मुंह गिराते हैं. (२९)
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जितमस्माकमुद्भिन्नमस्माकमृतमस्माकं तेजो ऽ स्माकं ब्रह्मास्माकं
स्वरस्माकं
यज्ञो ३ ऽ स्माकं पशवो ऽ स्माकं प्रजा अस्माकं वीरा अस्माकम्.. (३०)
शत्रुओं को मार कर लाए हुए पदार्थ और जीत कर लाए हुए पदार्थ हमारे हैं. सत्य, तेज,
ब्रह्म, स्वर्ग, पशु, संतान और सब वीर पुरुष हमारे हैं. (३०)
तस्मादमुं निर्भजामो ऽ मुमामुष्यायणममुष्याः पुत्रमसौ यः.. (३१)
हम अमुक गोत्र वाले तथा अमुक नाम वाली स्त्री के पुत्र को इस लोक से दूर करते हैं.
(३१)
स मृत्योः पड्‌वीशात् पाशान्मा मोचि.. (३२)
वह मृत्यु के पाशों से कभी मुक्त न हो. (३२)
तस्येदं वर्चस्तेजः प्राणमायुर्नि वेष्टयामीदमेनमधराज्चं पादयामि.. (३३)
हम उस के तेज, बल, प्राण और आयु को लपेट कर उसे औंधे मुंह गिराते हैं. (३३)
सूक्त-९ देवता—प्रजापति
जितमस्माकमुद्भिन्नमस्माकमभ्यष्ठां विश्वाः पृतना अरातीः.. (१)
शत्रुओं को घायल कर के लाए हुए पदार्थ तथा जीते हुए पदार्थ हमारे हैं. हम शत्रुओं की
सेना पर अधिकार करें. (१)
तदग्निराह तदु सोम आह पूषा मा धात् सुकृतस्य लोके.. (२)
अग्नि और सोम इसी बात को कह रहे हैं. पूषा देव हमें पुण्य लोक में प्रतिष्ठित करें. (२)
अगन्म स्व १: स्वरगन्म सं सूर्यस्य ज्योतिषागन्म.. (३)
हमें स्वर्ग प्राप्त है, जो लोक सूर्य की ज्योति से उत्तम बना है, हम उसे प्राप्त करें. (३)
वस्योभूयाय वसुमान् यज्ञो वसु वंशिषीय वसुमान् भूयासं वसु मयि धेहि..
(४)
मैं सत्कार पाने के योग्य हूं. मैं परमधनी बनने के लिए धन पर अधिकार कर सकूं. हे
देव! मेरे धन को पुष्ट करो. (४)
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