प्राचीन भारतीय लिपिमाला (महामहोपाध्याय गौरीशंकर हीराचन्द ओझा - लिपि-विज्ञान व कूट-पठन)
The Paleography of India by G.H. Ojha
रायबहादुर पण्डित गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा
Plate XLIII.
लिपिपत्र ४३वां.
पल्लव वंशी राजा विष्णुगोपवर्मन् और सिंहवर्मन् के दानपत्रों से.
(ई. स. की पांचवीं शताब्दी).
पल्लव वंशी राजा विष्णुगोपवर्मन् के उरुवुपल्लि गांव के दानपत्र से .
अ उ ए क ग च ज ड ण त थ द ध न प व भ म य
[पल्लव लिपि वर्णमाला पंक्ति १]
र ल व श ष स ह त् जा धा नि वी गु कु सु कू पू भू वृ
[पल्लव लिपि वर्णमाला पंक्ति २]
नै र्ने गो लो पौ चा च्छा ञ्च ष्ट्रा त्र र्द्ध म्मो श्री वृ क्ष्या स्थि स्थ.
[पल्लव लिपि वर्णमाला पंक्ति ३]
पल्लव वंशी राजा सिंहवर्मन् के पिकिर गांव के दानपत्र से मुख्य मुख्य अक्षर.
च ज त थ द द ध न फ ब व श ष ष ज्ञा ष्ट्रा र्ने स्थि.
[पल्लव लिपि वर्णमाला पंक्ति ४]
पल्लव वंशी राजा सिंहवर्मन् के मंगलुर गांव के दानपत्र से मुख्य मुख्य अक्षर.
औ ख घ क्ट ट य द ध न श ह ह धा थि ळू र्ने क्क श्ये
[पल्लव लिपि वर्णमाला पंक्ति ५]
[अभिलेख/दानपत्र का पल्लव लिपि में अनुलेख - पंक्ति १]
[अभिलेख/दानपत्र का पल्लव लिपि में अनुलेख - पंक्ति २]
[अभिलेख/दानपत्र का पल्लव लिपि में अनुलेख - पंक्ति ३]
[अभिलेख/दानपत्र का पल्लव लिपि में अनुलेख - पंक्ति ४]
[अभिलेख/दानपत्र का पल्लव लिपि में अनुलेख - पंक्ति ५]
[अभिलेख/दानपत्र का पल्लव लिपि में अनुलेख - पंक्ति ६]
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Plate XLIV. लिपिपत्र ४४वां.
कदंब वंशी राजा मृगेशवर्मन् और काकुस्थवर्मन् के दानपत्रों से.
(ई. स. की छठी शताब्दी).
देवगिरि से मिलेहुए कदंब वंशी राजा मृगेशवर्मन् के दानपत्र से.
अ आ इ उ ए क क ख ग घ च ज ट ड ण त थ द द ध
[कदम्ब-लिपि-स्वर-व्यञ्जनानि]
न न न प फ ब व ब भ भ म य र ल व व श ष स ह
[कदम्ब-लिपि-व्यञ्जनानि]
ड् न् णा मा णि लि हिः गो भु ङ्क भू भू क्त क्त दृ द्ध ते ले
[कदम्ब-लिपि-मात्रा-युक्ताक्षराणि]
वै गो नो लो लो यौ पौ क्रा द्विश्व ज्ञा न्च र्त्त र्थ्य र्ह श्री स्था स्थ.
[कदम्ब-लिपि-संयुक्ताक्षराणि]
देवगिरि से मिलेहुए कदंब वंशी राजा काकुस्थवर्मन् के दो दानपत्रों से मुख्य मुख्य अक्षर.
अ आ इ इ उ ख़ ख च ज ढ ण त त थ द ध न न ब भ
[कदम्ब-लिपि-अक्षराणि]
म य र ल ळ व श म् त् ती कू पू सू क्त क्त दृ ङ्को ष्ठम्.
[कदम्ब-लिपि-अक्षराणि]
सिद्धम् ॥ जयत्युद्भूतविस्तारः सुरेन्द्रानीक सङ्घशः । नमः [?]
शशिशेखरसंस्थानकुमुदाकरशीतगुः ॥ श्रीमान् वैरिमहावृक्षो [?] मूलोद्ध-
र्त्ता कदम्बराजोऽभूत् काकुत्स्थनृपतिः श्रुतः । यस्यास्यनलिनोत्फुल्ल-
नेत्रं मदिरासवं सुहृद्वल्लभकाव्यञ्च वन्दिभिर्बहुधोच्यते ॥
सटङ्कानां मुकुटमकुटायमानपद्मरागद्युतिविद्योतितपादयोः सुचरितैर्गुण-
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Plate XLV.
लिपिपत्र ४५वां.
चालुक्य वंशी राजाओं के लेख और दानपत्रों से.
(ई. स. की छठी और सातवीं शताब्दी).
चालुक्य वंशी राजा मंगलीश्वर के समय के बादामी के लेख से (शक सं. ५०० = ई. स. ५७८).
अ क क ख ग च ज ट ड ण त य द ध ध न न प फ ब
ब भ म म य य र र ल व व श श ष स ह दा भि
री ली सु पृ क्क क्क मो यो पौ च ङ्ग चक्रे श्व ङ्क द्र र्त्य र्थ्य श्री द्वि.
चालुक्य वंशी राजा पुलकेशी (दूसरे) के हैदराबाद के दानपत्र से (शक सं. ५३४ = ई. स. ६१२).
अ आ इ उ क ख ग घ ट ड त य द ध न व भ र कृ ज्ञ.
पूर्वी चालुक्य राजा सर्वलोकाश्रय (मंगियुवराज) के चेंडलूर के दानपत्र से (ई. स. ६७३).
आ इ ए अं क क ख ग घ क क त द न ब र स ह
[
Plate XLVI.
लिपिपत्र ४६वां.
केंडूर से मिले हुए पश्चिमी चालुक्य वंशी राजा कीर्तिवर्मन् (दूसरे) के दानपत्र से.
(श. सं. ६७२ = ई. स. ७५०).
अ आ इ ई उ क क ख ख ग घ च च ज ज ज ट ड ढ
[वर्ण-चिह्न पंक्ति १]
ण ण त थ थ द ध ध न न प फ ब ब भ भ म म
[वर्ण-चिह्न पंक्ति २]
य य र र ल ल व व श ष स स ह ह ळ ळ ळ
[वर्ण-चिह्न पंक्ति ३]
र् का गा जा दा भि लि वि की दी नी कु भु मु झू घू भू
[वर्ण-चिह्न पंक्ति ४]
सू कृ पृ पृ णे वे शे रै यो लो पौ क्रा क्र च्च च्छ ञ्जा
[वर्ण-चिह्न पंक्ति ५]
ञ्च ञ्च ङ्क ष्ट्रा न्त त्म त्रा न्भू र्क र्त्य र्म्म र्व्या ष्प ग्य ष्ठे ४थी.
[वर्ण-चिह्न पंक्ति ६]
[दानपत्र का मूल आलेख - लिपि पंक्ति १]
[दानपत्र का मूल आलेख - लिपि पंक्ति २]
[दानपत्र का मूल आलेख - लिपि पंक्ति ३]
[दानपत्र का मूल आलेख - लिपि पंक्ति ४]
[दानपत्र का मूल आलेख - लिपि पंक्ति ५]
[दानपत्र का मूल आलेख - लिपि पंक्ति ६]
[दानपत्र का मूल आलेख - लिपि पंक्ति ७]
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Plate XLVII.
लिपिपत्र ४७वां.
कड़ब से मिले हुए राष्ट्रकूट वंशी राजा प्रभूतवर्ष (गोविंदराज तीसरे) के दानपत्र से.
(श. सं ७३५ = ई. स. ८१३).
अ आ दू ई उ ए क क ख ख ख ग घ च छ ज ज
ज ट ड ढ ढ ण त थ द द ध न प फ ब भ भ म
म म य र र ल ल व व श श ष स स ह ळ ळ र
क् त् न् का टा या ला नि त्रि ली खु कू चू कृ णे घे ये
वै गै मो लो लो वो शो सौ क्क क्त ग्धा चे श्च ण्ड ण्ड ञ्च
त्स त्न न्धे ब्ध र्ग र्थ र्नि श्री स्थि स्त्र ४५ ४५. ळ ळ. ऌ.
[अभिलेख-अंश / मूल लिपि पाठ - पंक्ति १]
[अभिलेख-अंश / मूल लिपि पाठ - पंक्ति २]
[अभिलेख-अंश / मूल लिपि पाठ - पंक्ति ३]
[अभिलेख-अंश / मूल लिपि पाठ - पंक्ति ४]
[अभिलेख-अंश / मूल लिपि पाठ - पंक्ति ५]
[अभिलेख-अंश / मूल लिपि पाठ - पंक्ति ६]
[अभिलेख-अंश / मूल लिपि पाठ - पंक्ति ७]
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Plate XLVIII. लिपिपत्र ४८वां.
पूर्वी चालुक्य वंशी राजा भीम (दूसरे) और अम्म (दूसरे) के दानपत्रों से.
(ई. स. की १०वीं शताब्दी).
पागनवरं मे मिलेहुए राजा भीम (दूसरे) के दानपत्र से (ई. स. की १०वीं शताब्दी का पूर्वार्द्ध).
अ आ इ उ ए क क ख ग घ च ज ट ड ण त थ
द द ध ध न प फ व भ म य र ल ल व व श
ष स ह ळ त् म् णां णा ला या या ति लि रो कु
क्क क्त ग्ने जो कौ क्र त्त ण्ड त्सु ध्या र्के र्त्य र्म्मा ल्ल ४ प.
पूर्वी चालुक्य वंशी राजा अम्म (दूसरे) के दानपत्र से (ई. स. की १०वीं शताब्दी का उत्तरार्द्ध).
इ उ ए क ग ज ट त न फ म र व व श मा खि
बि कु पू भू ह्म ष्ट्र च्छ ज्ञा ट्टा न्द्र न्म न्भा न्ध र्षा ल्ल ष्णो.
स्वस्ति श्रीमत् समस्तभुवनाश्रय श्रीविजयादित्य-
महाराजाधिराज परमेश्वर परममाहेश्वर-
सर्व्वलोकाश्रय श्रीविष्णोर्व्वर्द्धन महाराजा-
धिराज परमेश्वर परमभट्टारक...
...
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Plate XLIX.
लिपिपत्र ४६वां.
कोरुमेल्लि से मिले हुए पूर्वी चालुक्यवंशी राजा राजराज के दानपत्र से.
(ई. स. की ११वीं शताब्दी).
अ अ आ आ इ ई उ ए क ख ग घ च च छ ज ट ट
[तदनुरूप लिपि-चिह्न]
ठ ड ढ ण त थ द ध न प फ ब भ म म य र ल
[तदनुरूप लिपि-चिह्न]
ल व श ष स ह र त् न् ना रा लां कि णि ति रि त्ति जी
[तदनुरूप लिपि-चिह्न]
भी मो नु रु चू सू दृ वृ जें ते दे ने ये तै तो
[तदनुरूप लिपि-चिह्न]
धो भो मो मो पो भौ क्र क्रो च्र च्रो ङ्के ङ्गे दृ ण्डी सा
[तदनुरूप लिपि-चिह्न]
हे द्व न्न न्नी न्मु प्र न्न र्बु र्म्मा र्ग्य ष्ट्र श्री द्या द्वा
[तदनुरूप लिपि-चिह्न]
ष्णो स्मा स्य स्व स्मो स्त्र . ञ ञा . ख र . ञ खा . ञ .
[तदनुरूप लिपि-चिह्न]
[मूल दानपत्र की लिपिबद्ध पंक्तियाँ:]
[पंक्ति १: प्राकृत/संस्कृत प्रशस्ति का प्रारम्भिक भाग]
[पंक्ति २: प्रशस्ति पाठ]
[पंक्ति ३: प्रशस्ति पाठ]
[पंक्ति ४: प्रशस्ति पाठ]
[पंक्ति ५: प्रशस्ति पाठ]
[पंक्ति ६: प्रशस्ति पाठ]
[पंक्ति ७: प्रशस्ति पाठ]
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Plate L. लिपिपत्र ५०वां.
काकतीयवंशी राजा रुद्रदेव और गणपति के समय के लेखों से.
(ई. स. की १२वीं और १३वीं शताब्दी).
काकतीयवंशी राजा रुद्रदेव के अनमकोंडा के लेख से (श. सं. १०८४ = ई. स. ११६२).
अ आ इ ई उ ए ओ घ ट ठ ड ढ थ ध भ ष स ळ.
𑠀 𑠁 𑠂 𑠃 𑠄 𑠆 𑠈 ... [काकतीय-लिपि वर्णमाला]
काकतीयवंशी राजा गणपति के समय के चेब्रोलू के लेख से (श. सं. ११३५ = ई. स. १२१३).
अ आ इ ई उ ऊ ए ओ क ख ग घ च छ ज झ ट
[काकतीय-लिपि वर्णमाला]
ठ ड ण त थ द ध न प फ ब भ म य र ल व
[काकतीय-लिपि वर्णमाला]
श ष स ह ळ ऱ् त् न् का टा ला कि रि वि दी री कु
[काकतीय-लिपि वर्णमाला]
पू पृ के दे कै दै बो ह्यं गौ सौ त्ति ज्ञ् ण्ण नं स्त्री
[काकतीय-लिपि वर्णमाला]
द्रु प्रे भ्रां र्ग्यं ल्ल ष्कि श्री ष्ट्रा स्थ स्फा. ऋ. ॠ. ऌ. ऐ.
[काकतीय-लिपि वर्णमाला]
[अभिलेख पाठ पंक्ति १ - काकतीय लिपि]
[अभिलेख पाठ पंक्ति २ - काकतीय लिपि]
[अभिलेख पाठ पंक्ति ३ - काकतीय लिपि]
[अभिलेख पाठ पंक्ति ४ - काकतीय लिपि]
[अभिलेख पाठ पंक्ति ५ - काकतीय लिपि]
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Plate LI.
लिपिपत्र ५१वां.
नामय नायक, अन्नवेम और गणदेव के दानपत्रों से.
(ई. स. की १४वीं और १५वीं शताब्दी).
पीठापुरी के नामय नायक के दोनेपुंडि के दानपत्र से (श. सं १२५८ = ई. स. १३३७).
अ आ ई उ ए क ख ग च ज ट ठ ड ण त त थ
అ ఆ ఈ ఉ ఎ క ఖ గ చ జ ట ఠ డ ణ త త థ
द ध न प फ ब भ म य र ल व श ष ष स
ద ధ న ప ఫ బ భ మ య ర ల వ శ ష ష స
ह ळ ऱ दा मा खि रि वि गी मु ऊ भू जूं
హ ళ ఱ దా మా ఖి రి వి గి ము ఊ భూ జూం
वै शौ शो पौ चि न्ना च्छु ज्ञा न्नों श्री श्री स्तु स्या स्सौ.
వై శౌ శో పౌ చి న్నా చ్ఛు జ్ఞా న్నో శ్రీ శ్రీ స్తు స్యా స్సౌ.
वनपल्ली से मिले हुए अन्नवेम के दानपत्र से मुख्य मुख्य अक्षर (श. सं १३०० = ई. स. १३७८).
आ ऋ च फ म ळ त टा षा पु यै हो ख्यै ह्न प्रशो.
ఆ ఋ చ ఫ మ ళ త టా షా పు యై హో ఖ్యై హ్న ప్రశో.
कोण्डवीडु के राजा गणदेव के दानपत्र से (श. सं. १३७७ = ई. स. १४५५).
अ ट च प व ह न् ढा ला ति लो ङ्क्ष टृ न्ना श्रो श्रो.
అ ట చ ప వ హ న్ ఢా లా తి లొ ఙ్క్ష తృ న్నా శ్రో శ్రో.
ఁ|ఁ శ్రీఉమామహేశ్వరాభ్యాం నమః। దాయాద్వః (श्रीउमामहेश्वराभ्यां नमः । पायाद्वः)
కరివదనః ప్రతనిజదానస్తుతాదివావిగనౌ। (करिवदनः प्रथितनिजदानस्तुतो दिवाविशनौ ।)
నిసదతి ముహురంపిదత్తె కర్ణౌ యః రన్త- (निसदति मुहुुरपिदत्ते कर्णौ यः रन्त-)
తాలాభ్యాం॥ త్రివిష్టరంస్తు భవదిష్టత్థలప్రదా- (तालाभ्यां ॥ त्रिविष्टरंस्तु भवदिष्टस्थलप्रदा-)
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Plate LII.
लिपिपत्र ५१वां.
पल्लववंशी राजाओं के समय के १० लेखों और कूरम के दानपत्र से.
(ई. स. की सातवीं शताब्दी).
पल्लववंशी राजा नरसिंहवर्मन् के समय के मामल्लपुरं के छोटे छोटे ६ लेखों से.
अ अ अ ए द न न प भ य य श ह जा ळि :
[पल्लव लिपि वर्णमाला रूप - मामल्लपुरं लेख]
पल्लववंशी राजा राजसिंह के समय के कांचीपुरं के कैलासनाथ नामक मंदिर के लेख से.
अ इ ए घ च ज थ ध न प ब भ ल व म् टा णा मा
[पल्लव लिपि वर्णमाला रूप - कांचीपुरं लेख, पंक्ति १]
ळां ति षि रो गु दू पूहू क्ल ह खैः क्र चु ङ्क ज्ञा ञ्च र्थ्य
[पल्लव लिपि वर्णमाला रूप - कांचीपुरं लेख, पंक्ति २]
कूरम से मिले हुए पल्लववंशी राजा परमेश्वरवर्मन् के दानपत्र से.
अ आ इ ई उ ए क ख ग घ च ज ट ड ण त थ द ध
[पल्लव लिपि वर्णमाला रूप - कूरम दानपत्र, पंक्ति १]
न न प प फ ब भ म य र ल व श ष स ह ह ळ मा
[पल्लव लिपि वर्णमाला रूप - कूरम दानपत्र, पंक्ति २]
सिं ती कु णु गृह क्त भृ तो हो पौ च्त च्छ ज्ञा ञ्च ण्ड्य भ र्म्म.
[पल्लव लिपि वर्णमाला रूप - कूरम दानपत्र, पंक्ति ३]
[कूरम दानपत्र का मूल पल्लव लिपि अभिलेख - पंक्ति १]
[कूरम दानपत्र का मूल पल्लव लिपि अभिलेख - पंक्ति २]
[कूरम दानपत्र का मूल पल्लव लिपि अभिलेख - पंक्ति ३]
[कूरम दानपत्र का मूल पल्लव लिपि अभिलेख - पंक्ति ४]
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Plate LIII. लिपिपत्र ५३वां.
पल्लव और पाण्ड्यवंशी राजाओं के समय के लेख और दानपत्रों से.
(ई. स. की ८वीं शताब्दी).
मावलीपुरं के अतिरणचंडेश्वर नामक गुफामंदिर के लेख से (ई. स. की ८वीं शताब्दी).
अ आ इ क ख ग च ण द ध व जा शु श्च ष्णा स्था स्य.
[अतिरणचंडेश्वर गुफामंदिर लेख के वर्ण/अक्षर-चिह्न]
कशाकूडि से मिले हुए पल्लव राजा नंदिवर्मा के दानपत्र से (ई. स. की ८वीं शताब्दी).
अ आ इ ई उ ए ऐ क ख ग घ च छ ज ट ड ण त
[कशाकूडि दानपत्र के वर्ण/स्वर-व्यंजन चिह्न]
थ द ध न प फ ब भ म य र ल व श ष स ह ळ
[कशाकूडि दानपत्र के व्यंजन चिह्न]
न म का या रि णी कु तु पु धू भू द्ध दृ चे के कै तो कौ
[कशाकूडि दानपत्र के मात्रा-युक्त वर्ण चिह्न]
मौ क्त च चि ङ्ग च्छ ज्ञा ञ्च ण्ठ ण्ड त्या त्य न्द्र र्द्र ब्द श्रो स्थि.
[कशाकूडि दानपत्र के संयुक्ताक्षर चिह्न]
पाण्ड्यवंशी राजा परान्तक के समय के नारसिंगं के लेख से (कलियुग सं. ३८७१ = ई. स. ७७०).
ए क च ज न ष स म् वा हा सी गृ रो ग ण्ड्य ष्णोः.
[नारसिंगं लेख के वर्ण/संयुक्ताक्षर चिह्न]
[पाण्ड्य/पल्लव कालीन अभिलेख का मूल प्रतिरूप - पंक्ति १]
[पाण्ड्य/पल्लव कालीन अभिलेख का मूल प्रतिरूप - पंक्ति २]
[पाण्ड्य/पल्लव कालीन अभिलेख का मूल प्रतिरूप - पंक्ति ३]
[पाण्ड्य/पल्लव कालीन अभिलेख का मूल प्रतिरूप - पंक्ति ४]
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Plate LIV. लिपिपत्र ५४वां.
पल्लववंशी नन्दिवर्मा (पल्लवमल्ल) और गंगावंशी पृथिवीपति (दूसरे) के दानपत्रों से
(ई. स. की ८वीं और १०वीं शताब्दी).
पल्लववंशी नन्दिवर्मा (पल्लवमल्ल) के उदयॆन्दिरं के दानपत्र से (ई. स. की ८वीं शताब्दी).
अ अ अ आ इ उ उ ए क ख ग ग घ च ज ट
[पल्लव-ग्रन्थ लिपि वर्ण: अ, अ, अ, आ, इ, उ, उ, ए, क, ख, ग, ग, घ, च, ज, ट]
ठ ड ढ ण त थ द ध न प व भ म य र र ल
[पल्लव-ग्रन्थ लिपि वर्ण: ठ, ड, ढ, ण, त, थ, द, ध, न, प, व, भ, म, य, र, र, ल]
ल व श ष स ह ळ म् मा गि नी वी कु रु भु सु
[पल्लव-ग्रन्थ लिपि वर्ण: ल, व, श, ष, स, ह, ळ, म्, मा, गि, नी, वी, कु, रु, भु, सु]
भू मू क्र द्व रै णां जौ न्त च्छी न्थ्य ञ्ज ङ्कु × क.
[पल्लव-ग्रन्थ लिपि वर्ण व संयुक्ताक्षर: भू, मू, क्र, द्व, रै, णां, जौ, न्त, च्छी, न्थ्य, ञ्ज, ङ्कु, क.]
गंगावंशी राजा पृथिवीपति (दूसरे) के उदयॆन्दिरं के दानपत्र से (ई. स. की १०वीं शताब्दी).
अ आ उ ए क क ख ग घ च ज ट ठ ण त थ द ध
[गंगावंशी ग्रन्थ लिपि वर्ण: अ, आ, उ, ए, क, क, ख, ग, घ, च, ज, ट, ठ, ण, त, थ, द, ध]
न प ब भ म य र ल व श ष स ह ळ पी ण्ड न्नी म्र.
[गंगावंशी ग्रन्थ लिपि वर्ण: न, प, ब, भ, म, य, र, ल, व, श, ष, स, ह, ळ, पी, ण्ड, न्नी, म्र.]
[अभिलेख/दानपत्र का ग्रन्थ-लिपि मूल पाठ - पंक्ति १]
[अभिलेख/दानपत्र का ग्रन्थ-लिपि मूल पाठ - पंक्ति २]
[अभिलेख/दानपत्र का ग्रन्थ-लिपि मूल पाठ - पंक्ति ३]
[अभिलेख/दानपत्र का ग्रन्थ-लिपि मूल पाठ - पंक्ति ४]
[अभिलेख/दानपत्र का ग्रन्थ-लिपि मूल पाठ - पंक्ति ५]
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Plate LV. लिपिपत्र ५५वां.
कुलोत्तुंगचोड और विक्रमचोड के लेखों तथा विक्रमादित्य के दानपत्र से.
(ई. स. की ११वीं और १२वीं शताब्दी).
कुलोत्तुंगचोड के चिदंबरं के लेख से (ई. स. की ११वीं शताब्दी).
य द न भ य र श स ह ळ की क्ष श्व ट्टा श्रीः.
[तदनुरूप ग्रन्थ लिपि चिह्न]
विक्रमचोड के समय के शेविलिमेडु के लेख से (ई. स. ११२४).
ए ख ग च ज ट ड ण द ध प ब भ म य र ल
[तदनुरूप ग्रन्थ लिपि चिह्न]
व श ह ळ त् म् कु शु कृ घृ नृ श्वे च्र व्या स्रो त्त.
[तदनुरूप ग्रन्थ लिपि चिह्न]
बाणवंशी राजा विक्रमादित्य (विजयवाडू) दूसरे के उदयेंदिरं के दानपत्र से (ई. स. की १२वीं शताब्दी).
अ आ इ क ख ग घ च ज ट ठ ड ण त य द ध
[तदनुरूप ग्रन्थ लिपि चिह्न]
न प ब भ म य य र ल ल व श ष स स ह
[तदनुरूप ग्रन्थ लिपि चिह्न]
ळ ळ त् म् चि झ ञ ध्य ण्डी त्या द्या द्वौ न्न न्द न्त्रा स्न.
[तदनुरूप ग्रन्थ लिपि चिह्न]
[दानपत्र का मूल ग्रन्थ-लिपि लेख — पंक्ति १]
[दानपत्र का मूल ग्रन्थ-लिपि लेख — पंक्ति २]
[दानपत्र का मूल ग्रन्थ-लिपि लेख — पंक्ति ३]
[दानपत्र का मूल ग्रन्थ-लिपि लेख — पंक्ति ४]
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Plate LVI.
लिपिपत्र ५६वां.
पाण्ड्यवंशी सुंदरपाण्ड्य के लेख और यादव विरूपाक्ष तथा गिरिभूपाल के दानपत्रों से.
(ई. स. की १३वीं से १५वीं शताब्दी तक).
पाण्ड्यवंशी राजा सुन्दरपाण्ड्य के ओरंगं के लेख से (ई. स. की १३वीं शताब्दी).
अ आ इ उ ऊ ऌ ओ क ख ग घ ङ च ज ट ठ
ड ण त थ द ध न प फ ब भ म य र ल
व श ष स ह ळ त् त् म् र् कि री मु मू क्त दृ
ष्टं ते घै वो हौ क्लृ क्रा क्र च्च च्छा
ञ्ज ञ्जि ण्ड्य द्रु न्द म्प र्ङ्गि र्ष्णा र्य्य र्ब्बि र्म्म श्री स्ख.
आलंपूण्डि से मिलेहुए विजयनगर के यादव राजा विरूपाक्ष के दानपत्र से (श. सं. १३०५ = ई. स. १३८३).
ओं ख ग ड म र श ळ त न का थि सी कु ष्पु चू रू क्रा.
विजयनगर के यादव गिरिभूपाल के दानपत्र से (शक. सं. १३४६ = ई. स. १४२४).
अ आ उ ऋ ए औ क ग घ फ भ म ह ळ म् रू व्य.
हरिः ॐ स्वस्ति श्रीः येनामौलि
करुणाम्भोधेय दशां श्रीरङ्गवज्रकान्ताः
सुधाधरह्वनाधारवुणयिनं कण्ठा-
CC-0.Dwivedi Lok Hitkari Pustakalaya, Ghaziabad. Digitzed by eGangotri
Plate LVII.
लिपिपत्र ५७ वां.
कलिंग नगर के गंगावंशी (पूर्वी) राजाओं के तीन दानपत्रों से.
(ई. स. की ७वीं और ८वीं शताब्दी ?)
पूर्वी गंगावंशी राजा इन्द्रवर्मन् के अच्युतपुरं के दानपत्र से (गांगेय सं. ८७ = ई. स. की ७वीं शताब्दी !).
अ आ इ उ क ख ग घ च ज ट ड त द ध न प फ ब
[glyphs representing archaic characters]
भ म र व श ष या या लि णी स्तू द्ये जे गो गौ ङ्गा ङ्ग द्व.
[glyphs representing archaic characters]
पूर्वी गंगावंशी राजा इन्द्रवर्मन् (दूसरे) के चिकाकोल के दानपत्र से (गांगेय सं. १४६ = ई. स. की ७वीं शताब्दी ?).
आ क ख ग घ च ज ट ड ण त थ द ध न प फ ब भ
[glyphs representing archaic characters]
म य र श ष स म् ला त्रि जे हे या ङ्ग ङ्क ङ्गा र्क द्व.
[glyphs representing archaic characters]
गंगावंशी राजा देवेन्द्रवर्मन् (गुणार्णव के पुत्र) के दानपत्र से (गांगेय सं. १८३ = ई. स. की ८वीं शताब्दी ?).
अ इ उ क ख ग घ च ज ट ड ण त थ द ध न प फ
[glyphs representing archaic characters]
ब भ म य र ल व श ष स ह ङ्ग ङ्क ङ्गा ज्ञ *क ४प.
[glyphs representing archaic characters]
[Inscriptions line 1 in ancient characters]
[Inscriptions line 2 in ancient characters]
[Inscriptions line 3 in ancient characters]
[Inscriptions line 4 in ancient characters]
[Inscriptions line 5 in ancient characters]
CC-0.Dwivedi Lok Hitkari Pustakalaya, Ghaziabad. Digitzed by eGangotri
Plate LVIII.
लिपिपत्र ५८वां.
कलिंग नगर के गंगवंशी (पूर्वी) राजाओं के दानपत्रों से.
(ई. स. की ८वीं शताब्दी ?).
गंगवंशी देवेन्द्रवर्मन् (अनंतवर्मन् के पुत्र) दूसरे के दानपत्र से (गांगेय सं. [२] ५१ = ई. स. की ८वीं शताब्दी!).
ऊ अ आ उ ए क क क क ख ख ग ग ग ग च
ॐ अ [glyph] उ △ क क क क ख ख ग ग ग ग च
छ छ ज ज ञ ञ ञ ड ड ण त त थ द द ध
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न न न प प फ भ म य य य र र ल व व
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श ष ष स ह का या लि शि णी गु भु चू सू सू
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हे षै गो रो च चो झा ज्ञा ञ्ञ ष्ट्रा दु न्ने र्मा र्यो र्व्व.
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राजा देवेन्द्रवर्मन् (दूसरे) के विज़ागापट्टम् के दानपत्र से (गांगेय सं. २५४ = ई. स. की ८वीं शताब्दी!).
अ आ इ क ख ग च ट ड ण त थ थ द ध न फ भ
[glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph]
म म य य व श ष स ज्ञा ङ्ग क्क ज्ञ ञ्झि ध्ध न्द न्त स्था.
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[चार पंक्तियों का मूल अनुलेख / Inscription facsimile lines in Ganga script]
CC-0.Dwivedi Lok Hitkari Pustakalaya, Ghaziabad. Digitized by eGangotri
Plate LIX.
लिपिपत्र ५६वां.
कलिंग नगर के गंगवंशी राजा वज्रहस्त के पर्लाकिमेडि के दानपत्र से.
(ई. स. की ११वीं शताब्दी के मध्य के आसपास).
अ अ आ आ इ ई उ ऋ ए क क क क क ख ख ग
[अक्षर-चिह्न]
ग ग ग ग च च ज ज ज ज ज ज ट ड ड ण ण
[अक्षर-चिह्न]
ण ण ण ण ण त त त त त त द द द द ध न न
[अक्षर-चिह्न]
न न प प प फ ब भ भ म म म य य य य र र
[अक्षर-चिह्न]
र र ल ल ल व व व व व श श श ष ष स स
[अक्षर-चिह्न]
स स ह ह ह ह ळ त्य र टा धा वा रा धि गु तुं
[अक्षर-चिह्न]
पु पू पू पू सू सू क्त क्क ह्न नै को गो हो कौ च्चि ज्ञा
[अक्षर-चिह्न]
ज्ञ ज्ञा ज्ञ ज्ञ ङ्कः ण्डि त्य त्त ह्मा न्ना क्क ख्यो ईं र्ब र्भा श्री .
[अक्षर-चिह्न]
[अभिलेख-पंक्ति १: दानपत्र का मूल पाठ (गंगवंशी लिपि)]
[अभिलेख-पंक्ति २: दानपत्र का मूल पाठ (गंगवंशी लिपि)]
[अभिलेख-पंक्ति ३: दानपत्र का मूल पाठ (गंगवंशी लिपि)]
[अभिलेख-पंक्ति ४: दानपत्र का मूल पाठ (गंगवंशी लिपि)]
[अभिलेख-पंक्ति ५: दानपत्र का मूल पाठ (गंगवंशी लिपि)]
CC-0.Dwivedi Lok Hitkari Pustakalaya, Ghaziabad. Digitzed by eGangotri
Plate LX. लिपिपत्र ६०वां.
पल्लववंशी राजाओं के तीन दानपत्रों के अंत के तामिल अंशों से.
(ई. स. की सातवीं और आठवीं शताब्दी).
पल्लववंशी राजा परमेश्वरवर्मन् के कूरम के दानपत्र से (ई. स. की ७वीं शताब्दी).
अ आ इ उ ए ऐ ओ क/ग ङ च/जञ ञ ट/ड ण त/द न प/व म य र ल
व व ळ ऴ ऱ ण़ ण़् म् रू का चा पा मा कि नि पि यि
कु टु तु पु रु ळु कू रू ते ले वे नै ळै को क्का त्ति.
पल्लववंशी राजा नन्दिवर्मन् के कशाकूडि के दानपत्र से (ई. स. की ८वीं शताब्दी).
अ इ उ ऊ ए क/ग ङ च/जञ ञ ट/ड ण त/द न प/ब म य र ल
व ळ ऴ ऱ ण़ ऴ का टा या णा टि ति की नी कु टु त
मु रू णू ने कै रै टो णो ट्ट त्तु प्प र्रि.
पल्लववंशी राजा नन्दिवर्मन् (पल्लवमल्ल) के उदयेंदिरम् के दानपत्र से (ई. स. की ८वीं शताब्दी).
इ उ ओ क/ग ङ च/जञ ञ ट/ड ण त/द न प/ब म य र ल
व ऴ ऱ का सा या ति रि कु टु तु रु रू ळू कू के मे
मै रै को यो रो क्कु ण्ट त्ता प्प.
CC-0.Dwivedi Lok Hitkari Pustakalaya, Ghaziabad. Digitzed by eGangotri
Plate LXI. लिपिपत्र ६१वां.
पल्लवतिलक दन्तिवर्मन् और राष्ट्रकूट कृष्णराज (तीसरे) के लेखों से.
(ई. स. की नवीं और दसवीं शताब्दी).
पल्लवतिलकवंशी राजा दन्तिवर्मन् के समय के तिरुवेळ्ळरै के लेख से (ई. स. की ९वीं शताब्दी).
अ आ इ उ क ङ च ट ण त न प म य य र ल
[अक्षर-चिह्न]
व ळ ळ र ण क ण म् ण् का णा ना मा ला कि नि
[अक्षर-चिह्न]
कु टु त मु रु वु रू नू लू मू लू पे नै रै क्को.
[अक्षर-चिह्न]
राष्ट्रकूट राजा कण्णरदेव (कृष्णराज तीसरे) के समय के तिरुक्कोवलूर के लेख से (ई. स. की १०वीं शताब्दी).
आ इ उ ए क ङ च ञ ट ण त न न प म म य र
[अक्षर-चिह्न]
ल व व ळ ळ र ण मा या रि वि कु टु णु तु पू मु
[अक्षर-चिह्न]
रु रू कू चू पे वे रै वै लौ पो ट्टा ट्टु.
[अक्षर-चिह्न]
राष्ट्रकूट राजा कण्णरदेव (कृष्णराज तीसरे) के समय के वेल्लूर के चटान पर के लेख से.
अ इ उ ए क ङ च च ञ ट ण त न प प प
[अक्षर-चिह्न]
म म य र ल व ळ ळ र ण ता ता ना या पि
[अक्षर-चिह्न]
वी कु टु चू लू वू पे मे कै कौ पै रै.
[अक्षर-चिह्न]
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Plate LXII. लिपिपत्र ६२वां.
राजेन्द्रचोल, विरूपाक्ष और वावलकामय के लेखादि से.
(ई. स. की ११वीं से १५वीं शताब्दी).
राजेन्द्रचोल (प्रथम) के तिरुमले के चट्टान पर खुदे हुए लेख से (ई. स. की ११वीं शताब्दी).
अ इ ई उ ऊ ए ओ क ङ च ञ ञ ट ण त न प म
அ இ ஈ உ ஊ எ ஒ க ங ச ஞ ஞ ட ண த ந ப ம
य र ल व ळ ऴ ऱ ऩ पा ति णि ची यु मु चू वे वै.
ய ர ல வ ள ழ ற ன பா தி ணி சீ யு மு சூ வெ வை.
पगन (बर्मा में) से मिले हुए वैष्णव लेख से (ई. स. की १३वीं शताब्दी के आसपास).
अ इ क क च ञ ट ट ट ण त न प प म म य य
அ இ க க ச ஞ ட ட ட ண த ந ப ப ம ம ய ய
र ल व ळ ऴ ऱ ऩ मा वा रि यि कु टु पु रे लै.
ர ல வ ள ழ ற ன மா வா ரி யி கு டு பு ரெ லை.
विजयनगर के राजा विरूपाक्ष के सोरैक्कावुर के दानपत्र से (श. सं. १३०८ = ई. स. १३८६).
अ आ इ उ ए ओ क ङ च ञ ट ट ण त न प म
அ ஆ இ உ எ ஒ க ங ச ஞ ட ட ண த ந ப ம
य र ल व ळ ऴ ऱ ऩ ति लि की कु पु कू वू रै को.
ய ர ல வ ள ழ ற ன தி லி கி கு பு கூ வூ ரை கொ.
महामंडलेश्वर वावलकामय के जंबुकेश्वर के लेख से (श. सं. १४०३ = ई. स. १४८२).
अ आ इ उ ए ओ क ङ च ट ण त न प म य र ल
அ ஆ இ உ எ ஒ க ங ச ட ண த ந ப ம ய ர ல
व ळ ऴ ऱ ऩ णा टि यि मु वु रू पू णा णै रौ.
வ ள ழ ற ன ணா டி யி மு வு ரூ பூ ணா ணை ரொ.
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