प्राचीन भारतीय लिपिमाला (महामहोपाध्याय गौरीशंकर हीराचन्द ओझा - लिपि-विज्ञान व कूट-पठन)
The Paleography of India by G.H. Ojha
रायबहादुर पण्डित गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा
पृष्ठ 287, कुल 318 में से
संदर्भ में पढ़ेंPlate LX. लिपिपत्र ६०वां.
पल्लववंशी राजाओं के तीन दानपत्रों के अंत के तामिल अंशों से.
(ई. स. की सातवीं और आठवीं शताब्दी).
पल्लववंशी राजा परमेश्वरवर्मन् के कूरम के दानपत्र से (ई. स. की ७वीं शताब्दी).
अ आ इ उ ए ऐ ओ क/ग ङ च/जञ ञ ट/ड ण त/द न प/व म य र ल
व व ळ ऴ ऱ ण़ ण़् म् रू का चा पा मा कि नि पि यि
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पल्लववंशी राजा नन्दिवर्मन् के कशाकूडि के दानपत्र से (ई. स. की ८वीं शताब्दी).
अ इ उ ऊ ए क/ग ङ च/जञ ञ ट/ड ण त/द न प/ब म य र ल
व ळ ऴ ऱ ण़ ऴ का टा या णा टि ति की नी कु टु त
मु रू णू ने कै रै टो णो ट्ट त्तु प्प र्रि.
पल्लववंशी राजा नन्दिवर्मन् (पल्लवमल्ल) के उदयेंदिरम् के दानपत्र से (ई. स. की ८वीं शताब्दी).
इ उ ओ क/ग ङ च/जञ ञ ट/ड ण त/द न प/ब म य र ल
व ऴ ऱ का सा या ति रि कु टु तु रु रू ळू कू के मे
मै रै को यो रो क्कु ण्ट त्ता प्प.
CC-0.Dwivedi Lok Hitkari Pustakalaya, Ghaziabad. Digitzed by eGangotri