प्राचीन भारतीय लिपिमाला (महामहोपाध्याय गौरीशंकर हीराचन्द ओझा - लिपि-विज्ञान व कूट-पठन)
The Paleography of India by G.H. Ojha
रायबहादुर पण्डित गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा
पृष्ठ 280, कुल 318 में से
संदर्भ में पढ़ेंPlate LIII. लिपिपत्र ५३वां.
पल्लव और पाण्ड्यवंशी राजाओं के समय के लेख और दानपत्रों से.
(ई. स. की ८वीं शताब्दी).
मावलीपुरं के अतिरणचंडेश्वर नामक गुफामंदिर के लेख से (ई. स. की ८वीं शताब्दी).
अ आ इ क ख ग च ण द ध व जा शु श्च ष्णा स्था स्य.
[अतिरणचंडेश्वर गुफामंदिर लेख के वर्ण/अक्षर-चिह्न]
कशाकूडि से मिले हुए पल्लव राजा नंदिवर्मा के दानपत्र से (ई. स. की ८वीं शताब्दी).
अ आ इ ई उ ए ऐ क ख ग घ च छ ज ट ड ण त
[कशाकूडि दानपत्र के वर्ण/स्वर-व्यंजन चिह्न]
थ द ध न प फ ब भ म य र ल व श ष स ह ळ
[कशाकूडि दानपत्र के व्यंजन चिह्न]
न म का या रि णी कु तु पु धू भू द्ध दृ चे के कै तो कौ
[कशाकूडि दानपत्र के मात्रा-युक्त वर्ण चिह्न]
मौ क्त च चि ङ्ग च्छ ज्ञा ञ्च ण्ठ ण्ड त्या त्य न्द्र र्द्र ब्द श्रो स्थि.
[कशाकूडि दानपत्र के संयुक्ताक्षर चिह्न]
पाण्ड्यवंशी राजा परान्तक के समय के नारसिंगं के लेख से (कलियुग सं. ३८७१ = ई. स. ७७०).
ए क च ज न ष स म् वा हा सी गृ रो ग ण्ड्य ष्णोः.
[नारसिंगं लेख के वर्ण/संयुक्ताक्षर चिह्न]
[पाण्ड्य/पल्लव कालीन अभिलेख का मूल प्रतिरूप - पंक्ति १]
[पाण्ड्य/पल्लव कालीन अभिलेख का मूल प्रतिरूप - पंक्ति २]
[पाण्ड्य/पल्लव कालीन अभिलेख का मूल प्रतिरूप - पंक्ति ३]
[पाण्ड्य/पल्लव कालीन अभिलेख का मूल प्रतिरूप - पंक्ति ४]
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