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सर्वकोश
प्राचीन भारतीय लिपिमाला (महामहोपाध्याय गौरीशंकर हीराचन्द ओझा - लिपि-विज्ञान व कूट-पठन)

प्राचीन भारतीय लिपिमाला (महामहोपाध्याय गौरीशंकर हीराचन्द ओझा - लिपि-विज्ञान व कूट-पठन)

The Paleography of India by G.H. Ojha

रायबहादुर पण्डित गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा

DevanagariHindipublished318 पृष्ठ

पृष्ठ 288, कुल 318 में से

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पृष्ठ 288

Plate LXI. लिपिपत्र ६१वां.
पल्लवतिलक दन्तिवर्मन् और राष्ट्रकूट कृष्णराज (तीसरे) के लेखों से.
(ई. स. की नवीं और दसवीं शताब्दी).
पल्लवतिलकवंशी राजा दन्तिवर्मन् के समय के तिरुवेळ्ळरै के लेख से (ई. स. की ९वीं शताब्दी).
अ आ इ उ क ङ च ट ण त न प म य य र ल
[अक्षर-चिह्न]
व ळ ळ र ण क ण म् ण् का णा ना मा ला कि नि
[अक्षर-चिह्न]
कु टु त मु रु वु रू नू लू मू लू पे नै रै क्को.
[अक्षर-चिह्न]
राष्ट्रकूट राजा कण्णरदेव (कृष्णराज तीसरे) के समय के तिरुक्कोवलूर के लेख से (ई. स. की १०वीं शताब्दी).
आ इ उ ए क ङ च ञ ट ण त न न प म म य र
[अक्षर-चिह्न]
ल व व ळ ळ र ण मा या रि वि कु टु णु तु पू मु
[अक्षर-चिह्न]
रु रू कू चू पे वे रै वै लौ पो ट्टा ट्टु.
[अक्षर-चिह्न]
राष्ट्रकूट राजा कण्णरदेव (कृष्णराज तीसरे) के समय के वेल्लूर के चटान पर के लेख से.
अ इ उ ए क ङ च च ञ ट ण त न प प प
[अक्षर-चिह्न]
म म य र ल व ळ ळ र ण ता ता ना या पि
[अक्षर-चिह्न]
वी कु टु चू लू वू पे मे कै कौ पै रै.
[अक्षर-चिह्न]
CC-0.Dwivedi Lok Hitkari Pustakalaya, Ghaziabad. Digitized by eGangotri