प्राचीन भारतीय लिपिमाला (महामहोपाध्याय गौरीशंकर हीराचन्द ओझा - लिपि-विज्ञान व कूट-पठन)
The Paleography of India by G.H. Ojha
रायबहादुर पण्डित गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा
पृष्ठ 284, कुल 318 में से
संदर्भ में पढ़ेंPlate LVII.
लिपिपत्र ५७ वां.
कलिंग नगर के गंगावंशी (पूर्वी) राजाओं के तीन दानपत्रों से.
(ई. स. की ७वीं और ८वीं शताब्दी ?)
पूर्वी गंगावंशी राजा इन्द्रवर्मन् के अच्युतपुरं के दानपत्र से (गांगेय सं. ८७ = ई. स. की ७वीं शताब्दी !).
अ आ इ उ क ख ग घ च ज ट ड त द ध न प फ ब
[glyphs representing archaic characters]
भ म र व श ष या या लि णी स्तू द्ये जे गो गौ ङ्गा ङ्ग द्व.
[glyphs representing archaic characters]
पूर्वी गंगावंशी राजा इन्द्रवर्मन् (दूसरे) के चिकाकोल के दानपत्र से (गांगेय सं. १४६ = ई. स. की ७वीं शताब्दी ?).
आ क ख ग घ च ज ट ड ण त थ द ध न प फ ब भ
[glyphs representing archaic characters]
म य र श ष स म् ला त्रि जे हे या ङ्ग ङ्क ङ्गा र्क द्व.
[glyphs representing archaic characters]
गंगावंशी राजा देवेन्द्रवर्मन् (गुणार्णव के पुत्र) के दानपत्र से (गांगेय सं. १८३ = ई. स. की ८वीं शताब्दी ?).
अ इ उ क ख ग घ च ज ट ड ण त थ द ध न प फ
[glyphs representing archaic characters]
ब भ म य र ल व श ष स ह ङ्ग ङ्क ङ्गा ज्ञ *क ४प.
[glyphs representing archaic characters]
[Inscriptions line 1 in ancient characters]
[Inscriptions line 2 in ancient characters]
[Inscriptions line 3 in ancient characters]
[Inscriptions line 4 in ancient characters]
[Inscriptions line 5 in ancient characters]
CC-0.Dwivedi Lok Hitkari Pustakalaya, Ghaziabad. Digitzed by eGangotri