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प्राचीन भारतीय लिपिमाला (महामहोपाध्याय गौरीशंकर हीराचन्द ओझा - लिपि-विज्ञान व कूट-पठन)

प्राचीन भारतीय लिपिमाला (महामहोपाध्याय गौरीशंकर हीराचन्द ओझा - लिपि-विज्ञान व कूट-पठन)

The Paleography of India by G.H. Ojha

रायबहादुर पण्डित गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा

DevanagariHindipublished318 पृष्ठ

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पृष्ठ 273

Plate XLVI.
लिपिपत्र ४६वां.
केंडूर से मिले हुए पश्चिमी चालुक्य वंशी राजा कीर्तिवर्मन् (दूसरे) के दानपत्र से.
(श. सं. ६७२ = ई. स. ७५०).
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[वर्ण-चिह्न पंक्ति १]
ण ण त थ थ द ध ध न न प फ ब ब भ भ म म
[वर्ण-चिह्न पंक्ति २]
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[वर्ण-चिह्न पंक्ति ३]
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[वर्ण-चिह्न पंक्ति ४]
सू कृ पृ पृ णे वे शे रै यो लो पौ क्रा क्र च्च च्छ ञ्जा
[वर्ण-चिह्न पंक्ति ५]
ञ्च ञ्च ङ्क ष्ट्रा न्त त्म त्रा न्भू र्क र्त्य र्म्म र्व्या ष्प ग्य ष्ठे ४थी.
[वर्ण-चिह्न पंक्ति ६]
[दानपत्र का मूल आलेख - लिपि पंक्ति १]
[दानपत्र का मूल आलेख - लिपि पंक्ति २]
[दानपत्र का मूल आलेख - लिपि पंक्ति ३]
[दानपत्र का मूल आलेख - लिपि पंक्ति ४]
[दानपत्र का मूल आलेख - लिपि पंक्ति ५]
[दानपत्र का मूल आलेख - लिपि पंक्ति ६]
[दानपत्र का मूल आलेख - लिपि पंक्ति ७]
CC-0.Dwivedi Lok Hitkari Pustakalaya, Ghaziabad. Digitized by eGangotri