प्राचीन भारतीय लिपिमाला (महामहोपाध्याय गौरीशंकर हीराचन्द ओझा - लिपि-विज्ञान व कूट-पठन)
The Paleography of India by G.H. Ojha
रायबहादुर पण्डित गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा
पृष्ठ 274, कुल 318 में से
संदर्भ में पढ़ेंPlate XLVII.
लिपिपत्र ४७वां.
कड़ब से मिले हुए राष्ट्रकूट वंशी राजा प्रभूतवर्ष (गोविंदराज तीसरे) के दानपत्र से.
(श. सं ७३५ = ई. स. ८१३).
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[अभिलेख-अंश / मूल लिपि पाठ - पंक्ति १]
[अभिलेख-अंश / मूल लिपि पाठ - पंक्ति २]
[अभिलेख-अंश / मूल लिपि पाठ - पंक्ति ३]
[अभिलेख-अंश / मूल लिपि पाठ - पंक्ति ४]
[अभिलेख-अंश / मूल लिपि पाठ - पंक्ति ५]
[अभिलेख-अंश / मूल लिपि पाठ - पंक्ति ६]
[अभिलेख-अंश / मूल लिपि पाठ - पंक्ति ७]
CC-0.Dwivedi Lok Hitkari Pustakalaya, Ghaziabad. Digitzed by eGangotri