प्राचीन भारतीय लिपिमाला (महामहोपाध्याय गौरीशंकर हीराचन्द ओझा - लिपि-विज्ञान व कूट-पठन)

प्राचीन भारतीय लिपिमाला (महामहोपाध्याय गौरीशंकर हीराचन्द ओझा - लिपि-विज्ञान व कूट-पठन)
The Paleography of India by G.H. Ojha
रायबहादुर पण्डित गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा
DevanagariHindipublished318 पृष्ठ
पृष्ठ 281, कुल 318 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 281पल्लववंशी नन्दिवर्मा (पल्लवमल्ल) और गंगावंशी पृथिवीपति (दूसरे) के दानपत्रों से
पल्लववंशी नन्दिवर्मा (पल्लवमल्ल) के उदयॆन्दिरं के दानपत्र से (ई. स. की ८वीं शताब्दी).
गंगावंशी राजा पृथिवीपति (दूसरे) के उदयॆन्दिरं के दानपत्र से (ई. स. की १०वीं शताब्दी).
Plate LIV. लिपिपत्र ५४वां.
पल्लववंशी नन्दिवर्मा (पल्लवमल्ल) और गंगावंशी पृथिवीपति (दूसरे) के दानपत्रों से
(ई. स. की ८वीं और १०वीं शताब्दी).
पल्लववंशी नन्दिवर्मा (पल्लवमल्ल) के उदयॆन्दिरं के दानपत्र से (ई. स. की ८वीं शताब्दी).
अ अ अ आ इ उ उ ए क ख ग ग घ च ज ट
[पल्लव-ग्रन्थ लिपि वर्ण: अ, अ, अ, आ, इ, उ, उ, ए, क, ख, ग, ग, घ, च, ज, ट]
ठ ड ढ ण त थ द ध न प व भ म य र र ल
[पल्लव-ग्रन्थ लिपि वर्ण: ठ, ड, ढ, ण, त, थ, द, ध, न, प, व, भ, म, य, र, र, ल]
ल व श ष स ह ळ म् मा गि नी वी कु रु भु सु
[पल्लव-ग्रन्थ लिपि वर्ण: ल, व, श, ष, स, ह, ळ, म्, मा, गि, नी, वी, कु, रु, भु, सु]
भू मू क्र द्व रै णां जौ न्त च्छी न्थ्य ञ्ज ङ्कु × क.
[पल्लव-ग्रन्थ लिपि वर्ण व संयुक्ताक्षर: भू, मू, क्र, द्व, रै, णां, जौ, न्त, च्छी, न्थ्य, ञ्ज, ङ्कु, क.]
गंगावंशी राजा पृथिवीपति (दूसरे) के उदयॆन्दिरं के दानपत्र से (ई. स. की १०वीं शताब्दी).
अ आ उ ए क क ख ग घ च ज ट ठ ण त थ द ध
[गंगावंशी ग्रन्थ लिपि वर्ण: अ, आ, उ, ए, क, क, ख, ग, घ, च, ज, ट, ठ, ण, त, थ, द, ध]
न प ब भ म य र ल व श ष स ह ळ पी ण्ड न्नी म्र.
[गंगावंशी ग्रन्थ लिपि वर्ण: न, प, ब, भ, म, य, र, ल, व, श, ष, स, ह, ळ, पी, ण्ड, न्नी, म्र.]
[अभिलेख/दानपत्र का ग्रन्थ-लिपि मूल पाठ - पंक्ति १]
[अभिलेख/दानपत्र का ग्रन्थ-लिपि मूल पाठ - पंक्ति २]
[अभिलेख/दानपत्र का ग्रन्थ-लिपि मूल पाठ - पंक्ति ३]
[अभिलेख/दानपत्र का ग्रन्थ-लिपि मूल पाठ - पंक्ति ४]
[अभिलेख/दानपत्र का ग्रन्थ-लिपि मूल पाठ - पंक्ति ५]
CC-0.Dwivedi Lok Hitkari Pustakalaya, Ghaziabad. Digitzed by eGangotri