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सर्वकोश
प्राचीन भारतीय लिपिमाला (महामहोपाध्याय गौरीशंकर हीराचन्द ओझा - लिपि-विज्ञान व कूट-पठन)

प्राचीन भारतीय लिपिमाला (महामहोपाध्याय गौरीशंकर हीराचन्द ओझा - लिपि-विज्ञान व कूट-पठन)

The Paleography of India by G.H. Ojha

रायबहादुर पण्डित गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा

DevanagariHindipublished318 पृष्ठ

पृष्ठ 278, कुल 318 में से

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पृष्ठ 278

Plate LI.
लिपिपत्र ५१वां.
नामय नायक, अन्नवेम और गणदेव के दानपत्रों से.
(ई. स. की १४वीं और १५वीं शताब्दी).
पीठापुरी के नामय नायक के दोनेपुंडि के दानपत्र से (श. सं १२५८ = ई. स. १३३७).
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वै शौ शो पौ चि न्ना च्छु ज्ञा न्नों श्री श्री स्तु स्या स्सौ.
వై శౌ శో పౌ చి న్నా చ్ఛు జ్ఞా న్నో శ్రీ శ్రీ స్తు స్యా స్సౌ.
वनपल्ली से मिले हुए अन्नवेम के दानपत्र से मुख्य मुख्य अक्षर (श. सं १३०० = ई. स. १३७८).
आ ऋ च फ म ळ त टा षा पु यै हो ख्यै ह्न प्रशो.
ఆ ఋ చ ఫ మ ళ త టా షా పు యై హో ఖ్యై హ్న ప్రశో.
कोण्डवीडु के राजा गणदेव के दानपत्र से (श. सं. १३७७ = ई. स. १४५५).
अ ट च प व ह न् ढा ला ति लो ङ्क्ष टृ न्ना श्रो श्रो.
అ ట చ ప వ హ న్ ఢా లా తి లొ ఙ్క్ష తృ న్నా శ్రో శ్రో.
ఁ|ఁ శ్రీఉమామహేశ్వరాభ్యాం నమః। దాయాద్వః (श्रीउमामहेश्वराभ्यां नमः । पायाद्वः)
కరివదనః ప్రతనిజదానస్తుతాదివావిగనౌ। (करिवदनः प्रथितनिजदानस्तुतो दिवाविशनौ ।)
నిసదతి ముహురంపిదత్తె కర్ణౌ యః రన్త- (निसदति मुहुुरपिदत्ते कर्णौ यः रन्त-)
తాలాభ్యాం॥ త్రివిష్టరంస్తు భవదిష్టత్థలప్రదా- (तालाभ्यां ॥ त्रिविष्टरंस्तु भवदिष्टस्थलप्रदा-)
CC-0.Dwivedi Lok Hitkari Pustakalaya, Ghaziabad. Digitized by eGangotri