प्राचीन भारतीय लिपिमाला (महामहोपाध्याय गौरीशंकर हीराचन्द ओझा - लिपि-विज्ञान व कूट-पठन)
The Paleography of India by G.H. Ojha
रायबहादुर पण्डित गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा
पृष्ठ 276, कुल 318 में से
संदर्भ में पढ़ेंPlate XLIX.
लिपिपत्र ४६वां.
कोरुमेल्लि से मिले हुए पूर्वी चालुक्यवंशी राजा राजराज के दानपत्र से.
(ई. स. की ११वीं शताब्दी).
अ अ आ आ इ ई उ ए क ख ग घ च च छ ज ट ट
[तदनुरूप लिपि-चिह्न]
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[तदनुरूप लिपि-चिह्न]
ल व श ष स ह र त् न् ना रा लां कि णि ति रि त्ति जी
[तदनुरूप लिपि-चिह्न]
भी मो नु रु चू सू दृ वृ जें ते दे ने ये तै तो
[तदनुरूप लिपि-चिह्न]
धो भो मो मो पो भौ क्र क्रो च्र च्रो ङ्के ङ्गे दृ ण्डी सा
[तदनुरूप लिपि-चिह्न]
हे द्व न्न न्नी न्मु प्र न्न र्बु र्म्मा र्ग्य ष्ट्र श्री द्या द्वा
[तदनुरूप लिपि-चिह्न]
ष्णो स्मा स्य स्व स्मो स्त्र . ञ ञा . ख र . ञ खा . ञ .
[तदनुरूप लिपि-चिह्न]
[मूल दानपत्र की लिपिबद्ध पंक्तियाँ:]
[पंक्ति १: प्राकृत/संस्कृत प्रशस्ति का प्रारम्भिक भाग]
[पंक्ति २: प्रशस्ति पाठ]
[पंक्ति ३: प्रशस्ति पाठ]
[पंक्ति ४: प्रशस्ति पाठ]
[पंक्ति ५: प्रशस्ति पाठ]
[पंक्ति ६: प्रशस्ति पाठ]
[पंक्ति ७: प्रशस्ति पाठ]
CC-0.Dwivedi Lok Hitkari Pustakalaya, Ghaziabad. Digitized by eGangotri