प्राचीन भारतीय लिपिमाला (महामहोपाध्याय गौरीशंकर हीराचन्द ओझा - लिपि-विज्ञान व कूट-पठन)
The Paleography of India by G.H. Ojha
रायबहादुर पण्डित गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा
पृष्ठ 270, कुल 318 में से
संदर्भ में पढ़ेंPlate XLIII.
लिपिपत्र ४३वां.
पल्लव वंशी राजा विष्णुगोपवर्मन् और सिंहवर्मन् के दानपत्रों से.
(ई. स. की पांचवीं शताब्दी).
पल्लव वंशी राजा विष्णुगोपवर्मन् के उरुवुपल्लि गांव के दानपत्र से .
अ उ ए क ग च ज ड ण त थ द ध न प व भ म य
[पल्लव लिपि वर्णमाला पंक्ति १]
र ल व श ष स ह त् जा धा नि वी गु कु सु कू पू भू वृ
[पल्लव लिपि वर्णमाला पंक्ति २]
नै र्ने गो लो पौ चा च्छा ञ्च ष्ट्रा त्र र्द्ध म्मो श्री वृ क्ष्या स्थि स्थ.
[पल्लव लिपि वर्णमाला पंक्ति ३]
पल्लव वंशी राजा सिंहवर्मन् के पिकिर गांव के दानपत्र से मुख्य मुख्य अक्षर.
च ज त थ द द ध न फ ब व श ष ष ज्ञा ष्ट्रा र्ने स्थि.
[पल्लव लिपि वर्णमाला पंक्ति ४]
पल्लव वंशी राजा सिंहवर्मन् के मंगलुर गांव के दानपत्र से मुख्य मुख्य अक्षर.
औ ख घ क्ट ट य द ध न श ह ह धा थि ळू र्ने क्क श्ये
[पल्लव लिपि वर्णमाला पंक्ति ५]
[अभिलेख/दानपत्र का पल्लव लिपि में अनुलेख - पंक्ति १]
[अभिलेख/दानपत्र का पल्लव लिपि में अनुलेख - पंक्ति २]
[अभिलेख/दानपत्र का पल्लव लिपि में अनुलेख - पंक्ति ३]
[अभिलेख/दानपत्र का पल्लव लिपि में अनुलेख - पंक्ति ४]
[अभिलेख/दानपत्र का पल्लव लिपि में अनुलेख - पंक्ति ५]
[अभिलेख/दानपत्र का पल्लव लिपि में अनुलेख - पंक्ति ६]
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