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प्राचीन भारतीय लिपिमाला (महामहोपाध्याय गौरीशंकर हीराचन्द ओझा - लिपि-विज्ञान व कूट-पठन)

प्राचीन भारतीय लिपिमाला (महामहोपाध्याय गौरीशंकर हीराचन्द ओझा - लिपि-विज्ञान व कूट-पठन)

The Paleography of India by G.H. Ojha

रायबहादुर पण्डित गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा

DevanagariHindipublished318 पृष्ठ

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पृष्ठ 271

Plate XLIV. लिपिपत्र ४४वां.
कदंब वंशी राजा मृगेशवर्मन् और काकुस्थवर्मन् के दानपत्रों से.
(ई. स. की छठी शताब्दी).
देवगिरि से मिलेहुए कदंब वंशी राजा मृगेशवर्मन् के दानपत्र से.
अ आ इ उ ए क क ख ग घ च ज ट ड ण त थ द द ध
[कदम्ब-लिपि-स्वर-व्यञ्जनानि]
न न न प फ ब व ब भ भ म य र ल व व श ष स ह
[कदम्ब-लिपि-व्यञ्जनानि]
ड् न् णा मा णि लि हिः गो भु ङ्क भू भू क्त क्त दृ द्ध ते ले
[कदम्ब-लिपि-मात्रा-युक्ताक्षराणि]
वै गो नो लो लो यौ पौ क्रा द्विश्व ज्ञा न्च र्त्त र्थ्य र्ह श्री स्था स्थ.
[कदम्ब-लिपि-संयुक्ताक्षराणि]
देवगिरि से मिलेहुए कदंब वंशी राजा काकुस्थवर्मन् के दो दानपत्रों से मुख्य मुख्य अक्षर.
अ आ इ इ उ ख़ ख च ज ढ ण त त थ द ध न न ब भ
[कदम्ब-लिपि-अक्षराणि]
म य र ल ळ व श म् त् ती कू पू सू क्त क्त दृ ङ्को ष्ठम्.
[कदम्ब-लिपि-अक्षराणि]
सिद्धम् ॥ जयत्युद्भूतविस्तारः सुरेन्द्रानीक सङ्घशः । नमः [?]
शशिशेखरसंस्थानकुमुदाकरशीतगुः ॥ श्रीमान् वैरिमहावृक्षो [?] मूलोद्ध-
र्त्ता कदम्बराजोऽभूत् काकुत्स्थनृपतिः श्रुतः । यस्यास्यनलिनोत्फुल्ल-
नेत्रं मदिरासवं सुहृद्वल्लभकाव्यञ्च वन्दिभिर्बहुधोच्यते ॥
सटङ्कानां मुकुटमकुटायमानपद्मरागद्युतिविद्योतितपादयोः सुचरितैर्गुण-
CC-0.Dwivedi Lok Hitkari Pustakalaya, Ghaziabad. Digitized by eGangotri