प्राचीन भारतीय लिपिमाला (महामहोपाध्याय गौरीशंकर हीराचन्द ओझा - लिपि-विज्ञान व कूट-पठन)
The Paleography of India by G.H. Ojha
रायबहादुर पण्डित गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा
पृष्ठ 286, कुल 318 में से
संदर्भ में पढ़ेंPlate LIX.
लिपिपत्र ५६वां.
कलिंग नगर के गंगवंशी राजा वज्रहस्त के पर्लाकिमेडि के दानपत्र से.
(ई. स. की ११वीं शताब्दी के मध्य के आसपास).
अ अ आ आ इ ई उ ऋ ए क क क क क ख ख ग
[अक्षर-चिह्न]
ग ग ग ग च च ज ज ज ज ज ज ट ड ड ण ण
[अक्षर-चिह्न]
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[अक्षर-चिह्न]
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[अक्षर-चिह्न]
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[अक्षर-चिह्न]
स स ह ह ह ह ळ त्य र टा धा वा रा धि गु तुं
[अक्षर-चिह्न]
पु पू पू पू सू सू क्त क्क ह्न नै को गो हो कौ च्चि ज्ञा
[अक्षर-चिह्न]
ज्ञ ज्ञा ज्ञ ज्ञ ङ्कः ण्डि त्य त्त ह्मा न्ना क्क ख्यो ईं र्ब र्भा श्री .
[अक्षर-चिह्न]
[अभिलेख-पंक्ति १: दानपत्र का मूल पाठ (गंगवंशी लिपि)]
[अभिलेख-पंक्ति २: दानपत्र का मूल पाठ (गंगवंशी लिपि)]
[अभिलेख-पंक्ति ३: दानपत्र का मूल पाठ (गंगवंशी लिपि)]
[अभिलेख-पंक्ति ४: दानपत्र का मूल पाठ (गंगवंशी लिपि)]
[अभिलेख-पंक्ति ५: दानपत्र का मूल पाठ (गंगवंशी लिपि)]
CC-0.Dwivedi Lok Hitkari Pustakalaya, Ghaziabad. Digitzed by eGangotri