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सर्वकोश
प्राचीन भारतीय लिपिमाला (महामहोपाध्याय गौरीशंकर हीराचन्द ओझा - लिपि-विज्ञान व कूट-पठन)

प्राचीन भारतीय लिपिमाला (महामहोपाध्याय गौरीशंकर हीराचन्द ओझा - लिपि-विज्ञान व कूट-पठन)

The Paleography of India by G.H. Ojha

रायबहादुर पण्डित गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा

DevanagariHindipublished318 पृष्ठ

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पृष्ठ 283

Plate LVI.
लिपिपत्र ५६वां.
पाण्ड्यवंशी सुंदरपाण्ड्य के लेख और यादव विरूपाक्ष तथा गिरिभूपाल के दानपत्रों से.
(ई. स. की १३वीं से १५वीं शताब्दी तक).
पाण्ड्यवंशी राजा सुन्दरपाण्ड्य के ओरंगं के लेख से (ई. स. की १३वीं शताब्दी).
अ आ इ उ ऊ ऌ ओ क ख ग घ ङ च ज ट ठ
ड ण त थ द ध न प फ ब भ म य र ल
व श ष स ह ळ त् त् म् र् कि री मु मू क्त दृ
ष्टं ते घै वो हौ क्लृ क्रा क्र च्च च्छा
ञ्ज ञ्जि ण्ड्य द्रु न्द म्प र्ङ्गि र्ष्णा र्य्य र्ब्बि र्म्म श्री स्ख.
आलंपूण्डि से मिलेहुए विजयनगर के यादव राजा विरूपाक्ष के दानपत्र से (श. सं. १३०५ = ई. स. १३८३).
ओं ख ग ड म र श ळ त न का थि सी कु ष्पु चू रू क्रा.
विजयनगर के यादव गिरिभूपाल के दानपत्र से (शक. सं. १३४६ = ई. स. १४२४).
अ आ उ ऋ ए औ क ग घ फ भ म ह ळ म् रू व्य.
हरिः ॐ स्वस्ति श्रीः येनामौलि
करुणाम्भोधेय दशां श्रीरङ्गवज्रकान्ताः
सुधाधरह्वनाधारवुणयिनं कण्ठा-
CC-0.Dwivedi Lok Hitkari Pustakalaya, Ghaziabad. Digitzed by eGangotri