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सर्वकोश
प्राचीन भारतीय लिपिमाला (महामहोपाध्याय गौरीशंकर हीराचन्द ओझा - लिपि-विज्ञान व कूट-पठन)

प्राचीन भारतीय लिपिमाला (महामहोपाध्याय गौरीशंकर हीराचन्द ओझा - लिपि-विज्ञान व कूट-पठन)

The Paleography of India by G.H. Ojha

रायबहादुर पण्डित गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा

DevanagariHindipublished318 पृष्ठ

पृष्ठ 282, कुल 318 में से

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पृष्ठ 282

Plate LV. लिपिपत्र ५५वां.
कुलोत्तुंगचोड और विक्रमचोड के लेखों तथा विक्रमादित्य के दानपत्र से.
(ई. स. की ११वीं और १२वीं शताब्दी).
कुलोत्तुंगचोड के चिदंबरं के लेख से (ई. स. की ११वीं शताब्दी).
य द न भ य र श स ह ळ की क्ष श्व ट्टा श्रीः.
[तदनुरूप ग्रन्थ लिपि चिह्न]
विक्रमचोड के समय के शेविलिमेडु के लेख से (ई. स. ११२४).
ए ख ग च ज ट ड ण द ध प ब भ म य र ल
[तदनुरूप ग्रन्थ लिपि चिह्न]
व श ह ळ त् म् कु शु कृ घृ नृ श्वे च्र व्या स्रो त्त.
[तदनुरूप ग्रन्थ लिपि चिह्न]
बाणवंशी राजा विक्रमादित्य (विजयवाडू) दूसरे के उदयेंदिरं के दानपत्र से (ई. स. की १२वीं शताब्दी).
अ आ इ क ख ग घ च ज ट ठ ड ण त य द ध
[तदनुरूप ग्रन्थ लिपि चिह्न]
न प ब भ म य य र ल ल व श ष स स ह
[तदनुरूप ग्रन्थ लिपि चिह्न]
ळ ळ त् म् चि झ ञ ध्य ण्डी त्या द्या द्वौ न्न न्द न्त्रा स्न.
[तदनुरूप ग्रन्थ लिपि चिह्न]
[दानपत्र का मूल ग्रन्थ-लिपि लेख — पंक्ति १]
[दानपत्र का मूल ग्रन्थ-लिपि लेख — पंक्ति २]
[दानपत्र का मूल ग्रन्थ-लिपि लेख — पंक्ति ३]
[दानपत्र का मूल ग्रन्थ-लिपि लेख — पंक्ति ४]
CC-0.Dwivedi Lok Hitkari Pustakalaya, Ghaziabad. Digitzed by eGangotri