प्राचीन भारतीय लिपिमाला (महामहोपाध्याय गौरीशंकर हीराचन्द ओझा - लिपि-विज्ञान व कूट-पठन)

प्राचीन भारतीय लिपिमाला (महामहोपाध्याय गौरीशंकर हीराचन्द ओझा - लिपि-विज्ञान व कूट-पठन)
The Paleography of India by G.H. Ojha
रायबहादुर पण्डित गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा
DevanagariHindipublished318 पृष्ठ
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Plate XLV.
लिपिपत्र ४५वां.
चालुक्य वंशी राजाओं के लेख और दानपत्रों से.
(ई. स. की छठी और सातवीं शताब्दी).
चालुक्य वंशी राजा मंगलीश्वर के समय के बादामी के लेख से (शक सं. ५०० = ई. स. ५७८).
अ क क ख ग च ज ट ड ण त य द ध ध न न प फ ब
ब भ म म य य र र ल व व श श ष स ह दा भि
री ली सु पृ क्क क्क मो यो पौ च ङ्ग चक्रे श्व ङ्क द्र र्त्य र्थ्य श्री द्वि.
चालुक्य वंशी राजा पुलकेशी (दूसरे) के हैदराबाद के दानपत्र से (शक सं. ५३४ = ई. स. ६१२).
अ आ इ उ क ख ग घ ट ड त य द ध न व भ र कृ ज्ञ.
पूर्वी चालुक्य राजा सर्वलोकाश्रय (मंगियुवराज) के चेंडलूर के दानपत्र से (ई. स. ६७३).
आ इ ए अं क क ख ग घ क क त द न ब र स ह
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