सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
संग्रह पर लौटें

महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व

Mahabharata (Vol 6) - Anushasana to Harivamsa Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished2,566 पृष्ठ

अध्याय (पृष्ठ 2468)

⬅ विषय-सूची (TOC)

वसुदेवजी अर्जुनको यादव-विनाशका वृत्तान्त और श्रीकृष्णका संदेश सुना रहे हैं

यदुक्तं पार्थ कृष्णेन तत् सर्वमखिलं कुरु ।
एतत् ते पार्थ राज्यं च स्त्रियो रत्नानि चैव हि ।
इष्टान् प्राणानहं हीमांस्त्यक्ष्यामि रिपुसूदन ।। २८ ।।

पार्थ! श्रीकृष्णने जो कुछ कहा है, वह सब करो। यह राज्य, ये स्त्रियाँ और ये रत्न— सब तुम्हारे अधीन हैं। शत्रुसूदन! अब मैं निश्चिन्त होकर अपने इन प्यारे प्राणोंका परित्याग करूँगा ।। २८ ।।

इति श्रीमहाभारते मौसलपर्वणि अर्जुनवसुदेवसंवादे षष्ठोऽध्यायः ।। ६ ।।
इस प्रकार श्रीमहाभारत मौसलपर्वमें अर्जुन और वसुदेवका संवादविषयक छठा अध्याय पूरा हुआ ।। ६ ।।