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प्राचीन भारतीय लिपिमाला (महामहोपाध्याय गौरीशंकर हीराचन्द ओझा - लिपि-विज्ञान व कूट-पठन)

The Paleography of India by G.H. Ojha

रायबहादुर पण्डित गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा

DevanagariHindipublished318 पृष्ठ

Plate XXI.
लिपिपत्र २१वां.
राजा हर्ष के दानपत्र तथा राजा अंशुवर्मा, दुर्गगण आदि के लेखों से.
(ई. स. की सातवीं और आठवीं शताब्दी).
बांसखेड़ा से मिले हुए राजा हर्ष के दानपत्र से मुख्य मुख्य अक्षर (हर्ष सं. २२ = ई. स. ६२८).
ए च ट थ ह को द्वा ण्ड प्प ४ प्र. घ म रा हा श्री.
[प्राचीन लिपि के अक्षर]
नेपाल के राजा अंशुवर्मा के लेख से मुख्य मुख्य अक्षर (हर्ष सं. ३६ = ई. स. ६४५).
ट ड य ध ब भ य ष स द्ध चि ज्ञा त्पू य्या र्मा स्प्रि ष्ठा खि.
[प्राचीन लिपि के अक्षर]
राजा दुर्गगण के झालरापाटन के लेख से मुख्य मुख्य अक्षर (वि. सं. ७४६ = ई. स. ६८९).
अ आ इ उ ए क ख ग घ च ज ट ण त थ ध
[प्राचीन लिपि के अक्षर]
यं द धन फ भ य ल दुः रु पू ज्ञा त्यं र्यी र्य x क ओं.
[प्राचीन लिपि के अक्षर]
कुदारकोट के लेख से मुख्य मुख्य अक्षर (ई. स. की सातवीं शताब्दी).
अ अ आ उ ए ऐ औ कृ य ह ना या च चि या स्यै त न.
[प्राचीन लिपि के अक्षर]
राजा शिवगण के कोटा के लेख से मुख्य मुख्य अक्षर (वि. सं. ७९५ = ई. स. ७३८).
अ अ उ क घ घ ज झ य म रु जू धू रू च ब्द त्.
[प्राचीन लिपि के अक्षर]
ॐ नमः शिवाय ॐ नमः सकलसंसारसंता
नांतहेतवे। दशैकादशसंख्याय नमः
स्तेभ्यो धनुकार्बूदिदसिनेरिपुपदैः परैर्द्देवेन्युत्से-
CC-0.Dwivedi Lok Hitkari Pustakalaya, Ghaziabad. Digitized by eGangotri

Plate XXII. लिपिपत्र २२वां.
चंबा के राजा मेरुवर्मा के ५ लेखों से.
(ई. स. की आठवीं शताब्दी).
राजा मेरुवर्मा के गूंगांव के लेख से मुख्य मुख्य अक्षर.
क म ल व व श स दा षा कि ली सु त्त र्व्व श्री ओं.
[चित्र: गूंगांव के लेख के वर्ण-चिह्न]
पित्तल की मूर्तियों पर खुदे हुए राजा मेरुवर्मा के ४ लेखों से.
आ आ आ आ ए क क क क ग ग ग च ज ण ण त
[चित्र: वर्ण-चिह्न]
थ थ द द द ध ध न न न न प फ भ भ भ म य
[चित्र: वर्ण-चिह्न]
र र ल व व व/ब व श ष स स स ह ह का सा चि
[चित्र: वर्ण-चिह्न]
पी त दु दृ भू मू ष्ट्र क्त दृ दे ने मे कै तो पो
[चित्र: वर्ण-चिह्न]
क्रि त्त ग्गी न्न न्त्न न्द्र न्न र्म्मि र्म्म र्मा र्मा र्य श्री ष्ट्र X का ओं.
[चित्र: वर्ण-चिह्न]
ॐ प्रासादं मेरुसदृशं . हिमवन्मूर्द्धिः कृतं श्रुत्वा
प्रवरकर्म्मणां केरवैः समुद्गतलचितं मवमरूतम प्र-
तीतं केशिद्विवमन्वयेनः कत्रिद्भिः य तन्यानन्दो दृषद्वरु वि-
मक्योलकाटः संश्रिष्टयहककुटेरुद्देशे यटमः श्रीमेरु-
वर्म्मणस्तुरेरविकीर्त्तिरेषः मातापित्रोः भक्त्यात्मफलमु-
CC-0.Dwivedi Lok Hitkari Pustakalaya, Ghaziabad. Digitized by eGangotri

Plate XXIII. लिपिपत्र २३ वां.
प्रतिहार वंशी राजा नागभट, बाउक और ककुक के लेखों से.
(ई. स. की नवीं शताब्दी).
प्रतिहार राजा नागभट के बुचकला के लेख से मुख्य मुख्य अक्षर (वि. सं. ८७२ = ई. स. ८१५).
अ आ इ उ क घ न म ह नु भु दे द्धा प्र ईं श्री ओं.
[प्रतिहार राजा नागभट के बुचकला लेख के अक्षर]
प्रतिहार बाउक के जोधपुर के लेख से (वि. सं. ८९४ = ई. स. ८३७).
अ इ उ ए क ख ग घ च छ ज ट ड ण त
[बाउक के जोधपुर लेख के स्वर-व्यञ्जन अक्षर]
थ द ध न प फ ब भ म य र ल व श ष स ह
[बाउक के जोधपुर लेख के व्यञ्जन अक्षर]
नृ जा भू क्क क च ङ्क झी ष्ट ङ्क्ष स्थि स्फू ᵡपा ओं.
[बाउक के जोधपुर लेख के संयुक्त अक्षर एवं अन्य रूप]
प्रतिहार ककुक के घटिआला के लेख से (वि. सं. ९१८ = ई. स. ८६१).
अ अ आ इ ई ऊ ओ क झ ड ण भ मे सो क्स.
[ककुक के घटिआला लेख के अक्षर]
ॐ नमो विष्णवे॥ यस्मिन्निदं जगत्-
सर्व्वं धार्य्यतेऽबोधिकेतवे। निर्गुणाय
नमस्तस्मै यः॥ गुणैः पूर्त्तः पुरुषोत्तमः कीर्त्यते यत्-
पदं लिङ्गैः। गुरुकीर्त्तिररण्यश्री मूलाद्रामकरी यतः॥
अतः श्रीबाउक धीमं मुद्यतीश्वरवङ्शजः। यश-
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Here is the line-by-line transcription of the plate:

Plate XXIV. लिपिपत्र २४वां.
जाईकदेव के दानपत्र, विजयपाल के लेख और हस्तलिखित पुस्तक से.
( ई. स. की दसवीं शताब्दी. )
मोरबी से मिले हुए राजा जाईकदेव के दानपत्र से ( गुप्त सं. ५८५ = ई. स. ९०४ )
अ आ इ ई क क ख ग घ च छ ज ट ड ण ण
[वर्णमाला के अक्षर]
ण त त थ द ध ध न प फ ब म म य र र ल ल
[वर्णमाला के अक्षर]
व श श ष स ह ह त् जा पु द्ध गो च्र क्क र्ष्णा ह्म.
[वर्णमाला के अक्षर]
प्रतिहार राजा विजयपाल के समय के अलवर के लेख में ( वि. सं. १०१६ = ई. स. ९५९ ) .
अ आ उ ऐ ख ग घ च कृ ठ ड य य श का च्र ज्ञ औं.
[वर्णमाला के अक्षर]
नेपाल से मिले हुए हस्तलिखित पुस्तक से ( ई. स. की दसवीं शताब्दी के आसपास ).
आ इ ई ऊ ऋ ॠ ऌ

वीं शताब्दी).
4. छिंदवंशी लल्ल के देवल के लेख से (वि. सं. १०४९ = ई. स. ९९२).
5. Modern labels: अ आ ओं ख घ ठ य न फ म श चि ज्ञा र्ष्णा स ओं.
6. Hand-drawn characters: [देवल के प्राचीन अक्षर]
7. धार से मिली हुई शिलाओं पर खुदे हुए राजा भोजरचित 'कूर्मशतक' काव्य से (ई. स. की ११वीं शताब्दी).
8. Modern labels: अ इ ईं ई ऊ ए ओ थ भ था धो क्षो ज्झो त्य ओं
9. Hand-drawn characters: [धार के प्राचीन अक्षर]
10. परमार राजा उदयादित्य के उदयपुर के लेख से (ई. स. की ११वीं शताब्दी).
11. Modern labels: अ इ उ ख ग घ च फ भ य र रू ह च्छि ज्ञा स्त्यू स्वा.
12. Hand-drawn characters: [उदयपुर के प्राचीन अक्षर]
13. उदयादित्य के समय के उज्जैन के लेख के अंत में खुदी हुई पूरी वर्णमाला (ई. स. की ११वीं शताब्दी)
14. Modern labels (vowels): अ आ इ ई उ ऊ ऋ ॠ ऌ ॡ ए ऐ ओ औ ं ः ×
15. Hand-drawn characters: [उज्जैन के प्राचीन स्वर]
16. Modern labels (

Plate XXVI.
लिपिपत्र २६वां.
चंद्रदेव के दानपत्र, हस्तलिखित पुस्तक और जाजल्लदेव के लेख से.
( ई. स. की ११वीं और १२वीं शताब्दी ).
कन्नौज के गाहडवाल राजा चन्द्रदेव के दानपत्र से मुख्य मुख्य अक्षर (वि. सं. ११५४ = ई. स. १०९८).
इ इ ओ घ ध धा सु चा ज्ञा द्वे त्रि र्ष्णा र्थि श्री ष्ण स्तु. म.
[प्राचीन लिपि-अक्षर: इ इ ओ घ ध धा सु चा ज्ञा द्वे त्रि र्ष्णा र्थि श्री ष्ण स्तु . म.]
हस्तलिखित पुस्तकों से मुख्य मुख्य अक्षर ( ई. स. की ११वीं शताब्दी).
अ इ ई ऋ ॠ लृ ॡ ए ऐ ओ ओ औ घ घ क ज झ
[प्राचीन लिपि-अक्षर: अ इ ई ऋ ॠ लृ ॡ ए ऐ ओ ओ औ घ घ क ज झ]
ड ड थ ध फ भ श श स कु दु खूं गृ ह णे गो ङ्ग
[प्राचीन लिपि-अक्षर: ड ड थ ध फ भ श श स कु दु खूं गृ ह णे गो ङ्ग.]
हैहय वंशी राजा जाजल्लदेव के समय के लेख से ( कलचुरि सं. ८६६ = ई. स. १११४).
अ आ इ ई उ ए ऐ क ख ग च ज ट ठ ड ण त थ द
[प्राचीन लिपि-अक्षर: अ आ इ ई उ ए ऐ क ख ग च ज ट ठ ड ण त थ द]
ध न प फ भ भ म य र ल व श ष स ह त् ऽ रु नू
[प्राचीन लिपि-अक्षर: ध न प फ भ भ म य र ल व श ष स ह त् ऽ रु नू]
लै चि च्य च्छ ज्य प्रे ब्धि र्ष्ण ल्ल स्य श्री स्रा. इ. ई.
[प्राचीन लिपि-अक्षर: लै चि च्य च्छ ज्य प्रे ब्धि र्ष्ण ल्ल स्य श्री स्रा. इ. ई.]
तद्वंश्या हिहय आसीद्याताञ्जयत दिहयाः ------------------त्यासन-
प्रिया सती ॥३॥ तेषां दिहयसूनूनां समस्तवदंसे स चेदीश्व-
रः श्रीकोकल्ल इति स्मप्रतिकृतिर्विश्वप्रमोदो यतः। येतायं
वितासोया ---------- मिन मातुं यशः स्वीयं प्रषितमुच्चकैः
कियदि ति ब्रह्मांडमन्तःस्थिति ॥४॥ अत्रादस्यास्य त्रिपुर्कुं तिवि-
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Plate XXVII.

लिपिपत्र २७वां.

परमार धारावर्ष, चाहमान चाचिगदेव और गुहिल समर सिंह के लेखों से.
(ई. स. की १३वीं शताब्दी).
आबू के परमार राजा धारावर्ष के समय के ओरिआ के लेख से (वि. सं. १२६५ = ई. स. १२०८)
अ इ ए ऐ क ख ग घ च ज ट ठ ड ढ ण त थ
अ़ ुँ ए ५ क ख ग घ च ज ट ठ ड ढ ण त थ
य द ध न प भ म य र ल व श ष स ह ह्र त्
य द ध न प भ म य र ल व श ष स ह ह त्
उ रू ने नै क्रि त्त ज्ञ ट्टं त्ता त्र द्ध ध्वां र्ष्णां र्बु श्र स्फ्र
उ रू ने लै क्रि त्त ज्ञ ट्टं त्ता त्र द्ध ध्वां र्ष्णां र्बु श्र स्फ्र
जालौर के चाहमान चाचिगदेव के समय के सूंधा के लेख से (वि. सं. १३२१ = ई. स. १२६४).
इ ए घ छ झ ठ थ ध फ भ ची च्छ ष्ण स्था ४५. ड
इ ए घ छ झ ठ थ ध फ भ ची च्छ ष्ण स्था ४५. ड
मेवाड़ के गुहिलवंशी रावल समरसिंह के समय के चीरवा के लेख से (वि. सं. १३३० = ई. स. १२७३).
अ इ इ उ घ च ज ण थ ध भ श ष स ह सु
अ़ ुँ इ उ घ च ज ण थ ध भ श ष स ह सु
क चि च्छा ष्टे त्यां न त्रि द्व ध्व ग्गि र्ग्य र्ष्णा ष्व स्त्रौ स्थौ स्रां
क चि च्छा ष्टे त्यां न त्रि द्व ध्व ग्गि र्ग्य र्ष्णा ष्व स्त्रौ स्थौ स्रां
संवत् १२६५ वर्षे॥ विशाख शु १५ सोमे॥ चौलुक्य-
वंशाद्धरणपरमभट्टारकमहाराजाधिराजश्रीमद्भीमदेवप्र-
वर्द्धमानविजयराज्ये श्रीकरणे महामुद्रामात्यमहं०-
रतूप्रभृतिसमस्तपंचकुलपरिपंथयति चंद्रावतीनाथश्री-
मंडलिकसुरथं सुश्रीधारावर्षदेव एकांतपत्रवाटकविन

Plate XXVIII. लिपिपत्र २८वां.
सराहां (चंबा राज्य में) से मिली हुई सात्यकि के समय की प्रशस्ति से.
(ई. स. की १०वीं शताब्दी.)
अ आ इ ई उ ए क ख ग च ज ट ठ ण ण त त
[वर्ण-चिह्न / लिप्याकार]
थ द ध ध न न प फ ब ब भ म य र र ल व श ष
[वर्ण-चिह्न / लिप्याकार]
स ह त् त् म् जा टा णा धा ना षा सा कि ची यी गु नु रु
[वर्ण-चिह्न / लिप्याकार]
सु पू भू मू रू सू हृ ले ग्रे दै टो णो यो लो गौ मौ सौ
[वर्ण-चिह्न / लिप्याकार]
चा ङ्क ङ्कु ङ्कृ ङ्क्षि च्छे ष्ट ण्डु त्त त्य त्रा द्या न्द न्दु र्क र्ज र्ण
[वर्ण-चिह्न / लिप्याकार]
र्थ र्ध र्नु र्भ र्य र्यु र्व श्री ष्ठ स्ति स्फु स्स xकि ४प ओं.
[वर्ण-चिह्न / लिप्याकार]
[अभिलेख-पंक्ति १: शारदा लिपि में सराहां प्रशस्ति का मूल पाठ]
[अभिलेख-पंक्ति २: शारदा लिपि में सराहां प्रशस्ति का मूल पाठ]
[अभिलेख-पंक्ति ३: शारदा लिपि में सराहां प्रशस्ति का मूल पाठ]
[अभिलेख-पंक्ति ४: शारदा लिपि में सराहां प्रशस्ति का मूल पाठ]
[अभिलेख-पंक्ति ५: शारदा लिपि में सराहां प्रशस्ति का मूल पाठ]
[अभिलेख-पंक्ति ६: शारदा लिपि में सराहां प्रशस्ति का मूल पाठ]
[अभिलेख-पंक्ति ७: शारदा लिपि में सराहां प्रशस्ति का मूल पाठ]
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Plate XXIX.
लिपिपत्र २९वां.
सुंगल से मिले हुए राजा विदग्ध के दानपत्र से
(ई. स. की ११वीं शताब्दी).
अ आ इ उ ए ए क ख ग ग घ घ च च ऌ ज ट ठ
[अक्षराकार / लिपि-चिह्न]
ड ण त त थ थ द ध न न न प फ फ भ भ म म
[अक्षराकार / लिपि-चिह्न]
य र र ल व व/ब श ष स ह त् म् म् घा जा जा या
[अक्षराकार / लिपि-चिह्न]
पा या हा गि भि णी कु टु मु रू दूः पू भू वृ ह णं
[अक्षराकार / लिपि-चिह्न]
दे मे यो यो यो पौ चि ग्रा ङ्गा ज्ञा ट्टा ड्डा ण्ड ण्य त्य च्त द्य
[अक्षराकार / लिपि-चिह्न]
न्न न्न न्म र्जि र्ण र्थ र्थे र्य र्व ग्र ध्वे स्त स्था स्थि ×कु ४पु ओं.
[अक्षराकार / लिपि-चिह्न]
[अभिलेखीय मूल पाठ - पंक्ति १]
[अभिलेखीय मूल पाठ - पंक्ति २]
[अभिलेखीय मूल पाठ - पंक्ति ३]
[अभिलेखीय मूल पाठ - पंक्ति ४]
[अभिलेखीय मूल पाठ - पंक्ति ५]
[अभिलेखीय मूल पाठ - पंक्ति ६]
[अभिलेखीय मूल पाठ - पंक्ति ७]
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Plate XXX.
लिपिपत्र ३०वां.
भिन्न भिन्न दानपत्रों और शिलालेखों से उद्धृत किये हुए मुख्य मुख्य अक्षर.
(ई. स. की ११वीं से १३वीं शताब्दी तक).
कुलेत से मिले हुए राजा सोमवर्मा के दानपत्र से (ई. स. की ११वीं शताब्दी).
ए च ज ढ ध न फ र दु भु गू दे ब्ध भ्यु र्ज थ्यि थिं र्व्य ष्ण.
[अक्षर-चित्र]
चंबा से मिले हुए सोमवर्मा और आसट के दानपत्र से (ई. स. की ११वीं शताब्दी).
ग च. ण वा ह्र दे ने ह्न ण्डो थ्य न्द गो र्चि र्ठा र्थि द्य ष्ट्रा.
[अक्षर-चित्र]
राजानक नागपाल के देवीरीकोठी के लेख से (ई. स. ११९०).
ख च त ध खा श्रा दी टु बु वै लो सौ क्ष्वा ज्ञा ण्ड स् ४ प.
[अक्षर-चित्र]
आरिगांव के लेख से (ई. स. ११८६).
ण ध स या ना मा कि रू ते क्रे के ग्धो ङ्गे क्षि ओ द्य ष्ठं स्य.
[अक्षर-चित्र]
बैजनाथ (कांगड़े में) के मंदिर की प्रशस्ति से (शक सं. ११२६ = ई. स. १२०४).
ई उ ए ॐ ख फ ब चा नि शो हु वु भू ते यै जो णौ x क.
[अक्षर-चित्र]
[अभिलेख पंक्तियां - शारदा/प्रशस्ति लिपि]
ॐ नमः शिवाय ॥ ...
...
...
...
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Plate XXXI. लिपिपत्र ३१वां.
कुलु के राजा बहादुरसिंह के दानपत्र और हस्तलिखित पुस्तकों से मुख्य मुख्य अक्षर.
(ई. स. की १६वीं शताब्दी).
कुलु के राजा बहादुरसिंह के दानपत्र से (ई. स. १५५९).
ए ओं क च ज त थ म र र श ष डि धि तु दु सु पू
[प्राचीन लिपि के अक्षर]
भू सू दे वि ज्ञा दृ ण्ड चा ध्यो ध्रु त्त्रो प्र र्ता र्म ष्ट्रा स्त्या स्थ.
[प्राचीन लिपि के अक्षर]
अथर्ववेद (पिप्पलादशाखा) की हस्तलिखित पुस्तक से (ई. स. की १६वीं शताब्दी).
अ इ ए च ज द ध न भ य व श ष ह तृ जा था वि तो
[प्राचीन लिपि के अक्षर]
यु रु सू क्र घृ मे ष्णो पौ त्त म्नि चू ध्य न्द्रो भ्रा क्रे द्यं ऴ्की ४ए.
[प्राचीन लिपि के अक्षर]
शाकुंतल नाटक की हस्तलिखित पुस्तक से (ई. स. की १६वीं शताब्दी).
अ आ ई ऊ ऋ ए ऐ ओ औ क ख घ ङ च छ ज झ ञ ड ढ
[प्राचीन लिपि के अक्षर]
ण त थ द ध न प फ ब म य र व श ष स ह टी भू त्त ज्ञा.
[प्राचीन लिपि के अक्षर]
[प्राचीन लिपि पाठ - पंक्ति १]
[प्राचीन लिपि पाठ - पंक्ति २]
[प्राचीन लिपि पाठ - पंक्ति ३]
[प्राचीन लिपि पाठ - पंक्ति ४]
[प्राचीन लिपि पाठ - पंक्ति ५]
CC-0.Dwivedi Lok Hitkari Pustakalaya, Ghaziabad. Digitized by eGangotri

Plate XXXII.
लिपिपत्र ३२वां.
बंगाल के राजा नारायणपाल और विजयसेन के समय के लेखों से.
(ई. स. की १०वीं और ११वीं शताब्दी).
राजा नारायणपाल के समय के बदाल के स्तंभ के लेख से मुख्य मुख्य अक्षर (ई. स. की १०वीं शताब्दी).
अ आ ए ग घ ङ ण फ प्र भ्र त् त् न् धा पु रु श्री सु ऽ
ज जा १ ग घ २ ५ ५ ग भ १ १ न ध पु रु श्री सु ऽ
राजा विजयसेन के समय के देवपारा के लेख से (ई. स. की ११वीं शताब्दी).
अ -आ इ उ ए ओं क ख ग घ च ज ट ड ढ ण
अ आ इ उ ए ॐ क ख ग घ च ज ट ड ढ ण
त थ द ध न प फ भ भ म य र र ल ल व/ब श
त थ द ध न प फ भ भ म य र र ल ल व श
ष स ह त् न् ऽ टा ति दी कु नु रू पु भू रू ह्र
ष स ह त् न् ऽ टा ति दी कु नु रू पु भू रू ह्र
क से मै वै तो रः क्रा चो चां ङ्क च्छा ज्झ ञ्च ण्क
क से मै वै तो रः क्रा चो चां ङ्क च्छा ज्झ ञ्च ण्क
छ्र त्त त्नू त्न त्भ द्गै र्ष्णां र्त्ये ष्ट ष्ठ स्ख स्तर स्थ स्प स्मि ह्ल
छ्र त्त त्नू त्न त्भ द्गै र्ष्णां र्त्ये ष्ट ष्ठ स्ख स्तर स्थ स्प स्मि ह्ल
तस्मिन् सेनान्ववाये व्यतिमिरतरणोत्तालदोद्दण्डवादौ
स वृद्धक्षत्रियाणां धुरि कृतनिलयः सादभूत् सामन्तसे-
नः। उद्योगे यत्प्रदीपाः स्फुटदुरुविरुतोत्तालतालैर्लतागो-
हेषु स्मेराः कपिलामृगयुभिस्ताड्यमाना दरीणां
युद्धोन्माथाः यशोभिः शशिरुचिरुचिरैर्यद्गृहोत्संगशय्यो-
CC-0.Dwivedi Lok Hitkari Pustakalaya, Ghaziabad. Digitzed by eGangotri

? का त्या य नी! Letters: का(kaa)त्या(tyaa)य(ya)नी(nii) Next word: Letters:ध(dha)व(va)ल(la)य(ya)ति(ti)॥(double danda)धवलयति ॥! Next word: एतस्य! Letters: ए(row 1, glyph 8ए: triangle like ए) त(ta)स्य(sya) Next word:वंशकलशेorवंशफलकेorवंशफलके? Letters: व(with anusvara:वं) श(sha)फ(orक? look at कrow 1 glyph 11: loop with crossbar, orफ? wait, फलके? ल के? or कलशे? क ल शे?) Wait, look at Line 3 again: ऽवगत्य? कात्यायनी धवलयति ॥ एतस्य वंश...`
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"कात्यायनी धवलयति"
"कात्याय

Plate XXXIV.
लिपिपत्र ३४वां.
वल्लभेन्द्र के दानपत्र और हस्तलिखित पुस्तकों से.
(ई. स. की १२वीं शताब्दी).
आसाम से मिले हुए वल्लभेन्द्र के दानपत्र से (शक सं. ११०७ = ई. स. ११८५).
अ आ इ उ ए क ख ग च ज झ ट ठ ड ण त थ द
अ आ इ उ ए क ख ग च ज झ ट ठ ड ण त थ द
ध ध न प फ भ म य र र र ल ल व/ब श ष स स
ध ध न प फ भ म य र र र ल ल व श ष स स
ह त टी कु तु मु रू लु पू लू घृ क्रे जु चे ङ्ग क्कु ज्ञे
ह त टी कु तु मु रू लु पू लू घृ क्रे जु चे ङ्ग क्कु ज्ञे
च्छ ङ्गा ण्ड त्तु द्ध द्वि द्रू ण्णी त्यं र्व्व ष्टि ष्ठ ष्णोः स्त स्थे ओं.
च्छ ङ्गा ण्ड त्तु द्ध द्वि द्रू ण्णी त्यं र्व्व ष्टि ष्ठ ष्णोः स्त स्थे ओं.
हस्तलिखित पुस्तकों से मुख्य मुख्य अक्षर (ई, स. की १२वीं शताब्दी).
अ अ आ इ इ ई ई ऊ ऊ ऋ ॠ ऌ ॡ ॡ ॡ ए ऐ
अ अ आ इ इ ई ई ऊ ऊ ऋ ॠ ऌ ॡ ॡ ॡ ए ऐ
ऐ ओ ओ औ ख घ च च ण त भ म र श श स स खा.
ऐ ओ ओ औ ख घ च च ण त भ म र श श स स खा.
१ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ यद्ब्रह्मसङ्कलप-
द्वैपुकल्पनिमाना वदतुिवनीव अद्यन अन्द्र मङ्ग-
लस्य । नत्त्वाद्यचः स द्वगतां यदासी यस्माचमान-
थठां ॐससिना सह यावद्विद्युः ॥ यात्रानद्यत्वन-
उनाथिवमप्रत्येकिन्त्वाद्ध्विद्ध्याः घुनाडु ङ्गवय्युष्टितनाद्युतु-

Plate XXXV.
लिपिपत्र ३५वां.
हझाकोल के लेख और पुरुषोत्तमदेव के दानपत्र से.
(ई. स. की १२वीं और १५वीं शताब्दी).
हझाकोल से मिलेहुए लेख में खुदी हुई पूरी वर्णमाला (ई. स. की १२वीं शताब्दी).
अ आ इ ई उ ऊ ऋ ॠ ऌ ॡ ए ऐ ओ औ अं अः क
[हझाकोल लिपि: अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ऋ, ॠ, ऌ, ॡ, ए, ऐ, ओ, औ, अं, अः, क]
ख ग घ ङ च छ ज झ ञ ट ठ ड ढ ण त थ द
[हझाकोल लिपि: ख, ग, घ, ङ, च, छ, ज, झ, ञ, ट, ठ, ड, ढ, ण, त, थ, द]
ध न प फ ब भ म य र ल व श ष स ह क्ष ओं.
[हझाकोल लिपि: ध, न, प, फ, ब, भ, म, य, र, ल, व, श, ष, स, ह, क्ष, ओं]
उड़ीसा के राजा पुरुषोत्तमदेव के दानपत्र से (ई. स. १४८३).
अ उ ए क ग च ज ट ड ण त थ द ध न प भ
[ओड़िआ लिपि: अ, उ, ए, क, ग, च, ज, ट, ड, ण, त, थ, द, ध, न, प, भ]
म य र र ल व श ष स ह ह जा रा टि ति वी दु
[ओड़िआ लिपि: म, य, र, र, ल, व, श, ष, स, ह, ह, जा, रा, टि, ति, वी, दु]
पु रुं भू सू वृ डे षो पौ क्र त्त ङ्क श्च ञ्च र्गा म्हैं.
[ओड़िआ लिपि: पु, रुं, भू, सू, वृ, डे, षो, पौ, क्र, त्त, ङ्क, श्च, ञ्च, र्गा, म्हैं]
ଶ୍ରୀ ଦୁର୍ଗା ଦୁର୍ଗ୍ଗାୟୈ ନମଃ । ବୀର ଶ୍ରୀଗଜପତି (श्री दुर्गा दुर्ग्गायै नमः। वीर श्रीगजपति)
ଗଉଡ଼େଶ୍ୱର ନବକୋଟିକର୍ଣ୍ଣାଟକଲବର୍ଗ୍ଗେଶ୍ୱର (गउडेश्वर नवकोटिकर्णाटकलबर्ग्गेश्वर)
ଶ୍ରୀପୁରୁଷୋତ୍ତମଦେବ ମହାରାଜାଙ୍କର । ପୋଟେ- (श्रीपुरुषोत्तमदेव महाराजाङ्कर । पोटे-)
ଶ୍ୱର ଭଟଙ୍କୁ ଦାନ ଶାସନ ପଟା । ୨ x (श्वर भटङ्कु दान शासन पटा । २ x)
ଅଙ୍କ ମେଷ ଦି ୧୦ ଗୁଂ ସୋମବାର ଗ୍ରହଣ- (अङ्क मेष दि १० गुं सोमबार ग्रहण-)
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Plate XXXVI. लिपिपत्र ३६वां.
राजा नरवर्मन् और कुमारगुप्त के समय के मंदसौर के लेखों से
(ई. स. की पांचवीं शताब्दी).
राजा नरवर्मन् के समय के मंदसौर के लेख से (मालव सं. ४६१ = ई. स. ४०४).
आ ई ए क क ख ग घ च च ज ट ण त त त थ थ
य द ध न न प फ ब भ भ म य य र र ल व व
श श ष स स ह म् णा मा शा षा नि ति लि जी नी गु
तु पु रु रू सु मू क्त क्व वृ नृ घे ने मे ले तो नो ष्णो लो
पो कु वि ङ्ग ङ्ख ङ्गि द्धा ङ्क द्रा र्त्य र्थ्य र्ब्ब त्री द्ये ष्ण स्ते स्र.
गुप्तवंशी राजा कुमारगुप्त के समय के मंदसौर के लेख से (वि. सं. ५२८ = ई. स. ४७२).
इ ग ज ड ढ द ध फ ब भ ल व ष दी रू बू भू ष्ण ज्ञ.
सिद्धं मालवानां गणस्थित्या याते शतचतुष्टये एक-
षष्ट्यधिकेऽब्दानां सप्रौढे पार्थिवर्षभे श्रीनरवर्म्मणि ख्यात-
पौरुषे नृपसत्तमे तत्पितुः पृथुकल्पस्य नृपतेः पृथुविक्रमः
यः श्रुतौ शौचे विनये चात्मनि स्थितः सत्यसंधो दयालोलु-
पुत्रेण विक्रुष्टास्तु यन्मुणां...
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?
Wait, let's look at label 13:
It is न् or म्?
Wait, what is 14?
Glyph 14: look at glyph 14: it has a स with an े... wait!
Look at glyph 14:
It is a स with a top stroke, a curve... wait, is it सेन्?
Wait, look at label 14:
The letters are: स े न्? सेन्!
Wait, why सेन्?
Because in Dharasena's plate, the name is धरसेन or ध्रुवसेन!
Wait! Look at the inscription at the bottom:
Line 1 of inscription:
Line 2 of inscription:
Line 3 of inscription:
Line 4 of inscription:
Line 5: ... धरसेनस्य!
Wait, is सेन् from सेनस्य? Or से with final न्?
Wait, look at the glyph under सेन्:
It has स + े + a final न् attached to it!
And label 14 is सेन्!
Wait, what is label 13?
Look at label 13: शत् or म् or न्?
Wait, look at the label 13:
Is it `न्

Plate XXXVIII.
लिपिपत्र ३८वां.
गारुलक सिंहादित्य और वलभी के राजा शीलादित्य (पांचवें) के दानपत्रों से.
(ई. स. की छठी और आठवीं शताब्दी).
पालिताना से मिले हुए गारुलक सिंहादित्य के दानपत्र से (गुप्त सं. २५५ = ई. स. ५७४).
आ इ उ य द ध फ ब ल व स ह न् षा हा भि री गु
[प्राचीन लिपि चिह्न]
नु ग्ये मै यो ची डु च्छे ज्ञा ण्य प्र र्ष्णा र्त्य र्म्मा औ स्थ × को ४ पु.
[प्राचीन लिपि चिह्न]
वलभी के राजा शीलादित्य (पांचवें) के दानपत्र से (गुप्त सं. ४०३ = ई. स. ७२२).
आ इ उ ए ऐ क ख ख ग च च ज ट ठ ड ड ढ ण
[प्राचीन लिपि चिह्न]
त त थ थ द ध्र ध ध न न प प फ ब व भ भ म य
[प्राचीन लिपि चिह्न]
र र ल ल ल ल ल व व श ष स ह त् त् वा रा मि
[प्राचीन लिपि चिह्न]
णी ङ्क रु भृ मै मौ च्य द्य ङ्का ङ्कि ञ्च ष्ट्रा ण्ड म्य र्त्थ न्थि ज्ञ.
[प्राचीन लिपि चिह्न]
[दानपत्र-अभिलेख का नमूना - पंक्ति १]
[दानपत्र-अभिलेख का नमूना - पंक्ति २]
[दानपत्र-अभिलेख का नमूना - पंक्ति ३]
[दानपत्र-अभिलेख का नमूना - पंक्ति ४]
[दानपत्र-अभिलेख का नमूना - पंक्ति ५]
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Plate XXXIX.
लिपिपत्र ३६वां.
त्रैकूटक वंशी राजा दह्रसेन और गुर्जर वंशी रणग्रह तथा दद्द (दूसरे) के दानपत्रों से.
(ई. स. की पांचवीं और सातवीं शताब्दी).
पारडी से मिले हुए त्रैकूटक वंशी राजा दह्रसेन के दानपत्र से (कलचुरि सं. २०७ = ई. स. ४५६).
अ आ इ क ख ग च ज ट ण त य द ध न प भ भ म
𑀅 𑀆 𑀇 𑀓 𑀔 𑀕 𑀘 𑀚 𑀝 𑀡 𑀢 𑀬 𑀤 𑀥 𑀦 𑀧 𑀪 𑀪 𑀫
च र व श ष स ह ह्र रा लि गु वु दू भू 'ये पौ ज्ञा ण्ड.
𑀘 𑀭 𑀯 𑀰 𑀱 𑀲 𑀳 𑀳𑁆𑀭 𑀭𑀸 𑀮𑀺 𑀕𑀼 𑀯𑀼 𑀤𑀽 𑀪𑀽 '𑀬𑁂 𑀧𑁅 𑀚𑁆𑀜 𑀡𑁆𑀟𑀂
संखेडा से मिले हुए गुर्जरवंशी रणग्रह के दानपत्र से (कलचुरि सं. ३६१ = ई. स. ६१०).
अ आ इ उ ए क ख ग च ट ण त द न प ब व भ म
𑀅 𑀆 𑀇 𑀉 𑀏 𑀓 𑀔 𑀕 𑀘 𑀝 𑀡 𑀢 𑀤 𑀦 𑀧 𑀩 𑀯 𑀪 𑀫
य र ल व ष स ह जा धु दू वै यो द्य द्वै च्छि ज्ञा ज्ञ त्य श्री.
𑀬 𑀭 𑀮 𑀯 𑀱 𑀲 𑀳 𑀚𑀸 𑀥𑀼 𑀤𑀽 𑀯𑁃 𑀬𑁄 𑀤𑁆𑀬 𑀤𑁆𑀯𑁃 𑀘𑁆𑀙𑀺 𑀚𑁆𑀜𑀸 𑀚𑁆𑀜 𑀢𑁆𑀬 𑀰𑁆𑀭𑀻.
संखेडा से मिले हुए गुर्जर वंशी राजा दद्द (दूसरे) के दानपत्र से (कलचुरि सं. ३९२ = ई. स. ६४१)
अ आ इ उ ख घ च ज ट ण ण त य द ध फ व भ म र
𑀅 𑀆 𑀇 𑀉 𑀔 𑀖 𑀘 𑀚 𑀝 𑀡 𑀡 𑀢 𑀬 𑀤 𑀥 𑀨 𑀯 𑀪 𑀫 𑀭
ल ल व स क्क ङ्क च्छ ज्ञा ञ ञ ण्ड न्या द्धौ न्नि ण्णां स्य ऴ्कुं.
𑀮 𑀮 𑀯 𑀲 𑀓𑁆𑀓 𑀗𑁆𑀓 𑀘𑁆𑀙 𑀚𑁆𑀜𑀸 𑀜 𑀜 𑀡𑁆𑀟 𑀦𑁆𑀬𑀸 𑀤𑁆𑀥𑁅 𑀦𑁆𑀦𑀺 𑀡𑁆𑀡𑀸𑀁 𑀲𑁆𑀬 𑀴𑁆𑀓𑀼𑀁
[चित्रित प्राचीन अभिलेख पंक्ति १]
[चित्रित प्राचीन अभिलेख पंक्ति २]
[चित्रित प्राचीन अभिलेख पंक्ति ३]
[चित्रित प्राचीन अभिलेख पंक्ति ४]
[चित्रित प्राचीन अभिलेख पंक्ति ५]
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Plate XL. लिपिपत्र ४०वां.
चालुक्य युवराज श्रयाश्रय (शीलादित्य) और राष्ट्रकूट कर्कराज के दानपत्रों से.
(ई. स. की सातवीं और नवीं शताब्दी.)
नवसारी से मिले हुए चालुक्य युवराज श्रयाश्रय (शीलादित्य) के दानपत्र से (कलचुरि सं. ४२१ = ई. स. ६७०).
अ आ उ ए क ख च ज ण त थ द ध न प फ व भ म य
[उपर्युक्त अक्षरों के तत्कालीन लिपि-रूप]
ल ल व श ष स ह न् री कृ त्त ङ्ख ङ्क ष्टि ण्ड नः ध्व र्त्यु क्ष.
[उपर्युक्त अक्षरों के तत्कालीन लिपि-रूप]
गुजरात के राष्ट्रकूट राजा कर्कराज (सुवर्णवर्ष) के दानपत्र से (शक सं. ७३४ = ई. स. ८१२).
अ आ इ उ ए क ख ख ग घ च च ळ ज ट ट ड ण त
[उपर्युक्त अक्षरों के तत्कालीन लिपि-रूप]
त थ थ द ध ध न प फ ब व भ भ म य र ल ल व
[उपर्युक्त अक्षरों के तत्कालीन लिपि-रूप]
श श ष स ह ह त् न् का पा मा भि की धी लु कू गू ळ
[उपर्युक्त अक्षरों के तत्कालीन लिपि-रूप]
दृ ये र यो वो न्धा ङ्गि ज्ञा द्य ण्डू र्त्य क्ष व्य औ ठ स्थि स्त्री.
[उपर्युक्त अक्षरों के तत्कालीन लिपि-रूप]
[अभिलेख-नमूना पंक्ति १:] ॐ स जयत्याविष्कृतं रूपं वारहं क्षोभितार्णवं । दक्षि-
[अभिलेख-नमूना पंक्ति २:] णोन्नतदंष्ट्राग्र विश्रान्तभुवनं वपुः ॥ श्रीमान् भुवि स-
[अभिलेख-नमूना पंक्ति ३:] र्व्वजनस्तवनार्हः क्षितिपकुलतिलकः सकलगुणगण-
[अभिलेख-नमूना पंक्ति ४:] मणिरत्ननिधानं प्रथितयशः प्रसरविजित-
[अभिलेख-नमूना पंक्ति ५:] -तिमिरनिकरः परममाहेश्वरः श्रीसुवर्णवर्षस्य
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