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सर्वकोश
प्राचीन भारतीय लिपिमाला (महामहोपाध्याय गौरीशंकर हीराचन्द ओझा - लिपि-विज्ञान व कूट-पठन)

प्राचीन भारतीय लिपिमाला (महामहोपाध्याय गौरीशंकर हीराचन्द ओझा - लिपि-विज्ञान व कूट-पठन)

The Paleography of India by G.H. Ojha

रायबहादुर पण्डित गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा

DevanagariHindipublished318 पृष्ठ

पृष्ठ 254, कुल 318 में से

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पृष्ठ 254

Plate XXVII.

लिपिपत्र २७वां.

परमार धारावर्ष, चाहमान चाचिगदेव और गुहिल समर सिंह के लेखों से.
(ई. स. की १३वीं शताब्दी).
आबू के परमार राजा धारावर्ष के समय के ओरिआ के लेख से (वि. सं. १२६५ = ई. स. १२०८)
अ इ ए ऐ क ख ग घ च ज ट ठ ड ढ ण त थ
अ़ ुँ ए ५ क ख ग घ च ज ट ठ ड ढ ण त थ
य द ध न प भ म य र ल व श ष स ह ह्र त्
य द ध न प भ म य र ल व श ष स ह ह त्
उ रू ने नै क्रि त्त ज्ञ ट्टं त्ता त्र द्ध ध्वां र्ष्णां र्बु श्र स्फ्र
उ रू ने लै क्रि त्त ज्ञ ट्टं त्ता त्र द्ध ध्वां र्ष्णां र्बु श्र स्फ्र
जालौर के चाहमान चाचिगदेव के समय के सूंधा के लेख से (वि. सं. १३२१ = ई. स. १२६४).
इ ए घ छ झ ठ थ ध फ भ ची च्छ ष्ण स्था ४५. ड
इ ए घ छ झ ठ थ ध फ भ ची च्छ ष्ण स्था ४५. ड
मेवाड़ के गुहिलवंशी रावल समरसिंह के समय के चीरवा के लेख से (वि. सं. १३३० = ई. स. १२७३).
अ इ इ उ घ च ज ण थ ध भ श ष स ह सु
अ़ ुँ इ उ घ च ज ण थ ध भ श ष स ह सु
क चि च्छा ष्टे त्यां न त्रि द्व ध्व ग्गि र्ग्य र्ष्णा ष्व स्त्रौ स्थौ स्रां
क चि च्छा ष्टे त्यां न त्रि द्व ध्व ग्गि र्ग्य र्ष्णा ष्व स्त्रौ स्थौ स्रां
संवत् १२६५ वर्षे॥ विशाख शु १५ सोमे॥ चौलुक्य-
वंशाद्धरणपरमभट्टारकमहाराजाधिराजश्रीमद्भीमदेवप्र-
वर्द्धमानविजयराज्ये श्रीकरणे महामुद्रामात्यमहं०-
रतूप्रभृतिसमस्तपंचकुलपरिपंथयति चंद्रावतीनाथश्री-
मंडलिकसुरथं सुश्रीधारावर्षदेव एकांतपत्रवाटकविन