प्राचीन भारतीय लिपिमाला (महामहोपाध्याय गौरीशंकर हीराचन्द ओझा - लिपि-विज्ञान व कूट-पठन)
The Paleography of India by G.H. Ojha
रायबहादुर पण्डित गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा
पृष्ठ 258, कुल 318 में से
संदर्भ में पढ़ेंPlate XXXI. लिपिपत्र ३१वां.
कुलु के राजा बहादुरसिंह के दानपत्र और हस्तलिखित पुस्तकों से मुख्य मुख्य अक्षर.
(ई. स. की १६वीं शताब्दी).
कुलु के राजा बहादुरसिंह के दानपत्र से (ई. स. १५५९).
ए ओं क च ज त थ म र र श ष डि धि तु दु सु पू
[प्राचीन लिपि के अक्षर]
भू सू दे वि ज्ञा दृ ण्ड चा ध्यो ध्रु त्त्रो प्र र्ता र्म ष्ट्रा स्त्या स्थ.
[प्राचीन लिपि के अक्षर]
अथर्ववेद (पिप्पलादशाखा) की हस्तलिखित पुस्तक से (ई. स. की १६वीं शताब्दी).
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[प्राचीन लिपि के अक्षर]
यु रु सू क्र घृ मे ष्णो पौ त्त म्नि चू ध्य न्द्रो भ्रा क्रे द्यं ऴ्की ४ए.
[प्राचीन लिपि के अक्षर]
शाकुंतल नाटक की हस्तलिखित पुस्तक से (ई. स. की १६वीं शताब्दी).
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[प्राचीन लिपि के अक्षर]
ण त थ द ध न प फ ब म य र व श ष स ह टी भू त्त ज्ञा.
[प्राचीन लिपि के अक्षर]
[प्राचीन लिपि पाठ - पंक्ति १]
[प्राचीन लिपि पाठ - पंक्ति २]
[प्राचीन लिपि पाठ - पंक्ति ३]
[प्राचीन लिपि पाठ - पंक्ति ४]
[प्राचीन लिपि पाठ - पंक्ति ५]
CC-0.Dwivedi Lok Hitkari Pustakalaya, Ghaziabad. Digitized by eGangotri