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सर्वकोश
प्राचीन भारतीय लिपिमाला (महामहोपाध्याय गौरीशंकर हीराचन्द ओझा - लिपि-विज्ञान व कूट-पठन)

प्राचीन भारतीय लिपिमाला (महामहोपाध्याय गौरीशंकर हीराचन्द ओझा - लिपि-विज्ञान व कूट-पठन)

The Paleography of India by G.H. Ojha

रायबहादुर पण्डित गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा

DevanagariHindipublished318 पृष्ठ

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पृष्ठ 263

Plate XXXVI. लिपिपत्र ३६वां.
राजा नरवर्मन् और कुमारगुप्त के समय के मंदसौर के लेखों से
(ई. स. की पांचवीं शताब्दी).
राजा नरवर्मन् के समय के मंदसौर के लेख से (मालव सं. ४६१ = ई. स. ४०४).
आ ई ए क क ख ग घ च च ज ट ण त त त थ थ
य द ध न न प फ ब भ भ म य य र र ल व व
श श ष स स ह म् णा मा शा षा नि ति लि जी नी गु
तु पु रु रू सु मू क्त क्व वृ नृ घे ने मे ले तो नो ष्णो लो
पो कु वि ङ्ग ङ्ख ङ्गि द्धा ङ्क द्रा र्त्य र्थ्य र्ब्ब त्री द्ये ष्ण स्ते स्र.
गुप्तवंशी राजा कुमारगुप्त के समय के मंदसौर के लेख से (वि. सं. ५२८ = ई. स. ४७२).
इ ग ज ड ढ द ध फ ब भ ल व ष दी रू बू भू ष्ण ज्ञ.
सिद्धं मालवानां गणस्थित्या याते शतचतुष्टये एक-
षष्ट्यधिकेऽब्दानां सप्रौढे पार्थिवर्षभे श्रीनरवर्म्मणि ख्यात-
पौरुषे नृपसत्तमे तत्पितुः पृथुकल्पस्य नृपतेः पृथुविक्रमः
यः श्रुतौ शौचे विनये चात्मनि स्थितः सत्यसंधो दयालोलु-
पुत्रेण विक्रुष्टास्तु यन्मुणां...
CC-0.Dwivedi Lok Hitkari Pustakalaya, Ghaziabad. Digitized by eGangotri