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सर्वकोश
प्राचीन भारतीय लिपिमाला (महामहोपाध्याय गौरीशंकर हीराचन्द ओझा - लिपि-विज्ञान व कूट-पठन)

प्राचीन भारतीय लिपिमाला (महामहोपाध्याय गौरीशंकर हीराचन्द ओझा - लिपि-विज्ञान व कूट-पठन)

The Paleography of India by G.H. Ojha

रायबहादुर पण्डित गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा

DevanagariHindipublished318 पृष्ठ

पृष्ठ 267, कुल 318 में से

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पृष्ठ 267

Plate XL. लिपिपत्र ४०वां.
चालुक्य युवराज श्रयाश्रय (शीलादित्य) और राष्ट्रकूट कर्कराज के दानपत्रों से.
(ई. स. की सातवीं और नवीं शताब्दी.)
नवसारी से मिले हुए चालुक्य युवराज श्रयाश्रय (शीलादित्य) के दानपत्र से (कलचुरि सं. ४२१ = ई. स. ६७०).
अ आ उ ए क ख च ज ण त थ द ध न प फ व भ म य
[उपर्युक्त अक्षरों के तत्कालीन लिपि-रूप]
ल ल व श ष स ह न् री कृ त्त ङ्ख ङ्क ष्टि ण्ड नः ध्व र्त्यु क्ष.
[उपर्युक्त अक्षरों के तत्कालीन लिपि-रूप]
गुजरात के राष्ट्रकूट राजा कर्कराज (सुवर्णवर्ष) के दानपत्र से (शक सं. ७३४ = ई. स. ८१२).
अ आ इ उ ए क ख ख ग घ च च ळ ज ट ट ड ण त
[उपर्युक्त अक्षरों के तत्कालीन लिपि-रूप]
त थ थ द ध ध न प फ ब व भ भ म य र ल ल व
[उपर्युक्त अक्षरों के तत्कालीन लिपि-रूप]
श श ष स ह ह त् न् का पा मा भि की धी लु कू गू ळ
[उपर्युक्त अक्षरों के तत्कालीन लिपि-रूप]
दृ ये र यो वो न्धा ङ्गि ज्ञा द्य ण्डू र्त्य क्ष व्य औ ठ स्थि स्त्री.
[उपर्युक्त अक्षरों के तत्कालीन लिपि-रूप]
[अभिलेख-नमूना पंक्ति १:] ॐ स जयत्याविष्कृतं रूपं वारहं क्षोभितार्णवं । दक्षि-
[अभिलेख-नमूना पंक्ति २:] णोन्नतदंष्ट्राग्र विश्रान्तभुवनं वपुः ॥ श्रीमान् भुवि स-
[अभिलेख-नमूना पंक्ति ३:] र्व्वजनस्तवनार्हः क्षितिपकुलतिलकः सकलगुणगण-
[अभिलेख-नमूना पंक्ति ४:] मणिरत्ननिधानं प्रथितयशः प्रसरविजित-
[अभिलेख-नमूना पंक्ति ५:] -तिमिरनिकरः परममाहेश्वरः श्रीसुवर्णवर्षस्य
CC-0.Dwivedi Lok Hitkari Pustakalaya, Ghaziabad. Digitzed by eGangotri