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सर्वकोश
प्राचीन भारतीय लिपिमाला (महामहोपाध्याय गौरीशंकर हीराचन्द ओझा - लिपि-विज्ञान व कूट-पठन)

प्राचीन भारतीय लिपिमाला (महामहोपाध्याय गौरीशंकर हीराचन्द ओझा - लिपि-विज्ञान व कूट-पठन)

The Paleography of India by G.H. Ojha

रायबहादुर पण्डित गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा

DevanagariHindipublished318 पृष्ठ

पृष्ठ 257, कुल 318 में से

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पृष्ठ 257

Plate XXX.
लिपिपत्र ३०वां.
भिन्न भिन्न दानपत्रों और शिलालेखों से उद्धृत किये हुए मुख्य मुख्य अक्षर.
(ई. स. की ११वीं से १३वीं शताब्दी तक).
कुलेत से मिले हुए राजा सोमवर्मा के दानपत्र से (ई. स. की ११वीं शताब्दी).
ए च ज ढ ध न फ र दु भु गू दे ब्ध भ्यु र्ज थ्यि थिं र्व्य ष्ण.
[अक्षर-चित्र]
चंबा से मिले हुए सोमवर्मा और आसट के दानपत्र से (ई. स. की ११वीं शताब्दी).
ग च. ण वा ह्र दे ने ह्न ण्डो थ्य न्द गो र्चि र्ठा र्थि द्य ष्ट्रा.
[अक्षर-चित्र]
राजानक नागपाल के देवीरीकोठी के लेख से (ई. स. ११९०).
ख च त ध खा श्रा दी टु बु वै लो सौ क्ष्वा ज्ञा ण्ड स् ४ प.
[अक्षर-चित्र]
आरिगांव के लेख से (ई. स. ११८६).
ण ध स या ना मा कि रू ते क्रे के ग्धो ङ्गे क्षि ओ द्य ष्ठं स्य.
[अक्षर-चित्र]
बैजनाथ (कांगड़े में) के मंदिर की प्रशस्ति से (शक सं. ११२६ = ई. स. १२०४).
ई उ ए ॐ ख फ ब चा नि शो हु वु भू ते यै जो णौ x क.
[अक्षर-चित्र]
[अभिलेख पंक्तियां - शारदा/प्रशस्ति लिपि]
ॐ नमः शिवाय ॥ ...
...
...
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CC-0.Dwivedi Lok Hitkari Pustakalaya, Ghaziabad. Digitzed by eGangotri