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सर्वकोश
प्राचीन भारतीय लिपिमाला (महामहोपाध्याय गौरीशंकर हीराचन्द ओझा - लिपि-विज्ञान व कूट-पठन)

प्राचीन भारतीय लिपिमाला (महामहोपाध्याय गौरीशंकर हीराचन्द ओझा - लिपि-विज्ञान व कूट-पठन)

The Paleography of India by G.H. Ojha

रायबहादुर पण्डित गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा

DevanagariHindipublished318 पृष्ठ

पृष्ठ 253, कुल 318 में से

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पृष्ठ 253

Plate XXVI.
लिपिपत्र २६वां.
चंद्रदेव के दानपत्र, हस्तलिखित पुस्तक और जाजल्लदेव के लेख से.
( ई. स. की ११वीं और १२वीं शताब्दी ).
कन्नौज के गाहडवाल राजा चन्द्रदेव के दानपत्र से मुख्य मुख्य अक्षर (वि. सं. ११५४ = ई. स. १०९८).
इ इ ओ घ ध धा सु चा ज्ञा द्वे त्रि र्ष्णा र्थि श्री ष्ण स्तु. म.
[प्राचीन लिपि-अक्षर: इ इ ओ घ ध धा सु चा ज्ञा द्वे त्रि र्ष्णा र्थि श्री ष्ण स्तु . म.]
हस्तलिखित पुस्तकों से मुख्य मुख्य अक्षर ( ई. स. की ११वीं शताब्दी).
अ इ ई ऋ ॠ लृ ॡ ए ऐ ओ ओ औ घ घ क ज झ
[प्राचीन लिपि-अक्षर: अ इ ई ऋ ॠ लृ ॡ ए ऐ ओ ओ औ घ घ क ज झ]
ड ड थ ध फ भ श श स कु दु खूं गृ ह णे गो ङ्ग
[प्राचीन लिपि-अक्षर: ड ड थ ध फ भ श श स कु दु खूं गृ ह णे गो ङ्ग.]
हैहय वंशी राजा जाजल्लदेव के समय के लेख से ( कलचुरि सं. ८६६ = ई. स. १११४).
अ आ इ ई उ ए ऐ क ख ग च ज ट ठ ड ण त थ द
[प्राचीन लिपि-अक्षर: अ आ इ ई उ ए ऐ क ख ग च ज ट ठ ड ण त थ द]
ध न प फ भ भ म य र ल व श ष स ह त् ऽ रु नू
[प्राचीन लिपि-अक्षर: ध न प फ भ भ म य र ल व श ष स ह त् ऽ रु नू]
लै चि च्य च्छ ज्य प्रे ब्धि र्ष्ण ल्ल स्य श्री स्रा. इ. ई.
[प्राचीन लिपि-अक्षर: लै चि च्य च्छ ज्य प्रे ब्धि र्ष्ण ल्ल स्य श्री स्रा. इ. ई.]
तद्वंश्या हिहय आसीद्याताञ्जयत दिहयाः ------------------त्यासन-
प्रिया सती ॥३॥ तेषां दिहयसूनूनां समस्तवदंसे स चेदीश्व-
रः श्रीकोकल्ल इति स्मप्रतिकृतिर्विश्वप्रमोदो यतः। येतायं
वितासोया ---------- मिन मातुं यशः स्वीयं प्रषितमुच्चकैः
कियदि ति ब्रह्मांडमन्तःस्थिति ॥४॥ अत्रादस्यास्य त्रिपुर्कुं तिवि-
CC-0.Dwivedi Lok Hitkari Pustakalaya, Ghaziabad. Digitized by eGangotri