प्राचीन भारतीय लिपिमाला (महामहोपाध्याय गौरीशंकर हीराचन्द ओझा - लिपि-विज्ञान व कूट-पठन)
The Paleography of India by G.H. Ojha
रायबहादुर पण्डित गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा
पृष्ठ 248, कुल 318 में से
संदर्भ में पढ़ेंPlate XXI.
लिपिपत्र २१वां.
राजा हर्ष के दानपत्र तथा राजा अंशुवर्मा, दुर्गगण आदि के लेखों से.
(ई. स. की सातवीं और आठवीं शताब्दी).
बांसखेड़ा से मिले हुए राजा हर्ष के दानपत्र से मुख्य मुख्य अक्षर (हर्ष सं. २२ = ई. स. ६२८).
ए च ट थ ह को द्वा ण्ड प्प ४ प्र. घ म रा हा श्री.
[प्राचीन लिपि के अक्षर]
नेपाल के राजा अंशुवर्मा के लेख से मुख्य मुख्य अक्षर (हर्ष सं. ३६ = ई. स. ६४५).
ट ड य ध ब भ य ष स द्ध चि ज्ञा त्पू य्या र्मा स्प्रि ष्ठा खि.
[प्राचीन लिपि के अक्षर]
राजा दुर्गगण के झालरापाटन के लेख से मुख्य मुख्य अक्षर (वि. सं. ७४६ = ई. स. ६८९).
अ आ इ उ ए क ख ग घ च ज ट ण त थ ध
[प्राचीन लिपि के अक्षर]
यं द धन फ भ य ल दुः रु पू ज्ञा त्यं र्यी र्य x क ओं.
[प्राचीन लिपि के अक्षर]
कुदारकोट के लेख से मुख्य मुख्य अक्षर (ई. स. की सातवीं शताब्दी).
अ अ आ उ ए ऐ औ कृ य ह ना या च चि या स्यै त न.
[प्राचीन लिपि के अक्षर]
राजा शिवगण के कोटा के लेख से मुख्य मुख्य अक्षर (वि. सं. ७९५ = ई. स. ७३८).
अ अ उ क घ घ ज झ य म रु जू धू रू च ब्द त्.
[प्राचीन लिपि के अक्षर]
ॐ नमः शिवाय ॐ नमः सकलसंसारसंता
नांतहेतवे। दशैकादशसंख्याय नमः
स्तेभ्यो धनुकार्बूदिदसिनेरिपुपदैः परैर्द्देवेन्युत्से-
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