प्राचीन भारतीय लिपिमाला (महामहोपाध्याय गौरीशंकर हीराचन्द ओझा - लिपि-विज्ञान व कूट-पठन)
The Paleography of India by G.H. Ojha
रायबहादुर पण्डित गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा
पृष्ठ 265, कुल 318 में से
संदर्भ में पढ़ेंPlate XXXVIII.
लिपिपत्र ३८वां.
गारुलक सिंहादित्य और वलभी के राजा शीलादित्य (पांचवें) के दानपत्रों से.
(ई. स. की छठी और आठवीं शताब्दी).
पालिताना से मिले हुए गारुलक सिंहादित्य के दानपत्र से (गुप्त सं. २५५ = ई. स. ५७४).
आ इ उ य द ध फ ब ल व स ह न् षा हा भि री गु
[प्राचीन लिपि चिह्न]
नु ग्ये मै यो ची डु च्छे ज्ञा ण्य प्र र्ष्णा र्त्य र्म्मा औ स्थ × को ४ पु.
[प्राचीन लिपि चिह्न]
वलभी के राजा शीलादित्य (पांचवें) के दानपत्र से (गुप्त सं. ४०३ = ई. स. ७२२).
आ इ उ ए ऐ क ख ख ग च च ज ट ठ ड ड ढ ण
[प्राचीन लिपि चिह्न]
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[प्राचीन लिपि चिह्न]
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[प्राचीन लिपि चिह्न]
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[प्राचीन लिपि चिह्न]
[दानपत्र-अभिलेख का नमूना - पंक्ति १]
[दानपत्र-अभिलेख का नमूना - पंक्ति २]
[दानपत्र-अभिलेख का नमूना - पंक्ति ३]
[दानपत्र-अभिलेख का नमूना - पंक्ति ४]
[दानपत्र-अभिलेख का नमूना - पंक्ति ५]
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