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सर्वकोश
प्राचीन भारतीय लिपिमाला (महामहोपाध्याय गौरीशंकर हीराचन्द ओझा - लिपि-विज्ञान व कूट-पठन)

प्राचीन भारतीय लिपिमाला (महामहोपाध्याय गौरीशंकर हीराचन्द ओझा - लिपि-विज्ञान व कूट-पठन)

The Paleography of India by G.H. Ojha

रायबहादुर पण्डित गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा

DevanagariHindipublished318 पृष्ठ

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पृष्ठ 259

Plate XXXII.
लिपिपत्र ३२वां.
बंगाल के राजा नारायणपाल और विजयसेन के समय के लेखों से.
(ई. स. की १०वीं और ११वीं शताब्दी).
राजा नारायणपाल के समय के बदाल के स्तंभ के लेख से मुख्य मुख्य अक्षर (ई. स. की १०वीं शताब्दी).
अ आ ए ग घ ङ ण फ प्र भ्र त् त् न् धा पु रु श्री सु ऽ
ज जा १ ग घ २ ५ ५ ग भ १ १ न ध पु रु श्री सु ऽ
राजा विजयसेन के समय के देवपारा के लेख से (ई. स. की ११वीं शताब्दी).
अ -आ इ उ ए ओं क ख ग घ च ज ट ड ढ ण
अ आ इ उ ए ॐ क ख ग घ च ज ट ड ढ ण
त थ द ध न प फ भ भ म य र र ल ल व/ब श
त थ द ध न प फ भ भ म य र र ल ल व श
ष स ह त् न् ऽ टा ति दी कु नु रू पु भू रू ह्र
ष स ह त् न् ऽ टा ति दी कु नु रू पु भू रू ह्र
क से मै वै तो रः क्रा चो चां ङ्क च्छा ज्झ ञ्च ण्क
क से मै वै तो रः क्रा चो चां ङ्क च्छा ज्झ ञ्च ण्क
छ्र त्त त्नू त्न त्भ द्गै र्ष्णां र्त्ये ष्ट ष्ठ स्ख स्तर स्थ स्प स्मि ह्ल
छ्र त्त त्नू त्न त्भ द्गै र्ष्णां र्त्ये ष्ट ष्ठ स्ख स्तर स्थ स्प स्मि ह्ल
तस्मिन् सेनान्ववाये व्यतिमिरतरणोत्तालदोद्दण्डवादौ
स वृद्धक्षत्रियाणां धुरि कृतनिलयः सादभूत् सामन्तसे-
नः। उद्योगे यत्प्रदीपाः स्फुटदुरुविरुतोत्तालतालैर्लतागो-
हेषु स्मेराः कपिलामृगयुभिस्ताड्यमाना दरीणां
युद्धोन्माथाः यशोभिः शशिरुचिरुचिरैर्यद्गृहोत्संगशय्यो-
CC-0.Dwivedi Lok Hitkari Pustakalaya, Ghaziabad. Digitzed by eGangotri