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सर्वकोश
प्राचीन भारतीय लिपिमाला (महामहोपाध्याय गौरीशंकर हीराचन्द ओझा - लिपि-विज्ञान व कूट-पठन)

प्राचीन भारतीय लिपिमाला (महामहोपाध्याय गौरीशंकर हीराचन्द ओझा - लिपि-विज्ञान व कूट-पठन)

The Paleography of India by G.H. Ojha

रायबहादुर पण्डित गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा

DevanagariHindipublished318 पृष्ठ

पृष्ठ 250, कुल 318 में से

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पृष्ठ 250

Plate XXIII. लिपिपत्र २३ वां.
प्रतिहार वंशी राजा नागभट, बाउक और ककुक के लेखों से.
(ई. स. की नवीं शताब्दी).
प्रतिहार राजा नागभट के बुचकला के लेख से मुख्य मुख्य अक्षर (वि. सं. ८७२ = ई. स. ८१५).
अ आ इ उ क घ न म ह नु भु दे द्धा प्र ईं श्री ओं.
[प्रतिहार राजा नागभट के बुचकला लेख के अक्षर]
प्रतिहार बाउक के जोधपुर के लेख से (वि. सं. ८९४ = ई. स. ८३७).
अ इ उ ए क ख ग घ च छ ज ट ड ण त
[बाउक के जोधपुर लेख के स्वर-व्यञ्जन अक्षर]
थ द ध न प फ ब भ म य र ल व श ष स ह
[बाउक के जोधपुर लेख के व्यञ्जन अक्षर]
नृ जा भू क्क क च ङ्क झी ष्ट ङ्क्ष स्थि स्फू ᵡपा ओं.
[बाउक के जोधपुर लेख के संयुक्त अक्षर एवं अन्य रूप]
प्रतिहार ककुक के घटिआला के लेख से (वि. सं. ९१८ = ई. स. ८६१).
अ अ आ इ ई ऊ ओ क झ ड ण भ मे सो क्स.
[ककुक के घटिआला लेख के अक्षर]
ॐ नमो विष्णवे॥ यस्मिन्निदं जगत्-
सर्व्वं धार्य्यतेऽबोधिकेतवे। निर्गुणाय
नमस्तस्मै यः॥ गुणैः पूर्त्तः पुरुषोत्तमः कीर्त्यते यत्-
पदं लिङ्गैः। गुरुकीर्त्तिररण्यश्री मूलाद्रामकरी यतः॥
अतः श्रीबाउक धीमं मुद्यतीश्वरवङ्शजः। यश-
CC-0.Dwivedi Lok Hitkari Pustakalaya, Ghaziabad. Digitzed by eGangotri