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सर्वकोश
प्राचीन भारतीय लिपिमाला (महामहोपाध्याय गौरीशंकर हीराचन्द ओझा - लिपि-विज्ञान व कूट-पठन)

प्राचीन भारतीय लिपिमाला (महामहोपाध्याय गौरीशंकर हीराचन्द ओझा - लिपि-विज्ञान व कूट-पठन)

The Paleography of India by G.H. Ojha

रायबहादुर पण्डित गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा

DevanagariHindipublished318 पृष्ठ

पृष्ठ 261, कुल 318 में से

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पृष्ठ 261

Plate XXXIV.
लिपिपत्र ३४वां.
वल्लभेन्द्र के दानपत्र और हस्तलिखित पुस्तकों से.
(ई. स. की १२वीं शताब्दी).
आसाम से मिले हुए वल्लभेन्द्र के दानपत्र से (शक सं. ११०७ = ई. स. ११८५).
अ आ इ उ ए क ख ग च ज झ ट ठ ड ण त थ द
अ आ इ उ ए क ख ग च ज झ ट ठ ड ण त थ द
ध ध न प फ भ म य र र र ल ल व/ब श ष स स
ध ध न प फ भ म य र र र ल ल व श ष स स
ह त टी कु तु मु रू लु पू लू घृ क्रे जु चे ङ्ग क्कु ज्ञे
ह त टी कु तु मु रू लु पू लू घृ क्रे जु चे ङ्ग क्कु ज्ञे
च्छ ङ्गा ण्ड त्तु द्ध द्वि द्रू ण्णी त्यं र्व्व ष्टि ष्ठ ष्णोः स्त स्थे ओं.
च्छ ङ्गा ण्ड त्तु द्ध द्वि द्रू ण्णी त्यं र्व्व ष्टि ष्ठ ष्णोः स्त स्थे ओं.
हस्तलिखित पुस्तकों से मुख्य मुख्य अक्षर (ई, स. की १२वीं शताब्दी).
अ अ आ इ इ ई ई ऊ ऊ ऋ ॠ ऌ ॡ ॡ ॡ ए ऐ
अ अ आ इ इ ई ई ऊ ऊ ऋ ॠ ऌ ॡ ॡ ॡ ए ऐ
ऐ ओ ओ औ ख घ च च ण त भ म र श श स स खा.
ऐ ओ ओ औ ख घ च च ण त भ म र श श स स खा.
१ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ यद्ब्रह्मसङ्कलप-
द्वैपुकल्पनिमाना वदतुिवनीव अद्यन अन्द्र मङ्ग-
लस्य । नत्त्वाद्यचः स द्वगतां यदासी यस्माचमान-
थठां ॐससिना सह यावद्विद्युः ॥ यात्रानद्यत्वन-
उनाथिवमप्रत्येकिन्त्वाद्ध्विद्ध्याः घुनाडु ङ्गवय्युष्टितनाद्युतु-