प्राचीन भारतीय लिपिमाला (महामहोपाध्याय गौरीशंकर हीराचन्द ओझा - लिपि-विज्ञान व कूट-पठन)

प्राचीन भारतीय लिपिमाला (महामहोपाध्याय गौरीशंकर हीराचन्द ओझा - लिपि-विज्ञान व कूट-पठन)
The Paleography of India by G.H. Ojha
रायबहादुर पण्डित गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा
DevanagariHindipublished318 पृष्ठ
पृष्ठ 251, कुल 318 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 251
Here is the line-by-line transcription of the plate:
Plate XXIV. लिपिपत्र २४वां.
जाईकदेव के दानपत्र, विजयपाल के लेख और हस्तलिखित पुस्तक से.
( ई. स. की दसवीं शताब्दी. )
मोरबी से मिले हुए राजा जाईकदेव के दानपत्र से ( गुप्त सं. ५८५ = ई. स. ९०४ )
अ आ इ ई क क ख ग घ च छ ज ट ड ण ण
[वर्णमाला के अक्षर]
ण त त थ द ध ध न प फ ब म म य र र ल ल
[वर्णमाला के अक्षर]
व श श ष स ह ह त् जा पु द्ध गो च्र क्क र्ष्णा ह्म.
[वर्णमाला के अक्षर]
प्रतिहार राजा विजयपाल के समय के अलवर के लेख में ( वि. सं. १०१६ = ई. स. ९५९ ) .
अ आ उ ऐ ख ग घ च कृ ठ ड य य श का च्र ज्ञ औं.
[वर्णमाला के अक्षर]
नेपाल से मिले हुए हस्तलिखित पुस्तक से ( ई. स. की दसवीं शताब्दी के आसपास ).
आ इ ई ऊ ऋ ॠ ऌ