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वेदान्त दर्शन: ब्रह्मसूत्र (शाङ्करभाष्य व हिन्दी अनुवाद सहित)

Vedanta Darshana: Brahma Sutra with Shankara Bhashya

भगवान् बादरायण व्यास व आदि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished486 पृष्ठ

२८४ वेदान्त-दर्शन [ पाद २

२८४ वेदान्त-दर्शन [ पाद २
इन सब कारणोंसे यही सिद्ध होता है कि स्वप्नकी सृष्टि वास्तविक नहीं,
जीवको कर्मफलका भोग करानेके लिये भगवान् अपनी योगमायासे उसके
कर्म-संस्कारोंकी वासनाके अनुसार वैसे दृश्य देखनेमें उसे लगा देते हैं,
अतः वह स्वप्न-सृष्टि तो मायामात्र है, जाग्रत्की भाँति सच्ची नहीं है। यही
कारण है कि उस अवस्थामें किये हुए शुभाशुभ कर्मोंका फल जीवात्माको
नहीं भोगना पड़ता। तथा पूर्वपक्षीने जो यह बात कही थी कि किसी-किसी
शाखावाले लोग पुरुषको पुत्र-पौत्रादि काम्य-विषयोंकी रचना करनेवाला
बताते हैं, वह ठीक नहीं है; क्योंकि वहाँ स्वप्नावस्थाका प्रकरण नहीं है और
उस मन्त्रमें जीवात्माको काम्य-विषयोंका निर्माता नहीं कहा गया है, वहाँ यह
विशेषण परमात्माके लिये आया है।
सम्बन्ध—इससे तो यह सिद्ध होता है कि स्वप्न सर्वथा व्यर्थ है,
उसकी कोई सार्थकता नहीं है, इसपर कहते हैं—
सूचकश्च हि श्रुतेराचक्षते च तद्विदः ॥ ३।२।४॥
सूचकः = स्वप्न भविष्यमें होनेवाले शुभाशुभ परिणामका सूचक; च=भी
होता है; हि=क्योंकि; श्रुतेः= श्रुतिसे यह सिद्ध होता है; च=और; तद्विदः = स्वप्न-
विषयक शास्त्रको जाननेवाले भी; आचक्षते = ऐसी बात कहते हैं।
व्याख्या—श्रुति (छा० उ० ५।२।८)-में कहा है—
यदा कर्मसु काम्येषु स्त्रियं स्वप्नेषु पश्यति।
समृद्धिं तत्र जानीयात्तस्मिन् स्वप्ननिदर्शने॥
'जब काम्यकर्मोंके प्रसंगमें स्वप्नोंके दृश्योंमें स्त्रीको देखे तो ऐसे स्वप्न
देखनेका परिणाम यह समझना चाहिये कि उस किये जानेवाले काम्यकर्ममें
भलीभाँति अभ्युदय होनेवाला है।' तथा यह भी कहा है कि 'यदि स्वप्नमें काले
दाँतवाले काले पुरुषको देखे तो वह मृत्युका सूचक है।' (ऐतरेय आरण्यक
३।२।४।१७) इत्यादि, श्रुतिके प्रमाणोंसे यह सिद्ध होता है कि स्वप्न
सर्वथा व्यर्थ नहीं है, वह वर्तमानके आगामी परिणामका सूचक भी होता है। इसके
सिवा, जो स्वप्नविज्ञानको जाननेवाले विद्वान् हैं, वे भी इसी प्रकार स्वप्नमें देखे