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गरुड़ पुराण

Garuda Purana

by महर्षि वेदव्यास

DevanagariHindipublished634 pages

द्रव्य तथा औषध-सेवनमें भगवान् विष्णुके स्मरणकी महिमा

Page 352Permalink

३४२ संक्षिप्त गरुडपुराण [ आचार-


शर्करा और बकरीके दूधमें पीनेसे मूत्रनिरोध, शर्करा-विकार और पाण्डु रोग विनष्ट हो जाता है।

ब्रह्मयष्टी अर्थात् ब्राह्मीकी जड़को चावलके पानीमें घिसकर तैयार किया गया लेप असाध्य गण्डमाला तथा गलगण्डक रोगको दूर करता है। हे रुद्र! करवीर (कनेर)-की जड़का लेप तथा सुपारीका लेप भी पुरुषत्वसे सम्बन्धित विकारको नष्ट करता है। अब मैं अन्य औषधिक योगोंको कहता हूँ।

दन्तीमूल, हल्दी और चित्रकके लेपसे भगंदर रोग विनष्ट होता है। हे उमापते! हे वृषभध्वज! स्नुही (थूहड़—सेहुँड)-के दूधसे अनेक बार भावित हल्दीकी वटीका लेप अर्श रोगको दूर करता है। घोषाफल और सेंधा नमकको पीसकर बनाया गया लेप अर्श रोगको नष्ट करनेका श्रेष्ठतम योग है। हे शिव! पलाश और क्षारसे बने क्वाथके द्वारा शोधित घृतपाकमें तिगुना मिला हुआ त्रिकटु (काली मिर्च, सोंठ और पिप्पली)-का चूर्ण अर्श रोगको विनष्ट करता है। बेलके फलको भूनकर खानेसे खूनी अर्श विनष्ट होता है। मक्खनके साथ काला तिल खानेसे भी खूनी अर्श रोग नष्ट होता है।

हे वृषभध्वज! प्रातःकाल यवक्षार-मिश्रित सोंठके चूर्णको समान मात्रामें गुड़ मिलाकर खानेसे वह जठराग्निकी वृद्धि करता है। सोंठके चूर्णको काढ़ा बनाकर पान करनेसे भी जठराग्निकी वृद्धि होती है। हे रुद्र! हरीतकी, सेंधा नमक, पिप्पली—इन औषधियोंके चूर्णको गरम जलके साथ मिलाकर पान करनेसे भूख बढ़ती है तथा शूकरकन्दका रस घृतके साथ पान करनेसे अति क्षुधा बढ़ती है।

(अध्याय १८६)


आयुर्वृद्धिकारी औषधिके सेवनकी विधि

श्रीहरिने कहा— हे शिव! हे वृषभध्वज! हे रुद्र! यदि मनुष्य हस्तिकर्ण पलाशके पत्तोंका चूर्ण करके सौ पलकी मात्रामें इस चूर्णको दूधके साथ मिलाकर लगातार सात दिनोंतक प्रयोग करे तो वह वेदविद्याविशारद, सिंहके समान पराक्रमी, पद्मरागके समान कान्तियुक्त तथा सौ वर्षकी आयुमें भी सोलह वर्षका नवयुवक बन सकता है, किंतु सतत दुग्धपान करना अत्यावश्यक है।

हे शिव! मधु और घृतसे युक्त दूधका सेवन आयुवर्धक होता है। उक्त हस्तिकर्ण पलाशके चूर्णको मधुके साथ लेनेसे प्राणी दस हजार वर्षकी आयु प्राप्त कर सकता है। यह योग मनुष्यको वेदवेदाङ्गका ज्ञाता और प्रमदा-जनोंका प्रिय बनानेमें समर्थ है। इस चूर्णका सेवन दहीके साथ करनेसे शरीर वज्रके समान शक्तिसम्पन्न हो जाता है। केशरसे युक्त इस चूर्णका प्रयोग करनेसे मनुष्य हजार वर्षकी आयु प्राप्त करता है। यदि मनुष्य इस चूर्णको कांजीके साथ मिलाकर खाता है तो केशोंकी सफेदी और त्वचाकी झुर्रियोंसे रहित होकर सौ वर्षतक वृद्धावस्थासे रहित दिव्य शरीर प्राप्त करता है।

हे वृषभध्वज! त्रिफला चूर्णके साथ मधुका सेवन नेत्रज्योतिको बढ़ाता है। घीके साथ इस चूर्णको खानेसे अंधा व्यक्ति भी देख सकता है। भैंसके दूधमें मिलाकर तैयार किया गया इस चूर्णका लेप प्राणीके श्वेत बालोंको काला बना देता है। खल्वाटके बाल भी इस लेपके प्रयोगसे निकल आते हैं। इस चूर्णको तेलमें मिलाकर शरीरमें लगानेसे बाल पकनेका प्रभाव तथा त्वचाकी झुर्रियोंका प्रकोप समाप्त हो जाता है।

इस चूर्णका मात्र उबटन लगानेसे सभी रोग दूर हो जाते हैं। बकरीके दूधमें मिलाकर इस चूर्णका