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महाभारत (खंड १) - आदि व सभा पर्व
Mahabharata (Vol 1) - Adi and Sabha Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
DevanagariSanskritpublished2,256 पृष्ठ
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पृष्ठ 1072स्थायी लिंक
अष्टचत्वारिंशदधिकशततमोऽध्यायः
विदुरजीके भेजे हुए नाविकका पाण्डवोंको गङ्गाजीके पार उतारना
वैशम्पायन उवाच
एतस्मिन्नेव काले तु यथासम्प्रत्ययं कविः ।
विदुरः प्रेषयामास तद् वनं पुरुषं शुचिम् ।। १ ।।
**वैशम्पायनजी कहते हैं—**जनमेजय! इसी समय परम ज्ञानी विदुरजीने अपने विश्वासके अनुसार एक शुद्ध विचारवाले पुरुषको उस वनमें भेजा ।। १ ।।