बिहारी सतसई (महाकवि बिहारीलाल - लाला भगवानदीन कृत सविastार हिन्दी टीका सहित)
Bihari Satsai with Hindi Commentary
महाकवि बिहारीलाल (टीकाकार: लाला भगवानदीन) द्वारा
( ३४ ) साहित्यपरिचय।
जहँ संबंध बने न तब, उपमामें विश्राम ॥
हेतु क्रिया कारि दोप है, निदर्शना सुखधाम ॥ ७ ॥
अति अभेद जिय राखि जहँ, नहिं कहिये उपमेय ॥
उपमानि कहिये जहाँ, अतिशयोक्ति सो भेव ॥ ८ ॥
उपमानरु उपमेय पुनि, साधारण जेहि ठाउँ ॥
वाचक सब प्रतिबिम्बहै, सो दृष्टान्ता नाउँ ॥ ९ ॥
अगले २ योग जहँ, प्रथम अधिक गुण होय ॥
मालादीपक कहत हैं, ताहि सब कविलोग ॥ १० ॥
दीपकहींसों भेव यह, नियत एकहीं होय ॥
उपमानि उपमेयको, तुल्य योग्यता सोय ॥ ११ ॥
जहाँ अधिक उपमानते, कहियत है उपमेय ॥
सो व्यतिरेक बखानिये, ऊँच नीच गुण भेय ॥ १२ ॥
इनके चौबीस भेद होते हैं.
दोहा—कथ्यो न कछु कहि बरनि, अधिकाईके हेत।
कह्यो कि कहिब भेद द्वै, आक्षेप कहि देत ॥ १ ॥
साहित्यपरिचय । ( ३१ )
संख्याक्रम चूकै नहीं, यथा संख्य है सोय ॥ १ ॥
जहां अर्थ सामान्यको, पोपन करे विशेप ।
पुनि सामान्य विशेषको, जेहिठाँ पोप न लेप ॥ २ ॥
सो अर्थान्तर न्यास है, और अर्थ जहाँ होय ।
स्वधर्म विधर्म भेदकर, चारभांति है सोय ॥ ३ ॥
है न विरोध विरोधसो, बातन माहिँ लखाय ।
जाति क्रिया गुण नाम करि, सो विरोध दशभाय ॥४॥
जाति चारिसों तीनगुण, द्वैसे क्रिया विरुद्ध ।
नाम नामहीसों बहुरि, यौँ हैं दश विधि शुद्ध ॥ ५ ॥
रूप रहै जु सुभायकै, तिनको वर्णन होय ।
सुस्वभावोक्ति जानिये, कृतिम जहाँ नहिं सोय ॥ ६ ॥
बहानेसे दोष वर्णन करनेका नाम व्याजस्तुति है, और
अर्थके बिना अर्थ जहाँ भला बुरा न हो उसको विनोक्ति कह
ते हैं जहां अर्थ बदले जाते हैं वह विनिमय अलंकार है सम
और अर्थ भेदसे दो प्रकारका है ।
सहोक्ति लक्षण ।
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( ६६ ) साहित्यपरिचय ।
पदसमूहके अर्थ यह, हेतुनि द्विविधि होय ।
जहां सुकाव्यालिंगहै, द्वै पुनि द्वै विधि सोय ॥ ३ ॥
यह भी दो प्रकारका होता है ।
समुच्चय वर्णन ।
मूल अर्थकी सिद्धि जहँ, एक अर्थते होय ।
आगे पोषकहोय बहु, वरनि समुच्चय सोय ॥ १ ॥
एक अनेकनमें रहै, वरणपर्यायसु और ।
सो दूजो अरु अनेक जहँ, रहत एकही ठौर ॥ २ ॥
जनक परस्परा जानके, दोन अर्थ तब होय ।
एक क्रियाके योगते, सो अन्यान्याहिगोय ॥ ३ ॥
इस प्रकार संक्षेपसे थोड़े अलंकारोंका लक्षण दिखा दि-
याहै टीका करते समय भी बहुत अलंकारोंके लक्षण लिख
दिये हैं तात्पर्य पढनेवालोंको इसमें बहुत कुछ काव्यका भेद
खुलेगा; यदि और विशेष कुछ देखना हो तो वह दूसरे
काव्यादर्शवा , ग्रंथ जैसे काव्य निर्णयादि काव्यके
अंग देखें ।
श्रीगणेशायनमः ।
अथ बिहारीसतसईकी-
अकारादिअनुक्रमपूर्वक अनुक्रमणिका ।
अ. | अरतैं टरत ... ... ४५६
अंगअंगप्रतिबिम्ब ... ५३० | अरी खरी ... ... १६२
अंगअंगनग ... ... ५२९ | अरुनचरन ... ... ५१२
अंगअंगछवि ... ... ५३१ | अरुणसरोरुह ... ... ५७८
अंगुरिन .... ... २०६ | अरे परै ... ... ३८९
अजहुँ न आये ... ... १३० | अरे परंदो ... ... ६१५
अजौ तन्योनाहीं ... ... ६३९ | अरे हंसया ... ... ७१०
अतिअगाध ... ... ६०३ | अलिइन ... ... २५९
अधर धरत ... ... ६ | अलि इन लोयनसे ... २६०
अनत बसे .... ... १८८ | अहै दूहिन ... ... ६५०
अनरस ... ... ३७५ | अहै दहैंडी ... ... २२३
अनियारे दीरघ ... ३७१ |
अनी बड़ी ... ... ६५८ | आ.
अन्त भरेंगे ... ... ७०९ | आज कछु .... ... १८७
अपनी गरज ... ... ३०१ | आये दै आड़े ... ... ३८१
अपने अंगके .... ... २० | आप दगौ ... ... १८४
अपने अरैन ... ... ६८२ | आये आप .... ... ३७९
अपने गुहिकार ... ... ५५७ | आये मान .... ... ६४९
अब गति ... ... ५७६ | आननधाम ... ... ५८२
( २ ) - बिहारीसतसयीकी-
इ. | ओ.
इक भींजे .... ... ६०९ | ओछे बड़े न .... ... ६००
इत आवत .... ... ४१८ | ओठ उँचै ... ... २८२
इतते उत ... ... २८६ | औ.
इन अँखियां ... .... २७० | औंघाई ... .... ३८२
इहि आशा ... .... ६३१ | औये भांति ... .... ४१५
इहि हैही .... .... ४७४ | औरै सब ... ... ७६
इहि काटे ... .... ४७ | औरै ओप ... .... ८८
उ. | औरै गति .... .... ८१
उठि ठक ठक ... ... १५६ | क.
उडकुडबाती ... ... ३१५ | कंचन तनु ... ... ५२२
उडी गुर्डी ... ... २५५ | कञ्जनयनि ... ... ६०
उदय अस्त ... ... ७२३ | कच समेट .... .... ५४३
उनकी हितु ... ... २८९ | कत लपटैयत ... ... १९२
उनि हरकी ... ... २८८ | कत बेकाज ... ... १६८
उयो शरद ... ... २३७ | कत सकुचत ... ... १९०
उर मानिक्की .... ... ५०२ | कनक कनक ... ... ६४७
उर लीन्हे ... ... ३१० | कन दैबो ... ... ६५०
उर उरझ्यो .... ... २८७ | कपट सतर ... .... १०५
ऊ. | कबकी ध्यान ... ... ६७
ऊँचे चितय ... ... ७३ | कर उठाय .... ... ५०३
ए. | करके माँड़े ... .... ५२२
एरी यह तेरी ... ... ७० | करतु मलिन ... ... ५२५
ऐ. | कर फुलेलको .... ... ६४६
ऐंचतसी ... ... ६३ |
अनुक्रमणिका । ( ३ )
करले चूमि ... ... ४०५ | कालव्रूत... ... ... ३२२
करले संधि ... ... ६४५ | किती न गोकुल .... ... ७
करत जात ... ... २९५ | किय घायल ... ... ५१०
करी विरह ... ... ४२५ | कियो जु चिबुक ... .... १०८
करे चाहसों .... ... ३३ | कियो सयान ... ... १४४
करें सातसौ ... ... ७२७ | कियो सबै जग .... ... ५८१
करो कुवत .... .... ६९२ | कीनेऊ कोटक ... ... २८०
कबकी टेरत ... ... ६९० | कीजे चित सोई ... ... ६९८
कवि कहियत ... ... १७९ | कुंजभवन ... ... ५४८
कहत सबै ... ... ४४५ | कुष गिरि ... ... ४८४
कहत सबै कबि ... .... २६४ | कुटिल अलक ... ... ४४२
कहत नटत ... ... ५८ | कुढँग कोप ... ... ५७३
कहत न देवर ... .... १५ | केसर केसर .... ... १९७
कह लहि ... ... ५२० | केसरके ... ... ५३५
कह लाने ... .... ५६९ | कैवा आयत ... ... ३४३
कहा लैदैत ... ... २२७ | केस छोटे ... ... ५५९
कहा कहौं ... ... ७९८ | कोटि जनन ... ... ४०८
कहा कुसुम ... ... ५५९ | को छूटनौ .... ... ६३७
कहा भयो ... ... १९७ | को जानि ... ... २७१
कहो लैहूगे ... ... ३७३ | को हरसी ... ... ५०९
कहिपठई.... ... ... ९५ | कोटि ननन ... ... ७०
कहेतु वचन .... ... ३९४ | को कहिसकै, .... ... ३३९
कहै रही... ... ... ६०४ | कोटि नयन ... ... ७१५
कागद पर ... ... ४०७ | खोज कोटिक ... ... ६६६
काहे वरन ... ... २४५ | कौंधा और .... .... ४७१
( ४ ) बिहारीसतसयीकी-
कोनु सुनै ... ... ३९० | गहे न नेको ... ... ६४१
कौन भांति ... ... ६८७ | गह्यो अवाला ... ... ११९
क्यों बसिये ... ... २७५ | गाढ़े गाढ़े ... ... ४९८
क्योंहूं सब ... ... ३७६ | गिन्ती गनवे ... ... ५३१
क्ष. | गिरिते ऊँचे ... ... ६२५
क्षणेक उधार ... ... ११० | गिरे कंप ... ... ५६२
क्षणेक छबीले ... ... ३३६ | गुनी गुना सब ... ... ६१०
क्षणे वाचना ... ... २४४ | गुरुजन ... ... ७०८
क्षण २ में ... ... ३१३ | गोप अघाइन ... ... १५७
ख. | गोपिन संग ... ... १०
खरी भीर ... ... ५७ | गोरी गदकारी ... ... ५४३
खरी पातरी ... ... ३६७ | गोरी छिगुनी ... ... ४९६
खरी लसत ... ... ४९२ | गोधनतू ... ... ६२८
खरे अदब ... ... ३६१ | गोपिनके ... ... ६५४
खल बड़ई ... ... २९४ | घ.
खलित वचन ... ... २१९ | घनघेरी ... ... ५७७
खिंचे मान ... ... १०२ | घर घर हिन्दु ... ... ७०४
खेलन सिखये ... ... ४५८ | घर घर डोलत ... ... ६०६
खौरि पनच ... ... ४५३ | घाम घरीक ... ... ४८
ग. | च.
गडे बडे ... ... १७६ | चकी जकीसी ... ... ५२९
गढरचना ... ... ५९६ | चखरुचि ... ... २७९
गदराने तन ... ... ३४८ | चटक न छांडत ... ... ६९१
गली अँधेरी ... ... २२१ | चलन न पावन ... ... ५९७
गहली गरब ... ... ३६९ | चम चमात ... ... ४६८
गहाकि गांस ... ... २०० |
अनुक्रमणिका । (५)
चमक तमक ... ... ५४५ | छप्यो छबीलो ... ... ४९०
चलत चलत ... .... १३३ | छप्यो नेह... ... ... १२७
चलत घेर ... ... २४६ | छप्यो छुपाकर ... ... १५८
चलत पाँय ... ... ७०१ | छला परोसिन ... ... ११६
चकित ललित ... ... ५५५ | छला छवीले ... ... १२१
चलत देश ... ... १३९ | छाले परिवे ... ... ५३९
चले जाहु .... .... ६२२ | छिरके नाह ... ... ५५४
चलो चले ... .... ३७४ | छुटी न शिशुता... ... १७
चालेफी ... ... २९ | छुटी न लाज ... ... १४
चाहभरी ... ... १३७ | छुटन न पियत ... ... ३५३
चितवनि मोरे ... ... ३१२ | छुटे छुटावत ... ... ४४१
चितवत ... ... २७८ | छूटत मुठिन ... ... ५६१
चितवत नित ... ... ५१ | छैछिगुनी... .... ... २२५
चिरजीवो ... ... २२६ | ज.
चितवन रूखे .... .... ३५८ | जगत जनायो ... ... ६६९
चित तरसत ... .... ६२८ | जयजुगल... ... ... ५०६
चितपितु ... ... ६६२ | जब जब वह सुधि... ... ४१०
चितई उछ ... .... ५४ | जटित नील ... ... ४७२
चिनवै नितै ... ... ६३१ | जदपि नाहिं ... ... ७१९
चिलक चिकन .... ... ३१४ | जनम अजाचे ... ... ६४७
चुनरी श्याम ... ... ३१८ | जनक धरत ... ... ५३८
चुवत स्वेद ... ... ५८८ | जपमाला... ... ... ६८८
छ. | जरतार... ... ... ४९१
छवि रसाल ... ... ५६५ | जहां जहां ठांई ... ... ४१२
जांइ जूही ... ... ३३८
( ६ ) बिहारीसतसयीकी-
जात सयान ... ... २७६
जालरंध्रभग ... ... ३२६
जात जात बित ... ... ६७५
जात मरी.... ... ... २४९
जा मृगनैनी ... ... ७१५
जिन दिन... ... ... ६२०
जिहि निदाघ ... ... ३८३
जिहि भामिनि ... ... १७५
जुरे दुहुँनके ... .... ६१
जुवति जोन्हमें ... ... १६०
जेती सम्पति ... ... ५९३
जो तब होत ... ... ४७०
जोग जुगति ... ... ४५७
जो तिय तुम ... ... १९४
जो वाके तन ... ... ३०८
जो चाहै चट .... ... ३६५
जो शिर धारि ... ... ६१४
जोन्ह नहीं ... .... ४२०
जोन जुगति ... ... ५४७
जो कोऊ... ... ... ७
जोलों लखों .... ... १०४
ज्यों ज्यों... ... ... २२
ज्यों कर त्यों ... ... ५४१
ज्यों ज्यों बढ़ती... ... ... ५७९
ज्यों ज्यों पट ... .... ५६३
ज्यों ज्यों उलझि... .... ५५८
ज्यों ज्यों पावक ... ... १४८
ज्यों हुइहौं... ... ... ६९१
ज्यों ज्यों आवत ... ... १५४
झ.
झमकि चढ़त ... .... २८५
झीने पटमें... ... ... ४८२
झुकि झुकि ... ... १५३
झूठे जात न ... ... ४६१
ट.
टटकी ... ... ... २४३
टुनिहाई ... ... ... १२४
टोरीलाई ... ... ... ३३७
ठ.
ठाढी मन्दिर ... ... ७१२
ड.
डर न टरै ... ... ... २७७
डारे ठोढ़ी ... ... ४८५
डिगत पानि .... ... ६६०
ढ.
ढरे ढार .... ... ... २६३
ढीठचौ दे... .... ... २८
त.
तंत्रीनाद... ... ... ५९७
अनुक्रमणिका । ( ७ )
तजत अटान ... ... ७१५ | तो तन अधिक ... ... ५३६
तच्यो आँच ... ... ४२८ | तोपर वारी ... ... १२३
तजि तीरथ ... ... ६२१ | तोहीको छूट .... ... १०७
तजी शंक... ... ... ४२९ | तोही निरमोही ... ... ३५२
तनक झूठ ... ... ५४६ | तो लखि मो मन ... ... ५४६
तनभूषण.... ... ... ५१५ | तोरसराच्यो ... ... ३६८
तप न तेज ... ... ५८३ | तो भलिये ... ... ६९५
तर झुरसी ... ... ४०३ | तो लगिया .... ... ६७८
तरुणकौंक ... ... १८० | त्यो त्यों प्यासे ... ... ५३३
तरवनि ... ... ९३ | ध.
तिय कित ... ... ४६७ | थाकी जतन ... ... ३०६
तिय तरसी हैं ... ... ५७१ | थोरई गुन .... ... ६८९
तिय निज हिय .... ... २९१ | द.
तिय तिथि ... ... १८ | दयौसुशीश ... ... ६८५
तियमुख ... ... ४४८ | दच्छिन ... ... २०२
त्रिवली ... ... ४१ | दहें निगोड़े ... ... १००
तीतरपंख ... ... ३३२ | दिन दश आदर ... ... ६३५
तुरत सुरत ... ... १६९ | दियो अरघ ... ... २३३
तुम सौतिनि ... ... १०९ | दिये जु पिय ... ... ५६०
तुह कहत ... ... ९९ | दिशि दिशि ... ... ५६०
तु मनि मानै ... ... ७८ | दीठि परत ... ... ५०
तू मोहन ... ... ३२४ | दीठि परासिन .... ... ४१८
तू रहि सखि ... ... २३२ | दीठन परन ... ... ७२८
तेद तस्यौ .... ... १९१ | दीनेगेह ... ... ६१
तो अनेक ... ... ६८३ | दीरघ सांस ... ... १०५
( ८ ) बिहारीसतसयीकी-
दुःखबहायतु ... ... ३५५ ध.
दुरित न ... ... ४५९ धनियह द्वेज ... ... ७९
दुरै न निघर ... ... १३ धुँवा ... ... ... ३८६
दुसह दुराज ... ... ६०५ ध्यान आनि ... ... ३५८
दुसह विरह ... ... ३९३ न.
दुसह साँति ... ... ११२ नई लगनि ... ... २८४
दुचिते चितं ... ... ३४६ न करु न डर ... ... १८१
दुरयो खरे ... ... ६४ नख रेखा... ... ... १७२
दूजमुधा ... ... २५० नखशिख.... .... २६७
दृगनि लगत ... ... ४६२ नटिनशीश ... .... ८५
दृग धरकौंहै ... ... ५४२ नभलाली ... ... १५२
दृग मीचत ... ... २१३ नरकी औ नल ... ... ६२३
दृग उरझत ... ... २७३ नये बिससिये ... ... ५९२
देहडुलैया ... ... २६ नये विरह ... ... १३८
देखी सोनजुही ... ... ५१७ नवनागरि ... ... २१
देखाजान ... ... ३४५ नहिं अन्हाय ... ... ५३
देख्यो अनदेक्यो ... ... ४४ नहिं पराग ... ... ६२९
देखत कछु ... ... ५२ नहिं पावस ... ... ६३८
देखत चुरै ... ... २९७ नहिं हारिलो ... ... ३४१
देवर फूल हमें ... ... ४६ नहिं नचाय ... ... १०६
देह लग्यो ... ... ३२० नाक चढ़े ... ... २४५
दोऊ चाहभरे ... ... २३६ नागरिविविध ... ... ३३१
दोऊचोर ... ... २१६ नाचि अचानक ... ... ४०७
दोऊ अधिकाई ... ... ३६२ नाम सुनतही ... ... ७०
नावक शरसे ... ... २३८
नाल हराते ... ... ४३७
अनुक्रमणिका । ( ९ )
नासा मोरि ... ... ४५४ प.
नाह गरज ... ... ६५९ पग पग .... .... ५१३
नांह नहीं ... .... २४७ पचरंग ... ... ४५२
नाहिं नये ... .... ५६८ पटकी ढिग ... ... ९४
निज करनी .... ... ६९७ पटसों पौंछ ... ... १७४
नितप्रति ... .... ९ पट पाँख ... ... ६३३
निपट लँजीली ... ... २१८ पतनारी माला ... ... ६७१
निरखि ... . २७ पति रतिकी ... ... ३६
निरदइ नेह .... ... ३५४ पत्राही तिथि ... ... ४८९
नित संसों ... ... ४२५ पति ऋतु ... .... ३५९
निशिअंधियारी ... ... १६१ पर तिय ... ... ६५१
नीको लसत ... .... ४५४ पर्यो जोर .... ... २०७
नीकी दई ... ... ६८६ पलन चले ... ... ६९
नीच हिये ... ... ५१५ पल साँहें .... ... १७३
नीचई निच ... .... ४६५ पलन पीक ... .... १६५
नीठि नीठि .... ... २०८ परन प्रगट .... ... ४२६
नेको वह ... ... ३३८ पहरन भूषन ... ... ५२६
नैक उतै ... ... ३२७ पहरत री ... .... ४९३
नैक न झरसी ... ... २९३ पहुँची ... ... ६२
नैक न जानी ... ... ६०१ पाय तरूनि ... ... ६५३
नैक न जानी परति ... ४६३ पायक दृग .... .... ३८७
नैना नैक ... ... २६१ पावकसो ... ... १५७
नैक ऐसोहीं ... .... ४८३ पानिप न ... .... ५७१
नैन लगे .... ... ७१ पानहू कठिन ... ... ३९९
न्याव पराइ .... ... ५० पारतै निर ... ... ७३
( १० ) विहारीसतसयीकी-
पाय महावर ... ... ५०८ | फिरतनु ... ... १८९
पायल पाय ... ... ७१६ | फिरि सुधि दै ... ... ३९१
पिय तियसों .... ... ४७८ | फूले ... ... ४६६
पिय मन ... ... ३२५ | फूली फाली ... ... १६५
पिय माननको ... ... १२६ | फेरि कहू ... ... ३१९
पियके ध्यान ... .... ३४९ |
पिय बिछुरनकी ... ... ३७ | ब.व.
पीठ दिये ... ... ५५९ | बंधु भये ... ... ६८८
प्रीतम दृग ... ... २११ | बढी कुटुमकी ... ... ५५८
पूसमास ... ... १३१ | बडे कहावत ... ... ५९४
पूछैक्यों ... ... ७१ | बडे नहूजे ... ... ६४८
प्यासे दोपहर ... ... ६०१ | बढ़त निकस ... ... ५५६
प्रगट भये ... ... ६९९ | बतरस ... ... २५६
प्रति बिम्बित ... ... ७०३ | बन बाटन ... ... ३९२
प्रगटी आज ... ... ४२७ | बनतनको ... ... २७२
प्रफुल हार ... ... ५४४ | बरन वास ... ... ४७६
प्रलय करन ... ... ६६१ | बर जीते शर ... ... ४६०
प्राणप्रिया ... ... १७१ | बरजैं दुनी .... ... ५५०
प्रेम अडौले ... ... ७२ | बस सकोच .... ... २९२
| बसै बुराई .... ... ६०७
फ. | बहकि बड़ाई ... ... ३७०
फिरि घरको .... ... ५६७ | बहके सब ... ... ३६६
फिर फिर ... ... ९६ | बहु धन लै .... ... ६५३
फिरि फिरि दौरत... ... ४६३ | वह किन इहि ... ... २३१
फिर फिर चित ... ... २८१ | बाढत तो ... ... २३
फिरि २ बूझति ... ... ४१९ | वाम बाहु ... ... १४२
अनुक्रमणिका । ( ११ )
बाम तमासे ... ... ७२० | विहँसि ... ... ३९
बामा भामा ... ... १३५ | बुधि अनुमान ... ... ६७२
बारो बोलि ... ... ४६९ | बुरोबुराई ... ... ६१६
बालमवारे ... ... २०३ | वेई गडि ... ... १७७
बालकेलि ... ... २९६ | वेई कर ... ... ४९५
बाल काहि ... ... १२ | बेटाढे ... ... ८३
बाल छबीली ... ... ५२४ | वेऊ जिरजीवी ... ... ५७५
बाहि उसै ... ... ५१८ | वेधक अनियारे ... ... ४७१
बाहीकी ... ... २०१ | वे न यहां ... ... ६५४
बाही निशिते ... ... ३६० | बेसरमोती ... ... २४२
विकसत ... ... ३८४ | बेसर मोती ... ... ४७५
विथुरे जिय ... ... १५७ | बैंदीभाल ... ... २५२
विथुर्यो ... ... ११५ | बैठ रही ... ... ५७०
विधि विधिकै ... ... २५३ | बैसिय ... ... १६७
बिनती रति ... ... ३०९ | ब्रजवासिनको ... ... ६७६
बिरह जरी ... ... ३८५ | ब्रजभाण ... ... ७२६
बिरह सुसाई ... ... ३९६ | भ.
विरह विथा ... ... ३९८ | भई जु तन .. .. ५००
विरह विकल ... ... ४०५ | भजन कहा .. .. ६७०
विरह विथादिन ... ... ४३२ | भये बटाऊ ... ... १४०
विलखी लखे ... ... १७७ | भले पधारे ... ...
विलेखि ... ... १२४ | भांति भांतिके ... ... ७२४
विविध ... ... ७२६ | भाललाल ... ... ५४९
विहंसनि ... ... ५५२ | भाल लाल बेंदी ललन ... ५५६
विषम रूप ... ... ६०३ | भावक झभरे ... ... २४
( १२ ) बिहारीसतसयीकी-
स्तम्भ १:
भौंवारि ... ... ६१७
भूषण भार ... ... ५३७
भृकुटी मटकन ... ... ४१४
भेंटत बनत ... ... १५६
भो यह ऐसो ... ... ७१७
भौंह ऊँचे ... ... २१६
भौंहन त्रासति ... ... ५३
म.
मंगल बिन्दु ... ... ४५१
मकराकृत ... ... ४
मनमोहन ... ... ६७७
मनु मनु हारन ... ... ५३६
मन न धरत ... ... २३०
मनु न मनावन ... ... २२४
मरकत ... ... १६६
मरन भलो ... ... ४३३
मलिन देह ... ... १४३
मारिखकी ... ... ४३४
मरी डरी ... ... ४१०
मरत प्यास ... ... ६३६
मानकरत ... ... ३६४
मानहु मुख ... ... २६
मानहु विधि ... ... ५१५
मार सुमार ... ... ३८८
मिलि चंदन ... ... ४५०
स्तम्भ २:
मिलि परछाहीं ... ... १६४
मिलि मिलि ... ... २३६
मिलि विरहन ... ... ५८०
मिसही मिस ... ... १६२
मीत न नीत ... ... ६०४
मुख उघारि ... ... २१५
मुख रूखे ... ... ७१९
मुँह धोवति ... ... ५२
मुँह पसारि ... ... ५५३
मुँह मिठास ... ... २०४
मूँड़चढ़ायो ... ... ६५२
मृगनैनी ... ... १४१
मेरीभवबाधा ... ... १
मेरेबूझे ... ... ९०
मैंतोसौं ... ... २२९
मैंवरजीकै ... ... ५४०
मैंहौं जान्यो ... ... २५७
मैलखि ... ... ३९५
मैलेदयो ... ... ३०२
मैंतपाय ... ... १९३
मोरमुकुट ... ... ३
मोरचंद्रिका ... ... ६२७
मोसोंमिल ... ... ८६
मोहितुम्हें ... ... ६९३
मोहूदीजै ... ... ७००
अनुक्रमणिका । ( १३ )
मोहनमूरति ... ... ६६३ | यों दलमलियत ... ... २२८
मोहिंभरोसों ... .... ३३९ | यों दल काटैं ... ... ६६२
मोहिंलगावति .... .... १०१ |
| र.
मोहूसौं .... .... १९९ | रंगराती ... .... ... ४०६
मोहूसौत .... .... २६६ | रंगी सुरति ... ... ९२
मोहिंदियो ... .... १८५ | रंचन . ... ... ५३३
मोहिं करत ... ... ११ | रमन कह्यो .... .... २१०
मोहूसौंतनि ... .... २६६ | रणित भृंग ... ... ५८६
| रसभिजिये ... ... ५६४
य. | रससिंगार .... ... ४५५
यद्यपिचवायन ... ... ६५ | रवि वन्दों ... ... ६४९
यद्यपिसुन्दर ... ... ३२७ | रसकेसे ... ... १९८
यद्यपितेजरौहाल ... ... १५१ | रह न सकी ... .... ५८५
यदपि नाहिं ... ... ७१८ | रहत नरन ... ... ७०२
यदपि लोग ... ... ४७३ | रहि न सक्यो ... ... ५२१
यदपि पुरानै ... ... ७१० | रही चकित ... .... १८३
यश अपयश ... ... २६८ | रही अचलसी .... ... ६८
यह बसन्त ... .... ८९ | रही रुकी .... ... ५८९
यहमे तोहि ... ... ७४ | रही दहेंडी ... ... २५१
यहविरिया ... ... ६७२ | रह्योमोह .... .... ३१७
यमकारी ... ... ६६७ | रही लूट ... ... ३५२
यहां न चलै ... ... १७८ | रही पैन ... .... ३४०
याके डर ... ... २९० | रह्यो डीठ ... ... ५०७
यह विनशत ... ... ३०० | रही गुदी ... .... १७२
या अनुरागी ... ... ६६४ | रही पंगुरै .... .... ३०५
या भव पारा .... .... ६८० |
( १४ ) बिहारीसतसईकी—
रही फेरिमुहुँ ... ... ८२ | लसत सेत ... ... ४७९
रहिहैं चंचल ... ... १२९ | लसे भुरासा ... ... ४८०
रह्यो ऐंच ... ... १२५ | लहलहाति ... ... ५०४
रह्यो बरोटे ... ... १४५ | लहिसूनै ... ... ३२१
राति द्योस ... ... १०३ | लाई लाल ... ... ३४०
राधा हरि ... ... २४५ | लागत कुटिल ... ... ३३०
रुक्यो सांकरी ... ... ५८७ | लाज लगाम ... ... ३६९
रुपसुधा... ... ... २२० | लाज गरव ... ... ८४
ल. | लाज गही ... ... ५५
लई साँहसी ... ... ३०९ | लाल तिहारें ... ... ३५०
लखि कौने ... ... ३२९ | लाल अलौकिक ... ... १९
लखिगुरुजन ... ... २५६ | लाल तिहारे ... ... ३०७
लखिदौरत ... ... ३० | लछन लहि ... ... १८२
लखि लखि ... ... २२५ | लिखनबैठि ... ... ५३४
लगत सुभग ... ... ५८४ | लीनेउसाहस ... ... ५२७
लगी अनलगी ... ... ५०५ | ले चुभकी ... ... ५५१
लग्यो सुमन ... ... ७२२ | लोपे कोपें ... ... ६५६
लटुवालों... ... ... ६७४ | लोभलगे ... ... २६१
लपटी पुहुप ... ... ५९० | लोनेमुहुँ ... ... ४७७
लटकि लटकि ... ... २२२ | स.
लरिका लेबेके ... ... २८३ | सकत न तुव ... ... ३७७
ललित श्याम ... ... ४६७ | सकुचि सुरत ... ... ३७
ललनसलौने ... ... १८४ | सकुचि सरकि ... ... २५१
ललन चलन ... ... १३२ | सकुचि न रहिये ... ... ३७८
ललन चलनसुनि ... ... ७२२ | सकै सताय ... ... ७२३
अनुक्रमणिका । ( १५ )
सखि सोहत ... ... ८ | सहनसु ... ... ५१६
सखी सिखावत ... ... ७११ | सहज मुचिकान ... ... ४५०
संगतिदोष... ... ... ६२६ | सहित सनेह ... ... २४०
संगति सुमति ... ... ६११ | सही रंगी ... ... ८७
सघनकुञ्ज ... ... १५९ | सामासिन ... ... ७०५
सपनकुअछाया ... ... ४११ | सायकसम ... ... ४५९
सतसैया ... ... ... ७२५ | सारी डारी ... ... ४६४
सटपटा ... ... ६६ | सालतहै ... ... ४८१
सतरभौंह ... ... ९८ | सीरे जतनन ... ... ३८०
सदन सदन ... ... १९५ | सुखसों बीती ... ... ३४५
सममूरूयो ... ... ९७ | सुघर सौतिवश ... ... ११३
सनि काजळ ... ... ३२८ | सुदुतिदुराय ... ... ९१
समरस ... ... ३२ | सुनत पथिक ... ... ४३५
सबि मोहन ... ... २६५ | सुनि पगनुत ... ... २६९
सम्पति केश ... ... ५९८ | सुभरभरचो ... ... १९६
समैपलट ... ... ६९४ | सुरति न लाल ... ... ३११
समै समै ... ... ६२४ | सुरँग महावर ... ... १७१
सबै सुहायेई ... ... ४४७ | सूर उदितहू ... ... ४८८
सब अंगकरि ... ... ३८ | स्वेदसलिल ... ... १५
सबै हँसत . ... ... ६१२ | सैभिसहासा ... ... २१४
सम्बन यह ... ... ७०७ | सोनजुहीसी ... ... ५०१
सबही तन ... ... ५६ | सोवन जागत ... ... ४१३
सरगनु ... ... ४३९ | सोवत सपने ... ... ४०९
सरसकुसुम ... ... ६३२ | सो विथुरी जनु ... ... ४०*
रूप सुमिट ... ... २१२ | सोवन लगिं ... ... ४०
( १६ ) बिहारीसतसयीकी-
सौहत धोती ... ... ३३ | हठ न हठीली ... ... ५७४
सोहत अंगुठा ... ... ५११ | हठि हित करि .... ... १२०
सोहत संग ... ... ६१३ | हम हारी कै ... ... ६५७
सोहत ओढे ... ... ५ | हरषि नवीली ... ... ४९
सोहैहू ... ... ३६६ | हरि कीजत ... ... ६१९
स्वारथ सुकृत ... ... ६३५ | हरि छवि ... ... २५८
| हरि हरि ... .... २९९
श. | हाहावदन ... ... ३७२
शशिवदनी ... ... ७१३ | हित करि ... ... ३०३
सीतळता ... ... ६२० | हिये और ... ... १२६
शीश मुकुट ... ... २ | हुकम पाय ... ... ७०६
श्याम सुरति ... ... ६५५ | हेरि हिंडोरे ... .... २४९
| है हिय रहति ... .... २७४
ह. | होमत मुख ... ... ३०५
हँसि उतार ... ... ३०४ | हौं रीझी ... ... ३३५
हँसि ओठन .... ... १९४ | हौं हीबौरी ... ... ४१६
हँसि हँसाय ... ... ३६३ | ह्याँते ह्यां ... ... ४१७
हँसि हँसि हेरत ... ... २१७ | द्वै कपूर ... ... ५२३
इति अनुक्रमणिका समाप्त ।
श्रीः ।
बिहारी सतसई-सटीक ।
प्रथम शतकः ।
टीकाकारका मंगलाचरण ।
दोहा-वृंदाविपिनविहाररत, सकलसुमंगलमूल ।
बुध ज्वालाप्रसादपर, सदा रहो अनुकूल ॥ १॥
नँदनंदन शोभासदन, नटवर मदनगुपाल ।
मुरलीधर गिरिवर द्रवह, कुंजविहारीलाल ॥ २॥
अथ ग्रंथारम्भः ।
दोहा-मेरी भवबाधा हरो, राधा नागरि सोइ ।
जातनुकी झाँई परे, श्याम हरित द्युति होइ १
सोई नागरि ( चतुर ) राधिका मेरे जन्म मरणकी बाधा
( दुःख ) हरणकरो, जिन राधिकाके शरीरकी झाँईमात्र
पड़नेसे श्रीकृष्णकी ( हरित ) प्रफुल्लकांति होजाती है अर्थात्
जिनकी झाँईमात्रसें श्रीकृष्ण प्रसन्न होते हैं, काव्यालिंग
अलंकारहै [ दोहा-हेतुसमर्थन युक्तिसों, काव्यालिंगको अंग,
ह्यां भवबाधा हरनको, श्रीराधिका प्रसंग ] अथवा जिन
राधिकाके शरीरकी पीत झाँई पड़नेसे कृष्णके शरीरकी