बिहारी सतसई (महाकवि बिहारीलाल - लाला भगवानदीन कृत सविastार हिन्दी टीका सहित)
Bihari Satsai with Hindi Commentary
महाकवि बिहारीलाल (टीकाकार: लाला भगवानदीन) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( ६ ) बिहारीसतसयीकी-
जात सयान ... ... २७६
जालरंध्रभग ... ... ३२६
जात जात बित ... ... ६७५
जात मरी.... ... ... २४९
जा मृगनैनी ... ... ७१५
जिन दिन... ... ... ६२०
जिहि निदाघ ... ... ३८३
जिहि भामिनि ... ... १७५
जुरे दुहुँनके ... .... ६१
जुवति जोन्हमें ... ... १६०
जेती सम्पति ... ... ५९३
जो तब होत ... ... ४७०
जोग जुगति ... ... ४५७
जो तिय तुम ... ... १९४
जो वाके तन ... ... ३०८
जो चाहै चट .... ... ३६५
जो शिर धारि ... ... ६१४
जोन्ह नहीं ... .... ४२०
जोन जुगति ... ... ५४७
जो कोऊ... ... ... ७
जोलों लखों .... ... १०४
ज्यों ज्यों... ... ... २२
ज्यों कर त्यों ... ... ५४१
ज्यों ज्यों बढ़ती... ... ... ५७९
ज्यों ज्यों पट ... .... ५६३
ज्यों ज्यों उलझि... .... ५५८
ज्यों ज्यों पावक ... ... १४८
ज्यों हुइहौं... ... ... ६९१
ज्यों ज्यों आवत ... ... १५४
झ.
झमकि चढ़त ... .... २८५
झीने पटमें... ... ... ४८२
झुकि झुकि ... ... १५३
झूठे जात न ... ... ४६१
ट.
टटकी ... ... ... २४३
टुनिहाई ... ... ... १२४
टोरीलाई ... ... ... ३३७
ठ.
ठाढी मन्दिर ... ... ७१२
ड.
डर न टरै ... ... ... २७७
डारे ठोढ़ी ... ... ४८५
डिगत पानि .... ... ६६०
ढ.
ढरे ढार .... ... ... २६३
ढीठचौ दे... .... ... २८
त.
तंत्रीनाद... ... ... ५९७