बिहारी सतसई (महाकवि बिहारीलाल - लाला भगवानदीन कृत सविastार हिन्दी टीका सहित)
Bihari Satsai with Hindi Commentary
महाकवि बिहारीलाल (टीकाकार: लाला भगवानदीन) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअनुक्रमणिका । ( ३ )
करले चूमि ... ... ४०५ | कालव्रूत... ... ... ३२२
करले संधि ... ... ६४५ | किती न गोकुल .... ... ७
करत जात ... ... २९५ | किय घायल ... ... ५१०
करी विरह ... ... ४२५ | कियो जु चिबुक ... .... १०८
करे चाहसों .... ... ३३ | कियो सयान ... ... १४४
करें सातसौ ... ... ७२७ | कियो सबै जग .... ... ५८१
करो कुवत .... .... ६९२ | कीनेऊ कोटक ... ... २८०
कबकी टेरत ... ... ६९० | कीजे चित सोई ... ... ६९८
कवि कहियत ... ... १७९ | कुंजभवन ... ... ५४८
कहत सबै ... ... ४४५ | कुष गिरि ... ... ४८४
कहत सबै कबि ... .... २६४ | कुटिल अलक ... ... ४४२
कहत नटत ... ... ५८ | कुढँग कोप ... ... ५७३
कहत न देवर ... .... १५ | केसर केसर .... ... १९७
कह लहि ... ... ५२० | केसरके ... ... ५३५
कह लाने ... .... ५६९ | कैवा आयत ... ... ३४३
कहा लैदैत ... ... २२७ | केस छोटे ... ... ५५९
कहा कहौं ... ... ७९८ | कोटि जनन ... ... ४०८
कहा कुसुम ... ... ५५९ | को छूटनौ .... ... ६३७
कहा भयो ... ... १९७ | को जानि ... ... २७१
कहो लैहूगे ... ... ३७३ | को हरसी ... ... ५०९
कहिपठई.... ... ... ९५ | कोटि ननन ... ... ७०
कहेतु वचन .... ... ३९४ | को कहिसकै, .... ... ३३९
कहै रही... ... ... ६०४ | कोटि नयन ... ... ७१५
कागद पर ... ... ४०७ | खोज कोटिक ... ... ६६६
काहे वरन ... ... २४५ | कौंधा और .... .... ४७१