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बिहारी सतसई (महाकवि बिहारीलाल - लाला भगवानदीन कृत सविastार हिन्दी टीका सहित)

बिहारी सतसई (महाकवि बिहारीलाल - लाला भगवानदीन कृत सविastार हिन्दी टीका सहित)

Bihari Satsai with Hindi Commentary

महाकवि बिहारीलाल (टीकाकार: लाला भगवानदीन) द्वारा

DevanagariHindipublished290 पृष्ठ

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( ८ ) बिहारीसतसयीकी-
दुःखबहायतु ... ... ३५५ ध.
दुरित न ... ... ४५९ धनियह द्वेज ... ... ७९
दुरै न निघर ... ... १३ धुँवा ... ... ... ३८६
दुसह दुराज ... ... ६०५ ध्यान आनि ... ... ३५८
दुसह विरह ... ... ३९३ न.
दुसह साँति ... ... ११२ नई लगनि ... ... २८४
दुचिते चितं ... ... ३४६ न करु न डर ... ... १८१
दुरयो खरे ... ... ६४ नख रेखा... ... ... १७२
दूजमुधा ... ... २५० नखशिख.... .... २६७
दृगनि लगत ... ... ४६२ नटिनशीश ... .... ८५
दृग धरकौंहै ... ... ५४२ नभलाली ... ... १५२
दृग मीचत ... ... २१३ नरकी औ नल ... ... ६२३
दृग उरझत ... ... २७३ नये बिससिये ... ... ५९२
देहडुलैया ... ... २६ नये विरह ... ... १३८
देखी सोनजुही ... ... ५१७ नवनागरि ... ... २१
देखाजान ... ... ३४५ नहिं अन्हाय ... ... ५३
देख्यो अनदेक्यो ... ... ४४ नहिं पराग ... ... ६२९
देखत कछु ... ... ५२ नहिं पावस ... ... ६३८
देखत चुरै ... ... २९७ नहिं हारिलो ... ... ३४१
देवर फूल हमें ... ... ४६ नहिं नचाय ... ... १०६
देह लग्यो ... ... ३२० नाक चढ़े ... ... २४५
दोऊ चाहभरे ... ... २३६ नागरिविविध ... ... ३३१
दोऊचोर ... ... २१६ नाचि अचानक ... ... ४०७
दोऊ अधिकाई ... ... ३६२ नाम सुनतही ... ... ७०
नावक शरसे ... ... २३८
नाल हराते ... ... ४३७