बिहारी सतसई (महाकवि बिहारीलाल - लाला भगवानदीन कृत सविastार हिन्दी टीका सहित)
Bihari Satsai with Hindi Commentary
महाकवि बिहारीलाल (टीकाकार: लाला भगवानदीन) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअनुक्रमणिका । ( १३ )
मोहनमूरति ... ... ६६३ | यों दलमलियत ... ... २२८
मोहिंभरोसों ... .... ३३९ | यों दल काटैं ... ... ६६२
मोहिंलगावति .... .... १०१ |
| र.
मोहूसौं .... .... १९९ | रंगराती ... .... ... ४०६
मोहूसौत .... .... २६६ | रंगी सुरति ... ... ९२
मोहिंदियो ... .... १८५ | रंचन . ... ... ५३३
मोहिं करत ... ... ११ | रमन कह्यो .... .... २१०
मोहूसौंतनि ... .... २६६ | रणित भृंग ... ... ५८६
| रसभिजिये ... ... ५६४
य. | रससिंगार .... ... ४५५
यद्यपिचवायन ... ... ६५ | रवि वन्दों ... ... ६४९
यद्यपिसुन्दर ... ... ३२७ | रसकेसे ... ... १९८
यद्यपितेजरौहाल ... ... १५१ | रह न सकी ... .... ५८५
यदपि नाहिं ... ... ७१८ | रहत नरन ... ... ७०२
यदपि लोग ... ... ४७३ | रहि न सक्यो ... ... ५२१
यदपि पुरानै ... ... ७१० | रही चकित ... .... १८३
यश अपयश ... ... २६८ | रही अचलसी .... ... ६८
यह बसन्त ... .... ८९ | रही रुकी .... ... ५८९
यहमे तोहि ... ... ७४ | रही दहेंडी ... ... २५१
यहविरिया ... ... ६७२ | रह्योमोह .... .... ३१७
यमकारी ... ... ६६७ | रही लूट ... ... ३५२
यहां न चलै ... ... १७८ | रही पैन ... .... ३४०
याके डर ... ... २९० | रह्यो डीठ ... ... ५०७
यह विनशत ... ... ३०० | रही गुदी ... .... १७२
या अनुरागी ... ... ६६४ | रही पंगुरै .... .... ३०५
या भव पारा .... .... ६८० |