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बिहारी सतसई (महाकवि बिहारीलाल - लाला भगवानदीन कृत सविastार हिन्दी टीका सहित)

बिहारी सतसई (महाकवि बिहारीलाल - लाला भगवानदीन कृत सविastार हिन्दी टीका सहित)

Bihari Satsai with Hindi Commentary

महाकवि बिहारीलाल (टीकाकार: लाला भगवानदीन) द्वारा

DevanagariHindipublished290 पृष्ठ

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अनुक्रमणिका । (५)
चमक तमक ... ... ५४५ | छप्यो छबीलो ... ... ४९०
चलत चलत ... .... १३३ | छप्यो नेह... ... ... १२७
चलत घेर ... ... २४६ | छप्यो छुपाकर ... ... १५८
चलत पाँय ... ... ७०१ | छला परोसिन ... ... ११६
चकित ललित ... ... ५५५ | छला छवीले ... ... १२१
चलत देश ... ... १३९ | छाले परिवे ... ... ५३९
चले जाहु .... .... ६२२ | छिरके नाह ... ... ५५४
चलो चले ... .... ३७४ | छुटी न शिशुता... ... १७
चालेफी ... ... २९ | छुटी न लाज ... ... १४
चाहभरी ... ... १३७ | छुटन न पियत ... ... ३५३
चितवनि मोरे ... ... ३१२ | छुटे छुटावत ... ... ४४१
चितवत ... ... २७८ | छूटत मुठिन ... ... ५६१
चितवत नित ... ... ५१ | छैछिगुनी... .... ... २२५
चिरजीवो ... ... २२६ | ज.
चितवन रूखे .... .... ३५८ | जगत जनायो ... ... ६६९
चित तरसत ... .... ६२८ | जयजुगल... ... ... ५०६
चितपितु ... ... ६६२ | जब जब वह सुधि... ... ४१०
चितई उछ ... .... ५४ | जटित नील ... ... ४७२
चिनवै नितै ... ... ६३१ | जदपि नाहिं ... ... ७१९
चिलक चिकन .... ... ३१४ | जनम अजाचे ... ... ६४७
चुनरी श्याम ... ... ३१८ | जनक धरत ... ... ५३८
चुवत स्वेद ... ... ५८८ | जपमाला... ... ... ६८८
छ. | जरतार... ... ... ४९१
छवि रसाल ... ... ५६५ | जहां जहां ठांई ... ... ४१२
जांइ जूही ... ... ३३८