बिहारी सतसई (महाकवि बिहारीलाल - लाला भगवानदीन कृत सविastार हिन्दी टीका सहित)
Bihari Satsai with Hindi Commentary
महाकवि बिहारीलाल (टीकाकार: लाला भगवानदीन) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( २ ) - बिहारीसतसयीकी-
इ. | ओ.
इक भींजे .... ... ६०९ | ओछे बड़े न .... ... ६००
इत आवत .... ... ४१८ | ओठ उँचै ... ... २८२
इतते उत ... ... २८६ | औ.
इन अँखियां ... .... २७० | औंघाई ... .... ३८२
इहि आशा ... .... ६३१ | औये भांति ... .... ४१५
इहि हैही .... .... ४७४ | औरै सब ... ... ७६
इहि काटे ... .... ४७ | औरै ओप ... .... ८८
उ. | औरै गति .... .... ८१
उठि ठक ठक ... ... १५६ | क.
उडकुडबाती ... ... ३१५ | कंचन तनु ... ... ५२२
उडी गुर्डी ... ... २५५ | कञ्जनयनि ... ... ६०
उदय अस्त ... ... ७२३ | कच समेट .... .... ५४३
उनकी हितु ... ... २८९ | कत लपटैयत ... ... १९२
उनि हरकी ... ... २८८ | कत बेकाज ... ... १६८
उयो शरद ... ... २३७ | कत सकुचत ... ... १९०
उर मानिक्की .... ... ५०२ | कनक कनक ... ... ६४७
उर लीन्हे ... ... ३१० | कन दैबो ... ... ६५०
उर उरझ्यो .... ... २८७ | कपट सतर ... .... १०५
ऊ. | कबकी ध्यान ... ... ६७
ऊँचे चितय ... ... ७३ | कर उठाय .... ... ५०३
ए. | करके माँड़े ... .... ५२२
एरी यह तेरी ... ... ७० | करतु मलिन ... ... ५२५
ऐ. | कर फुलेलको .... ... ६४६
ऐंचतसी ... ... ६३ |