बिहारी सतसई (महाकवि बिहारीलाल - लाला भगवानदीन कृत सविastार हिन्दी टीका सहित)
Bihari Satsai with Hindi Commentary
महाकवि बिहारीलाल (टीकाकार: लाला भगवानदीन) द्वारा
पृष्ठ 47, कुल 290 में से
संदर्भ में पढ़ें( १० ) विहारीसतसयीकी-
पाय महावर ... ... ५०८ | फिरतनु ... ... १८९
पायल पाय ... ... ७१६ | फिरि सुधि दै ... ... ३९१
पिय तियसों .... ... ४७८ | फूले ... ... ४६६
पिय मन ... ... ३२५ | फूली फाली ... ... १६५
पिय माननको ... ... १२६ | फेरि कहू ... ... ३१९
पियके ध्यान ... .... ३४९ |
पिय बिछुरनकी ... ... ३७ | ब.व.
पीठ दिये ... ... ५५९ | बंधु भये ... ... ६८८
प्रीतम दृग ... ... २११ | बढी कुटुमकी ... ... ५५८
पूसमास ... ... १३१ | बडे कहावत ... ... ५९४
पूछैक्यों ... ... ७१ | बडे नहूजे ... ... ६४८
प्यासे दोपहर ... ... ६०१ | बढ़त निकस ... ... ५५६
प्रगट भये ... ... ६९९ | बतरस ... ... २५६
प्रति बिम्बित ... ... ७०३ | बन बाटन ... ... ३९२
प्रगटी आज ... ... ४२७ | बनतनको ... ... २७२
प्रफुल हार ... ... ५४४ | बरन वास ... ... ४७६
प्रलय करन ... ... ६६१ | बर जीते शर ... ... ४६०
प्राणप्रिया ... ... १७१ | बरजैं दुनी .... ... ५५०
प्रेम अडौले ... ... ७२ | बस सकोच .... ... २९२
| बसै बुराई .... ... ६०७
फ. | बहकि बड़ाई ... ... ३७०
फिरि घरको .... ... ५६७ | बहके सब ... ... ३६६
फिर फिर ... ... ९६ | बहु धन लै .... ... ६५३
फिरि फिरि दौरत... ... ४६३ | वह किन इहि ... ... २३१
फिर फिर चित ... ... २८१ | बाढत तो ... ... २३
फिरि २ बूझति ... ... ४१९ | वाम बाहु ... ... १४२