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बिहारी सतसई (महाकवि बिहारीलाल - लाला भगवानदीन कृत सविastार हिन्दी टीका सहित)

बिहारी सतसई (महाकवि बिहारीलाल - लाला भगवानदीन कृत सविastार हिन्दी टीका सहित)

Bihari Satsai with Hindi Commentary

महाकवि बिहारीलाल (टीकाकार: लाला भगवानदीन) द्वारा

DevanagariHindipublished290 पृष्ठ

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पृष्ठ 51

( १४ ) बिहारीसतसईकी—
रही फेरिमुहुँ ... ... ८२ | लसत सेत ... ... ४७९
रहिहैं चंचल ... ... १२९ | लसे भुरासा ... ... ४८०
रह्यो ऐंच ... ... १२५ | लहलहाति ... ... ५०४
रह्यो बरोटे ... ... १४५ | लहिसूनै ... ... ३२१
राति द्योस ... ... १०३ | लाई लाल ... ... ३४०
राधा हरि ... ... २४५ | लागत कुटिल ... ... ३३०
रुक्यो सांकरी ... ... ५८७ | लाज लगाम ... ... ३६९
रुपसुधा... ... ... २२० | लाज गरव ... ... ८४
ल. | लाज गही ... ... ५५
लई साँहसी ... ... ३०९ | लाल तिहारें ... ... ३५०
लखि कौने ... ... ३२९ | लाल अलौकिक ... ... १९
लखिगुरुजन ... ... २५६ | लाल तिहारे ... ... ३०७
लखिदौरत ... ... ३० | लछन लहि ... ... १८२
लखि लखि ... ... २२५ | लिखनबैठि ... ... ५३४
लगत सुभग ... ... ५८४ | लीनेउसाहस ... ... ५२७
लगी अनलगी ... ... ५०५ | ले चुभकी ... ... ५५१
लग्यो सुमन ... ... ७२२ | लोपे कोपें ... ... ६५६
लटुवालों... ... ... ६७४ | लोभलगे ... ... २६१
लपटी पुहुप ... ... ५९० | लोनेमुहुँ ... ... ४७७
लटकि लटकि ... ... २२२ | स.
लरिका लेबेके ... ... २८३ | सकत न तुव ... ... ३७७
ललित श्याम ... ... ४६७ | सकुचि सुरत ... ... ३७
ललनसलौने ... ... १८४ | सकुचि सरकि ... ... २५१
ललन चलन ... ... १३२ | सकुचि न रहिये ... ... ३७८
ललन चलनसुनि ... ... ७२२ | सकै सताय ... ... ७२३