बिहारी सतसई (महाकवि बिहारीलाल - लाला भगवानदीन कृत सविastार हिन्दी टीका सहित)
Bihari Satsai with Hindi Commentary
महाकवि बिहारीलाल (टीकाकार: लाला भगवानदीन) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्रीगणेशायनमः ।
अथ बिहारीसतसईकी-
अकारादिअनुक्रमपूर्वक अनुक्रमणिका ।
अ. | अरतैं टरत ... ... ४५६
अंगअंगप्रतिबिम्ब ... ५३० | अरी खरी ... ... १६२
अंगअंगनग ... ... ५२९ | अरुनचरन ... ... ५१२
अंगअंगछवि ... ... ५३१ | अरुणसरोरुह ... ... ५७८
अंगुरिन .... ... २०६ | अरे परै ... ... ३८९
अजहुँ न आये ... ... १३० | अरे परंदो ... ... ६१५
अजौ तन्योनाहीं ... ... ६३९ | अरे हंसया ... ... ७१०
अतिअगाध ... ... ६०३ | अलिइन ... ... २५९
अधर धरत ... ... ६ | अलि इन लोयनसे ... २६०
अनत बसे .... ... १८८ | अहै दूहिन ... ... ६५०
अनरस ... ... ३७५ | अहै दहैंडी ... ... २२३
अनियारे दीरघ ... ३७१ |
अनी बड़ी ... ... ६५८ | आ.
अन्त भरेंगे ... ... ७०९ | आज कछु .... ... १८७
अपनी गरज ... ... ३०१ | आये दै आड़े ... ... ३८१
अपने अंगके .... ... २० | आप दगौ ... ... १८४
अपने अरैन ... ... ६८२ | आये आप .... ... ३७९
अपने गुहिकार ... ... ५५७ | आये मान .... ... ६४९
अब गति ... ... ५७६ | आननधाम ... ... ५८२